MP में UCC सर्वे: 93% जनता का समर्थन, 71% मुस्लिम महिलाएं पक्ष में

Amresh Kushwaha | Jun 24, 2026, 10:58 IST
MP में UCC सर्वे
मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने से पहले हुए सार्वजनिक परामर्श में साढ़े नौ लाख सुझाव मिले हैं। इसमें 93% लोग समर्थन में हैं। खास बात यह है कि 71% मुस्लिम महिलाओं ने यूसीसी के पक्ष में राय दी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

मध्य प्रदेश में यूसीसी (Uniform Civil Code) लागू होने से पहले सर्वे हुआ है।


राज्य स्तरीय समिति को कुल साढ़े नौ लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं।


इनमें से 93 फीसदी यानी 8.9 लाख लोगों ने यूसीसी का समर्थन किया है।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 71% मुस्लिम महिलाओं ने यूसीसी के पक्ष में राय दी है।


मुस्लिम पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 38% रहा, जो महिलाओं से बहुत कम है।



MP में UCC की तैयारी

मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए आम नागरिकों की राय जानना जरूरी माना गया। एक राज्य स्तरीय समिति बनाई गई जिसने पूरे प्रदेश में सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया चलाई।



मंगलवार, 23 जून तक समिति को व्यक्तिगत श्रेणी में नौ लाख 50 हजार से ज्यादा सुझाव मिले हैं। इनमें से आठ लाख 90 हजार यानी करीब 93% लोगों ने यूसीसी के समर्थन में राय दी। इसके अलावा करीब दो हजार संस्थाओं ने भी संगठनात्मक और तकनीकी सुझाव दिए हैं।



कौन कितने लोग हुए शामिल

सुझाव देने वालों में महिलाओं की संख्या चार लाख रही, जो कुल का 42% है। पुरुषों की तरफ से पांच लाख 50 हजार यानी 58% सुझाव आए हैं। खास बात यह है कि 100 से ज्यादा ट्रांसजेंडर (Transgender) व्यक्तियों ने भी अपनी राय दर्ज कराई है। इससे साफ होता है कि यह परामर्श प्रक्रिया समाज के हर वर्ग तक पहुंची है।



हिंदू समाज का जबरदस्त समर्थन

हिंदू समुदाय में यूसीसी को सबसे ज्यादा समर्थन मिला है। पांच लाख 20 हजार हिंदू पुरुषों में से चार लाख 90 हजार यानी 95% ने इसके पक्ष में राय दी है। हिंदू महिलाओं में यह आंकड़ा और भी ऊंचा रहा है। तीन लाख 70 हजार हिंदू महिलाओं में से तीन लाख 60 हजार यानी 97% ने यूसीसी को समर्थन दिया है।



सभी धर्मों की कुल चार लाख महिलाओं में से तीन लाख 80 हजार यानी 95% महिलाएं यूसीसी के साथ हैं। यह आंकड़ा बताता है कि महिलाएं कानूनी सुरक्षा और बराबरी की हिमायती हैं।



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मुस्लिम महिला-पुरुष में बड़ा फर्क

इस पूरे सर्वे का सबसे अहम पहलू मुस्लिम समुदाय के अंदर का यह आंकड़ा है। मुस्लिम वर्ग से कुल 44 हजार सुझाव मिले हैं। इनमें 29 हजार पुरुष और 15 हजार महिलाएं शामिल थीं।



29 हजार मुस्लिम पुरुषों में से सिर्फ 11 हजार यानी 38% ने यूसीसी का समर्थन किया है। वहीं 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 10 हजार 500 यानी 71% ने यूसीसी के पक्ष में अपना सुझाव दिया है। यह फर्क बहुत बड़ा है और बहुत कुछ कह देता है।



महिलाएं क्यों चाहती हैं यूसीसी

जानकारों का मानना है कि मुस्लिम महिलाएं कई मुद्दों पर कानूनी सुरक्षा चाहती हैं। पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटियों को बराबर हिस्सा, बहुविवाह पर पूरी तरह रोक, तीन तलाक की समाप्ति और तलाक के बाद गुजारा भत्ता जैसे मुद्दे महिलाओं के लिए बेहद अहम हैं। इन्हीं कारणों से उन्होंने यूसीसी को बड़ा समर्थन दिया है।



यूसीसी क्या होता है

यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता का सीधा मतलब है एक देश, एक कानून। इसके तहत शादी, तलाक, गोद लेना, विरासत और संपत्ति बांटने जैसे निजी और पारिवारिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर एक जैसा कानून लागू होगा। अभी देश में हिंदुओं के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिमों के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ (Muslim Personal Law) और ईसाइयों के लिए ईसाई विवाह अधिनियम अलग-अलग है।



सर्वे में पूछे गए बड़े सवाल

परामर्श प्रक्रिया में 12 प्रमुख सवाल रखे गए थे। इनमें शादी की न्यूनतम उम्र सभी धर्मों में समान हो या नहीं, बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगे या नहीं, तलाक के नियम एक समान हों या नहीं जैसे सवाल शामिल थे। हलाला (Halala) और इद्दत जैसी प्रथाओं पर रोक, पैतृक संपत्ति में बेटे-बेटियों को बराबर हिस्सा और लिव-इन (Live-in) संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य हो जैसे सवाल भी इसमें थे। इन सभी सवालों पर बहुमत का जवाब हां में मिला है।



FAQ

  1. समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी क्या है?
    यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है जो देश के सभी नागरिकों पर उनके धर्म से ऊपर उठकर समान रूप से लागू होगा। इसके तहत शादी की उम्र, तलाक, गोद लेना, संपत्ति में हक और विरासत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी के लिए एक ही नियम होगा।
  2. मुस्लिम महिलाओं ने यूसीसी को इतना समर्थन क्यों दिया?
    मुस्लिम महिलाएं कई मुद्दों पर कानूनी सुरक्षा चाहती हैं जो उन्हें अभी पर्सनल लॉ के तहत नहीं मिलती। पैतृक संपत्ति में बेटियों को बराबर हक, बहुविवाह पर पूरी तरह रोक, तीन तलाक की समाप्ति और तलाक के बाद गुजारा भत्ता जैसे मुद्दे उनके लिए बेहद अहम हैं। यूसीसी इन सभी मामलों में उन्हें कानूनी बराबरी दे सकता है।

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