उज्जैन सिंहस्थ 2028 में स्थायी निर्माण पर रोक, ढीले अफसरों पर भी दर्ज होगी FIR
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश सरकारसिंहस्थ 2028 के लिए नयाएक्ट ला रहीहै।
- मेलाक्षेत्र में स्थायीनिर्माण अब अपराधमाना जाएगा।
- लापरवाह अधिकारियोंपर बीएनएस केतहत कार्रवाईहोगी।
- मेलाअधिकारी को प्रबंधनके पूरेअधिकार मिलेंगे।
- यहबिल मानसून सत्रमें पेश कियाजा सकता है।
उज्जैन सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण को अपराध घोषित करने जा रही है। इसके लिए नया सिंहस्थ एक्ट लाया जा रहा है। यह कानून पुराने 1955 के अधिनियम की जगह लेगा।
सिंहस्थ का बढ़ता महत्व
बता दें कि सिंहस्थमेला हर 12 सालमें उज्जैन मेंआयोजित होता है।इसमें देश-विदेशसे लाखोंश्रद्धालु शामिल होतेहैं। मेलाक्षेत्र का सहीप्रबंधन प्रशासनके लिए बड़ीचुनौती रहा है।पिछले आयोजनोंमें अस्थायीअतिक्रमण कीशिकायतें भी सामनेआती रही हैं।
यही वजह हैकि सरकार अबसख्त कानूनीप्रावधान लानाचाहती है। नयाएक्ट प्रशासन कोमजबूत अधिकारदेगा। इससे मेलाक्षेत्र का प्रबंधनबेहतर हो सकेगा।
नए एक्ट में क्या बदलेगा
सिंहस्थ मेलाक्षेत्र तीन हजार 500 से चार हजारहेक्टेयर मेंफैला है। यहां अभीतक अस्थायी अतिक्रमण परसख्त कार्रवाई नहींहोती थी। नए एक्ट में पहली बार इसकास्पष्ट प्रावधान जोड़ा गयाहै। कोई भी स्थायी निर्माण करेगा तोसीधे केस दर्ज होगा।
अतिक्रमण रोकने कीजिम्मेदारी अब सीधे अधिकारियों परहोगी। तहसीलदार, राजस्वअधिकारी, पुलिस और नगर निगमअधिकारी इसमें शामिल हैं।
वहीं लापरवाही बरतने पर इनकेखिलाफकार्रवाईहोगी। कलेक्टर इनअधिकारियों की निगरानी करेंगेऔर तय समय-सीमा मेंरिपोर्ट लेंगे।
पुरानेमध्यभारत सिंहस्थ मेलाअधिनियम-1955 में सिर्फ 17प्रावधान थे। नए एक्ट मेंयह संख्या बढ़ाकर 50 सेअधिक कर दी गई है। नगरीयविकास विभाग ने इसका मसौदातैयार कर लिया है। अगलेसप्ताह वरिष्ठ सचिवों कीसमिति से मंजूरी लीजाएगी।
मेला अधिकारी के अधिकार
नए एक्ट में मेलाअधिकारी को व्यापक अधिकारमिलेंगे। जमीन का अस्थायीअधिग्रहण, प्रबंधन और सुरक्षाउसी के जिम्मे रहेगी।राज्य सरकार ही मेलाअधिकारी की नियुक्ति करेगी।फिलहाल उज्जैन संभाग केकमिश्नर यह जिम्मेदारी संभालरहे हैं।
अधिग्रहित जमीनसिर्फ सिंहस्थ की अवधि तकही सरकार के पास रहेगी।मेला खत्म होते ही जमीनअपने मूल स्वरूप में लौटआएगी।
दो स्तर पर बनेगी व्यवस्था
नए एक्ट में प्रशासनिकढांचा दो हिस्सों में बांटागया है। पहली, सेंट्रलकमेटी होगी, जिसके अध्यक्षसंबंधित मंत्री होंगे। इसमेंसिंहस्थ से सीधे जुड़ेअधिकारी सदस्य बनाए जाएंगे।समिति की संरचना तय करने काअधिकार सरकार के पास रहेगा।
दूसरी, लोकल कमेटीहोगी, जिसमें 15 से 20अधिकारी शामिल होंगे। इसमेंनगर निगम, जिला प्रशासनऔर पुलिस के अधिकारीहोंगे। सरकार चाहे तोअतिरिक्त सदस्य भी नामित करसकेगी।
कब लागू होगा नया कानून
नगरीय विकास विभाग नेड्राफ्ट का प्रेजेंटेशन उच्चस्तर पर पहले ही कर दिया है।अब यह वरिष्ठ सचिवों कीसमिति के पास मंजूरी के लिएजाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट (मोहन कैबिनेट)में रखा जाएगा। विभाग कीकोशिश है कि बिल इसी मानसूनसत्र में पेश हो जाए।
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