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Photograph: (the sootr)
INDORE. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, इंदौर खंडपीठ में दिग्विजय सिंह की जनहित याचिका पर नोटिस हुए हैं। पूर्व सीएम सिंह ने सांप्रदायिक हिंसा रोकने वाली सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन लागू करने की मांग की। उन्होंने धार्मिक रैली और जुलूसों पर जारी दिशा-निर्देशों के पालन की बात कही है।
हाई कोर्ट में 27 नवंबर को इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी हुई थी। खास बात यह है कि सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह ने स्वयं अपनी पैरवी की थी।
हाईकोर्ट ने यह दिए आदेश
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन से इस मामले में जवाब मांगा है। शासन से याचिका में उठाए मुद्दों के पालन नहीं होने को लेकर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 में रखी गई है।
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याचिका के दौरान दिग्गी को बताया था अपराधी
याचिका की सुनवाई के दौरान शासन पक्ष ने सिंह पर 11 एफआईआर होने की बात कहते् हुए उन्हें अपराधी बताया था। साथ ही कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हो रहा है इसलिए याचिका का कोई मतलब नहीं है। इस पर सिंह ने कहा था कि मुझे तो शासन ने आदतन अपराधी बता दिया। जबकि मुझे पर राजनीतिक केस है, कोई भ्रष्टाचार या इस तरह का केस नहीं है। मैं 55 साल से जनसेवा में हूं, इसलिए इस तरह के केस तो राजनीतिक होते हैं।
सुनवाई होते ही लाइव स्ट्रिमिंग कराई थी बंद
याचिका की सुनवाई 27 नवंबर को दोपहर करीब 1 बजे शुरू हुई। इसी दौरान अधिवक्ता ने लाइव स्ट्रिमिंग का अन्य उपयोग की बात कहते हुए इसे बंद कराने का आग्रह किया। इसके बाद बंद कर दिया गया था। सिंह की याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सिंह छाबड़ा और अधिवक्ता अमन अरोरा है। हालांकि सिंह ने ही अपने तर्क रखे।
यह बोले थे दिग्विजय सिंह
हाईकोर्ट डबल बैंच के सामने सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन कराना है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है। लेकिन उपद्रव होने, धार्मिक रैली, जुलूस को लेकर इनका पालन नहीं हो रहा है।
पीड़ितों को कैसे मुआवजा मिलेगा, जिले में किस पुलिस अधिकारी से संपर्क करे, यह सब नहीं हो रहा है। मस्जिदों के बाहर जाकर लाउडस्पीकर बजाए जाते हैं, डीजे बजाए जाते हैं। पुलिस, प्रशासन मूक बना रहता है। किसी पर कार्रवाई नहीं होती है।
शासन की ओर से यह कहा गया-
शासन की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। साथ ही इस मामले में जो मामले याचिका में बताए गए हैं, इसमें जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की गई है। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि हम चाहते हैं कि ऐसा है तो शासन इस पर स्टेटस रिपोर्ट जारी करे। इस संबंध में कहीं कोई जानकारी नहीं है। या फिर न्यायमित्र नियुक्त किया जाए। सभी पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामला हियर्ड एंड रिजर्व में रख लिया था, जो अब जारी हो गया है।
याचिका में इन सभी को बनाया गया पक्षकार
पूर्व सीएम सिंह ने इस मामले में याचिका लगाई हुई है जिसमें मप्र शासन, पीएस गृह विभाग, डीजीपी के साथ ही इंदौर, उज्जैन, मंदसौर कलेक्टर व एसपी को पक्षकार बनाया है।
दिग्गी ने राममंदिर को लेकर यह कहा है याचिका में-
सिंह ने याचिका में इंदौर, उज्जैन, मंदसौर में दिसंबर 2020 के दौरान हुई घटनाओं के उदाहरण दिए। उन्होंने एफआईआर आदि के साथ गंभीर आरोप लगाए हैं। सिंह ने कहा है कि श्रीराम मंदिर के पवित्र निर्माण काम के दौरान दान संग्रह किया गया। इस दौरान कुछ संगठनों द्वारा इंदौर, उज्जैन व मंदसौर में साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई।
इससे शांति सद्भवा खत्म हुआ और संपत्तियों का नुकसान हुआ। सिंह ने् कहा कि हम राम मंदिर निर्माण के पवित्र काम का समर्थन करते हैं। लेकिन फंड कलेक्शन स्वैच्छिक होना चाहिए। दान देने के लिए अल्पसंख्यक वर्ग पर दबाव नहीं हो और ना ही धमकाना चाहिए।
दान देने की आड़ में कुछ संगठनों ने अल्पसंख्यक वर्ग को टारगेट किया। धन संग्रह रैलियों के दौरान आयोजकों द्वारा सुनियोजित तरीके से हिंसा फैलाने का काम किया। लेकिन इसके बाद भी अधिकाियों ने लापरवाही बरती और कोई कारर्वाई नही की। इस मामले में शासन को भी रिप्रेजेंटेश दिया लेकिन कुछ नहीं हुआ, इसलिए याचिका दायर की है।
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पूर्व सीएम की माब लिंचिंग रोकने की मांग
पूर्व सीएम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों को मप्र में लागू करने की मांग की। खासकर माब लिंचिंग और माब वायलेंस रोकने के लिए सख्त कदम उठाना ज़रूरी है।
धार्मिक रैलियों व जुलूसों में शांति-सद्भाव बनाए रखने के लिए उपाय करने चाहिए। इसके लिए हर जिले में नोडल पुलिस अधिकारी और एक टास्क फोर्स हो। यह फोर्स इंटेलिजेंस, हेट स्पीच पर नजर रखकर पूरी तरह से नियंत्रण करे।
इंदौर के इस विवाद का उदाहरण दिया
इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका में सिंह ने 29 दिसंबर 2020 के इंदौर, चंदनखेड़ी विवाद का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मनोज चौधरी के नेतृत्व में लोग तलवार-स्टिक लेकर निकले थे। वहां अल्पसंख्यकों पर हमले हुए थे, पर पुलिस व प्रशासन ने कुछ नहीं किया था।
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