काम में ढिलाई महंगी पड़ीः 75 इंजीनियर्स बने BLO सहायक, भोपाल निगम कमिश्नर का बड़ा एक्शन

भोपाल नगर निगम के 75 इंजीनियरों को बीएलओ का सहायक बना दिया गया है। यह निर्णय सिविल, जलकार्य और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों द्वारा काम न करने के कारण लिया गया है।

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Sanjay Dhiman
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Photograph: (the sootr)

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BHOPAL. भोपाल नगर निगम कमिश्नर का एक ताज़ा आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। इस आदेश में 75 इंजीनियरों को बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) का सहायक बना दिया गया है। यह आदेश इसलिए लिया गया क्योंकि इन इंजीनियरों ने अपने नियमित काम में कोई प्रगति नहीं की थी। निगमायुक्त संस्कृति जैन ने स्पष्ट किया कि सिविल कार्यों में धीमी गति के चलते इस कदम को उठाया गया है।

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किसे और क्यों दिया गया बीएलओ का काम?

निगम के 75 इंजीनियरों में 5 सहायक यंत्री और 70 सब इंजीनियर शामिल हैं। इनकी जिम्मेदारी अब सिर्फ नगर निगम के सिविल, जलकार्य और इलेक्ट्रिकल कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। इन इंजीनियरों को सुबह 7 बजे से लेकर रात के चौपाल तक मतदाताओं से गणना फार्म लेकर डिजिटाइजेशन का काम करना होगा। इसके साथ ही इन इंजीनियरों को मतदान केंद्रों पर जाकर रिपोर्ट भी देनी होगी।

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भोपाल नगरनिगम कमिश्नर के आदेश को ऐसे समझें 

  • भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने 75 इंजीनियरों को बीएलओ(BLO) का सहायक बनाया क्योंकि वे अपने सिविल कार्यों में प्रगति नहीं कर रहे थे।
  • इन इंजीनियरों को अब मतदान केंद्रों पर गणना फार्मों का डिजिटाइजेशन करना होगा और हर दो घंटे में रिपोर्ट भी देनी होगी।
  • इन इंजीनियरों में 5 सहायक यंत्री और 70 सब इंजीनियर शामिल हैं, जो सिविल, जलकार्य और इलेक्ट्रिकल विभागों से हैं।
  • निगम कमिश्नर पिछले एक महीने से इंजीनियरों से काम का हिसाब मांग रही थीं, लेकिन इंजीनियरों के पास सही जानकारी नहीं थी।
  • इंजीनियरों के काम में लापरवाही को देखते हुए उन्हें बीएलओ का सहायक बना दिया गया, जिससे उनकी जिम्मेदारी का सही मूल्यांकन किया जा सके।

बीएलओ के साथ क्या काम करना होगा?

इन इंजीनियरों को अपने मौजूदा जिम्मेदारियों के अलावा बीएलओ के तौर पर काम भी करना होगा। वे मतदान केंद्रों पर लैपटॉप लेकर जाएंगे और हर दो घंटे में अपनी रिपोर्ट देंगे। यह काम उन्हें सिविल, जलकार्य और इलेक्ट्रिकल विभाग में अपनी मुख्य जिम्मेदारियों के साथ करना होगा।

इंजीनियरों के काम के हिसाब की कमी

निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने पिछले एक महीने से इंजीनियरों से उनके काम का हिसाब मांगा था। हालांकि, इंजीनियरों के पास यह जानकारी नहीं थी कि उन्होंने कौन से एस्टीमेट तैयार किए हैं। उन्होंने किस मद में बुकिंग हुई है, या वर्क ऑर्डर कब जारी हुआ है। इसके साथ ही, यह भी नहीं पता था कि फील्ड में काम की स्थिति क्या है। क्या काम शुरू हुआ है या नहीं, यह जानने के लिए निगम को एक भी इंजीनियर से सही जवाब नहीं मिल सका।

सजा के रूप में बीएलओ का सहायक बनाना

इंजीनियरों से काम का हिसाब न मिलने के बाद निगम कमिश्नर ने यह एक्शन लिया है। यह कार्रवाई कड़ी सजा के रूप में इन इंजीनियरों को बीएलओ का सहायक बनाया गया है। काम में लापरवाही पर कार्रवाई की गई है। नगर निगम में यह चर्चा का विषय बन गया है।

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अब काम में लापरवाही पडे़गी भारी

यह कदम नगर निगम के प्रशासनिक निर्णयों का हिस्सा है, जिसमें यह साबित करना है कि अगर कोई अपने काम में लापरवाही करता है, तो उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ता है। हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या इस तरह के आदेश से समस्या का समाधान होगा या यह सिर्फ एक अस्थायी उपाय रहेगा।

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