MP में UCC का मसौदा लगभग तैयार, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश सरकार UCC का मसौदा तैयार कर रही है।
- ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन का प्रस्ताव है।
- सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी में है।
- मसौदा अंतिम चरण में पहुंचने की जानकारी है।
- अभी प्रस्तावों पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) यानी UCC को लेकर सरकार की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार इसका मसौदा अंतिम चरण में तैयार कर रही है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार राज्य में लाइव इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य किया जा सकता है। हालांकि अभी यह केवल मसौदे का हिस्सा है और अंतिम नियम जारी नहीं हुए हैं।
सरकार की ओर से UCC लागू करने को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके तहत विवाह, पारिवारिक मामलों और व्यक्तिगत रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एक समान बनाने की कोशिश की जा रही है।
UCC ड्राफ्ट में क्या है
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश या राज्य में नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाना होता है। इसमें विवाह, तलाक, संपत्ति और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियम शामिल हो सकते हैं।
मध्यप्रदेश सरकार भी इसी दिशा में अपना मसौदा तैयार कर रही है। सूत्रों के अनुसार ड्राफ्ट अब अंतिम चरण में है। प्रस्तावित नियमों में लिव-इन रिलेशनशिप यानी बिना विवाह साथ रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीयन की व्यवस्था शामिल की जा सकती है। इसका उद्देश्य ऐसे रिलेशनशिप से जुड़े कानूनी मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
लिव-इन पर नया नियम संभव
मौजूदा व्यवस्था में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अलग से पंजीयन अनिवार्य नहीं है। हालांकि न्यायालयों ने कई मामलों में ऐसे रिलेशनशिप को कानूनी संरक्षण दिया है।
मध्यप्रदेश के प्रस्तावित UCC ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप की जानकारी दर्ज कराने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। यदि यह नियम लागू होता है तो साथ रहने वाले जोड़ों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीयन कराना पड़ सकता है।
इससे ऐसे रिलेशनशिप से जुड़े विवादों में उम्र, पहचान और संबंध की स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार क्यों ला रही UCC
समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार का तर्क है कि सभी नागरिकों के लिए समान नियम होने चाहिए। वर्तमान में अलग-अलग समुदायों में व्यक्तिगत मामलों के लिए अलग-अलग कानून लागू होते हैं। UCC के जरिए इन मामलों में एक समान व्यवस्था बनाने की कोशिश की जाती है।
हालांकि UCC को लेकर देशभर में अलग-अलग राय भी सामने आती रही है। कुछ लोग इसे समानता और कानूनी सुधार से जोड़ते हैं। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों से जोड़कर देखते हैं।
अभी अंतिम फैसला बाकी
मध्यप्रदेश सरकार ने अभी UCC का अंतिम मसौदा सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अंतिम नियम क्या होंगे। ड्राफ्ट तैयार होने के बाद सरकार इसे आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ाएगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि कौन-कौन से प्रावधान लागू होंगे। फिलहाल लिव-इन पंजीयन का प्रावधान प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा बताया जा रहा है।
लिव-इन कानून पर पहले भी चर्चा
देश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर समय-समय पर कानूनी बहस होती रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में वयस्कों को अपनी पसंद से साथ रहने का अधिकार माना है।
अदालतों ने यह भी कहा है कि दो वयस्कों का साथ रहना अपने आप में अपराध नहीं है। हालांकि ऐसे रिलेशनशिप में अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। इसी वजह से कई राज्यों में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर नियम बनाने की चर्चा होती रही है।
MP में आगे क्या होगा
मध्यप्रदेश सरकार का UCC ड्राफ्ट पूरा होने के बाद इसे सार्वजनिक किया जा सकता है। इसके बाद विशेषज्ञों, आम लोगों और संबंधित पक्षों की राय ली जा सकती है। अंतिम मंजूरी के बाद ही यह तय होगा कि राज्य में कौन से नए नियम लागू होंगे। लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन वाला प्रस्ताव लागू हुआ तो यह मध्यप्रदेश में व्यक्तिगत रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
जरूरी FAQ
मध्यप्रदेश में UCC क्या है?
UCC यानी समान नागरिक संहिता एक ऐसी प्रस्तावित व्यवस्था है, जिसमें व्यक्तिगत मामलों से जुड़े नियमों को समान बनाने की कोशिश की जाती है। इसमें विवाह, तलाक, संपत्ति और पारिवारिक मामलों से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
क्या मध्यप्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अभी अनिवार्य है?
नहीं। अभी यह केवल प्रस्तावित प्रावधान बताया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार UCC का मसौदा तैयार कर रही है। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का उद्देश्य क्या हो सकता है?
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध कराना और कानूनी विवादों में स्पष्टता लाना हो सकता है।
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