रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का एआई सम्मेलन : तकनीकी से ज्यादा रामायण पर चर्चा, छात्रों ने उठाए सवाल

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में AI कॉन्फ्रेंस के नाम पर रामायण के प्रसंग सुनाए गए। पीएम-उषा योजना के फंड और तकनीकी सत्रों पर छात्रों ने उठाए गंभीर सवाल।

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Sanjay Dhiman
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Photograph: (the sootr)

News in Short

  • रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी की AI कॉन्फ्रेंस में तकनीक के बजाय रामायण के प्रसंगों पर चर्चा हुई।
  • छात्रों ने पूछा- एआई से बताओ कि रावण का पुष्पक विमान आखिर कैसे उड़ता था?
  • पीएम-उषा योजना के 75 लाख रुपए का फंड ठिकाने लगाने के लिए जल्दबाजी में आयोजन।
  • कंप्यूटर साइंस विभाग में इंटरनेट और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी, छात्र सुविधाओं को तरसे।
  • रिसर्च स्कॉलर्स का आरोप, इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस की जानकारी और पेपर पब्लिकेशन में बरती गई गोपनीयता। 

News in Detail

JABALPUR. जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में पिछले दिनों कुछ ऐसा हुआ, जिसने सबको हैरान कर दिया। यहां 'इंटरनेशनल एआई कॉन्फ्रेंस' का आयोजन किया गया। इस आयोजन में Ai से  ज्यादा चर्चा हुई रावण के पुष्पक विमान की। 

26 से 28 फरवरी 2026 तक चले इस 'SSF–IIPAR 2026' कार्यक्रम में विज्ञान कम और रामायण की कहानियां ज्यादा सुनाई गईं। छात्र यहां डेटा साइंस सीखने आए थे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। 

छात्रों का आरोप: "हमें जबरदस्ती बिठाया गया"

छात्र अभिषेक मिश्रा ने बताया कि वह अपनी प्रैक्टिकल परीक्षा देने आए थे। उन्हें जबरदस्ती इस कॉन्फ्रेंस में बिठा दिया गया। लगभग डेढ़ घंटे तक कुलगुरु का भाषण चला। उसमें पूछा गया कि एआई से बताओ पुष्पक विमान कैसे उड़ता था? रिसर्च स्कॉलर्स को उम्मीद थी कि लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर बात होगी। लेकिन वहां तो सिर्फ औपचारिक भाषणों का दौर चलता रहा। तकनीकी गहराई के नाम पर सिर्फ शून्य ही हाथ लगा।

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75 लाख का फंड और हड़बड़ी में तैयारी

इस पूरी कॉन्फ्रेंस के पीछे एक बड़ा आर्थिक एंगल भी है। 'पीएम-उषा' योजना के तहत यूनिवर्सिटी को करीब 75 लाख रुपए मिले थे। खबर है कि 20 लाख रुपए वापस करने पड़े थे। 5 लाख रुपए पहले ही लैप्स हो चुके थे। अब फाइनेंशियल ईयर खत्म होने वाला है। इसलिए पैसा ठिकाने लगाने के लिए आनन-फानन में यह कार्यक्रम हुआ। कॉन्फ्रेंस का ब्रोशर भी प्रोग्राम से महज तीन दिन पहले आया।

विभाग की खस्ता हालत और रिसर्चर्स की नाराजगी

कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट में इंटरनेट तक ठीक से नहीं चलता है। कई कंप्यूटर कबाड़ बन चुके हैं और धूल खा रहे हैं। ऐसे में लाखों की कॉन्फ्रेंस करना छात्रों को रास नहीं आया। रिसर्च स्कॉलर्स का कहना है कि उन्हें जानकारी बहुत देर से मिली। पेपर पब्लिकेशन के लिए किसी स्टैंडर्ड जर्नल की बात नहीं की गई। सिर्फ खानापूर्ति के लिए यह सारा तमाशा रचा गया है।

प्रशासन का क्या कहना है?

यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि तीन दिन में विज्ञान के सभी विषय कवर हुए। एआई पर भी अलग से सत्र लिए गए थे। हालांकि एनएसयूआई के सचिन रजक ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दूसरे कॉलेजों में नियम पहले बताए जाते हैं। यहां तो सब कुछ गुप्त तरीके से और आखिरी वक्त पर हुआ।

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एनएसयूआई रामायण कॉन्फ्रेंस जबलपुर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय
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