MP में 7 विवि कुलगुरु नियुक्ति पर सवाल, राजभवन का विज्ञापन दरकिनार

Sourabh Bhatnagar | Jun 05, 2026, 08:22 IST
mp 7 vice chancellors appointment against the rules
मध्य प्रदेश के 7 सरकारी विश्वविद्यालयों में कुलगुरु नियुक्तियों पर सवाल उठे हैं। राजभवन के विज्ञापन में विवि कैडर के प्रोफेसर और 10 साल के अनुभव की शर्त थी, लेकिन कॉलेज कैडर या निजी संस्थानों के शिक्षकों को नियुक्त किया गया।

    MP में कुलगुरु नियुक्ति पर सवाल

    मध्यप्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में इन दिनों एक बड़ा विवाद सुर्खियों में है। राजभवन ने जब कुलगुरु पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, तब उसमें साफ लिखा था कि उम्मीदवार विश्वविद्यालय (यूनिवर्सिटी) कैडर में प्रोफेसर हो। साथ ही, प्रोफेसर पद पर कम से कम 10 साल का अनुभव अनिवार्य था।



    एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबर के अनुसार, राज्य के कम से कम 7 विश्वविद्यालयों में ऐसे शिक्षकों को कुलगुरु की कुर्सी दी गई, जिनका पृष्ठभूमि विवि कैडर की बजाय कॉलेज कैडर या निजी संस्थानों से जुड़ी रही है। यह तब है जब विज्ञापन में शर्त एकदम स्पष्ट थी।



    किन विवि में उठे सवाल?

    • जिन सात विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों (Vice Chancellor Appointment) पर सवाल खड़े हुए हैं, उनमें ग्वालियर का जीवाजी विश्वविद्यालय शामिल है। यहां प्रो. राजकुमार आचार्य कुलगुरु हैं।

    • उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय में प्रो. अर्पण भारद्वाज इस पद पर हैं।

    • रीवा के एपीएस (Awadhesh Pratap Singh) विश्वविद्यालय में प्रो. राजेश कुमार कुरारिया।

    • जबलपुर की रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा हैं।

    • इसके अलावा, गुना के क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय में डॉ. किशन यादव, खरगोन के क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय में डॉ. मोहन लाल कोरी, और छतरपुर के छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में डॉ. राकेश कुशवाह कुलगुरु हैं। इन सभी नियुक्तियों पर एक जैसे सवाल उठे हैं।

    कुलगुरु चयन की प्रक्रिया

    यह समझना जरूरी है कि कुलगुरु की नियुक्ति कैसे होती है। राजभवन पहले पात्रता और शर्तों के साथ विज्ञापन जारी करता है। इसके बाद एक तीन सदस्यीय सर्च-कम-सेलेक्शन (Search cum Selection) कमेटी बनाई जाती है। यह कमेटी आवेदकों की शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक क्षमता और अनुभव देखती है। फिर एक पैनल तैयार होता है, जिसमें से कुलगुरु नियुक्त किया जाता है।



    सवाल यह है कि जब विज्ञापन में विवि कैडर का प्रोफेसर होना अनिवार्य था, तो इस कमेटी ने चयन करते समय उस शर्त का किस तरह पालन किया? अभी तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।



    दो कुलगुरुओं का पक्ष

    इस मामले में संबंधित कुलगुरुओं से बात की गई, जिसमें से दो ने जवाब दिया। जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजकुमार आचार्य ने कहा कि उनकी नियुक्ति शासन के नियमों के अनुसार हुई है और सभी आरोप बेबुनियाद हैं।



    छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर के कुलगुरु डॉ. राकेश कुशवाह ने भी यही कहा कि उनकी नियुक्ति शासन के आदेश के अनुसार ही की गई है।



    दोनों ने नियुक्ति में किसी भी अनियमितता से साफ इनकार किया। लेकिन सवाल यह है कि अगर नियुक्ति नियमानुसार हुई, तो विज्ञापन की शर्त में बदलाव कब और कैसे हुआ? इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।



    एमपी राजभवन ने क्या कहा?

    इस पूरे मामले में राजभवन के प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी ने कहा कि इस विषय पर उच्च शिक्षा विभाग ही स्थिति स्पष्ट कर सकता है। यानी राजभवन ने जवाब देने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग पर डाल दी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।



    नई प्रक्रिया शुरू, विवाद और गहरा

    यह मामला इसलिए और अहम हो जाता है क्योंकि प्रदेश के कुछ विश्वविद्यालयों में कुलगुरु चयन की नई प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है। अगर पुरानी नियुक्तियों में ही सवाल हैं, तो नई प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल और मजबूती से उठेगा। उच्च शिक्षा जगत में इस मामले को लेकर हलचल है। शिक्षक संगठन और विद्यार्थी वर्ग दोनों ही जवाब मांग रहे हैं।



    यह खबर क्यों जरूरी है?

    यह खबर मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक नियोजन में समान अवसर) के तहत हर नियुक्ति में पात्रता शर्तों का पालन अनिवार्य है। अगर राजभवन के अपने विज्ञापन में तय शर्तों की अनदेखी हुई, तो यह न केवल कानूनी सवाल है, बल्कि सामाजिक न्याय का भी मामला है। विश्वविद्यालयों के कुलगुरु शैक्षणिक नीति और छात्रों के भविष्य को सीधे प्रभावित करते हैं। इसलिए उनकी नियुक्ति में नियमों का पालन सुनिश्चित होना जरूरी है। यह खबर आम नागरिक, छात्र, शिक्षक और नीति निर्माता सभी के लिए प्रासंगिक है।



    FAQ

    1. प्रश्न 1: मध्यप्रदेश में कुलगुरु की नियुक्ति के लिए क्या योग्यता जरूरी है?
      उत्तर: राजभवन द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार कुलगुरु पद के लिए उम्मीदवार का विश्वविद्यालय कैडर में प्रोफेसर होना अनिवार्य है। साथ ही प्रोफेसर पद पर कम से कम 10 साल का अनुभव भी जरूरी है। नियुक्ति एक तीन सदस्यीय सर्च-कम-सेलेक्शन कमेटी की सिफारिश पर राजभवन द्वारा की जाती है।
    2. प्रश्न 2: मध्यप्रदेश के किन विश्वविद्यालयों की कुलगुरु नियुक्ति पर सवाल उठे हैं?
      उत्तर: जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, एपीएस विश्वविद्यालय रीवा, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर, क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन और छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर, इन सातों विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों पर सवाल उठे हैं।

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