मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र कल से, आएगा राइट टू रिकॉल बिल

Amresh Kushwaha | Nov 30, 2025, 11:32 IST
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मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहा है। इस सत्र में दो अहम बिल पर चर्चा कि जाएंगी। इसमें नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव में बदलाव और दुकानदारों के साप्ताहिक अवकाश के अधिकार शामिल है।

BHOPAL. मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार, 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहा है। इस सत्र में दो प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होगी। इन विधेयकों का असर राज्य की नगरपालिकाओं और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। खासकर नगर परिषद और नगर पालिका के अध्यक्ष चुनाव में बदलाव से जुड़ा विधेयक चर्चा में है।



अब पार्षद नहीं, जनता तय करेगी अध्यक्ष

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राइट टू रिकॉल से जनता को मिलेगी शक्ति

नए विधेयक में राइट टू रिकॉल का प्रावधान होगा। इसका मतलब है, यदि जनता अपने चुने हुए अध्यक्ष के काम से संतुष्ट नहीं है, तो वे उन्हें हटाने के लिए वोट दे सकेंगे। इससे स्थानीय निकायों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।



एमपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र: खास बातें

  • मध्यप्रदेश सरकार ने नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में बदलाव किया है, अब पार्षदों की बजाय जनता सीधे अध्यक्ष का चुनाव करेगी।
  • नए विधेयक में राइट टू रिकॉल का प्रावधान होगा, जिससे जनता अपने चुने हुए अध्यक्ष को हटाने के लिए वोट कर सकेगी, यदि वह उनके कार्यों से संतुष्ट नहीं हैं।
  • विधानसभा में दुकान एवं प्रतिष्ठान (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 पर चर्चा होगी, जिसमें दुकानदारों और कामगारों को साप्ताहिक अवकाश का अधिकार मिलेगा।
  • दुकान और प्रतिष्ठान के रजिस्ट्रेशन को डिजिटल बनाने का फैसला लिया गया, जिससे व्यापारियों को कागजी दस्तावेजों की बजाय डिजिटल सर्टिफिकेट मिलेगा।
  • रजिस्ट्रेशन शुल्क 2500 रुपए तक होगा और किसी भी बदलाव की सूचना 7 दिन के भीतर पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी होगा।

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साप्ताहिक अवकाश पर होगी चर्चा

विधानसभा में एक और अहम विधेयक, दुकान एवं प्रतिष्ठान (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 पर चर्चा होगी। इस विधेयक के तहत दुकानदारों और कामगारों को साप्ताहिक अवकाश का अधिकार मिलेगा।



अब सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को सप्ताह में एक दिन अवकाश देना होगा। इससे कामगारों के स्वास्थ्य और कार्य जीवन में सुधार की उम्मीद है।



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रजिस्ट्रेशन के नियमों में होंगे बदलाव

इसके अलावा, सरकार ने दुकान और प्रतिष्ठान के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का फैसला लिया है। अब सभी दुकानदारों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी दुकान का रजिस्ट्रेशन करना होगा।



इसमें सेल्फ-सर्टिफिकेशन का तरीका अपनाया जाएगा। कागजी दस्तावेजों की जगह डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। यह कदम व्यापारियों और छोटे प्रतिष्ठानों को राहत देने के लिए उठाया गया है।



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नए शुल्क के साथ लागू होंगे नए नियम

नई शुल्क प्रणाली के तहत रजिस्ट्रेशन शुल्क 2500 रुपए तक होगा। किसी भी बदलाव की सूचना 7 दिन के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी होगा। इसके अलावा, किसी प्रतिष्ठान के बंद होने की सूचना भी 10 दिन के भीतर पोर्टल पर देना आवश्यक होगा।



छोटे व्यापारियों को मिलेगा लाभ

सरकार का उद्देश्य इस बदलाव से व्यापार में सहूलियत लाना है। इस नीति से छोटे व्यापारियों को स्व-प्रमाणन की सुविधा मिलेगी। उन्हें निरीक्षण से जुड़े अनावश्यक दबाव से मुक्ति मिलेगी।



इसके साथ ही, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी मजबूत किया जाएगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक सूचकांक है जो यह मापता है कि किसी देश में कारोबार करना कितना आसान है।



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