इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज भी पहुंची थी ED, जारी हुई सूचना, सुरेश भदौरिया बोलते रहे झूठ
Sanjay Gupta | Nov 28, 2025, 20:17 IST
Photograph: (THESOOTR)
इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में ईडी ने छापेमारी की, जिसमें फर्जी डिग्रियां और घोस्ट फैकल्टी के मामले सामने आए। सुरेश भदौरिया और रावतपुरा सरकार पर आरोप हैं कि उन्होंने रिश्वत लेकर कॉलेज की मान्यता प्राप्त की। ईडी और सीबीआई की जांच जारी है।
INDORE. मेडिकल कॉलेज की मान्यता में रिश्वत केस को लेकर ईडी (प्रवर्तन निदेशलाय) दिल्ली द्वारा गुरुवार (27 नवंबर) को नौ राज्यों में 15 जगहों पर छापे मारे थे। इसकी औपचारिक पुष्टि अब शुक्रवार को ईडी ने औपचारिक सूचना जारी करके दे दी है।
वहीं खुद नामों का खुलासा करते हुए बताया है जांच के लिए ईडी की टीम इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज भी पहुंची थी जो सुरेश सिंह भदौरिया का है। ईडी ने तलाशी अभियान के दौरान मोबाइल फोन, सर्वर में संग्रहीत डेटा सहित विभिन्न साक्ष्य जब्त किए गए हैं
सुरेश भदौरिया से इस छापे के संबंध में द सूत्र ने दो-दो बार फोन करके बात की थी, लेकिन वह खुलकर झूठ बोलते रहे कि कोई कार्रवाई नहीं है और छापे की खबर पूरी तरह से झूठ है। अब ईडी नई दिल्ली से जारी सूचना ने ही उनके झूठ की पोल खोलकर रख दी है। भदौरिया इस मामले में सीबीआई द्वारा 30 जून को दर्ज की गई एफआईआर में भदौरिया आरोपी नंबर 25वें बने हुए हैं।
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ईडी ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा आयोजित निरीक्षण प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार के संबंध में 27.11.2025 को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में 15 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें 7 निजी मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं।
यह तलाशी सात मेडिकल कॉलेजों, श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एसआरआईएमएसआर), रायपुर, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, इंदौर, गायत्री मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम, फादर कोलंबो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, वारंगल, स्वामीनारायण इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एसआईएमएसआर), कल्लोल, नेशनल कैपिटल रीजन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, मेरठ और श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज, खगड़िया सहित कई स्थानों पर की गई।
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प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई, नई दिल्ली के एसी III द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत कई निजी मेडिकल कॉलेजों, सरकारी अधिकारियों और अन्य के खिलाफ दर्ज केस आदार पर जांच शुरू की है।
इस केस से पता चला है कि देश भर के विभिन्न निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), भारत सरकार, नई दिल्ली और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), नई दिल्ली से जुड़े कुछ सरकारी अधिकारियों की सांठगांठ है।
ये मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण से संबंधित गोपनीय जानकारी को मेडिकल कॉलेजों से जुड़े प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों और बिचौलियों को गैरकानूनी तरीके से बता रहे थे। इससे वह मापदंडों में हेरफेर कर सकते थे और मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक पाठ्यक्रम चलाने के लिए अनुमोदन प्राप्त कर सकते थे।
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एफआईआर में यह भी खुलासा किया गया है कि कई व्यक्तियों ने बिचौलियों के रूप में काम किया और मेडिकल कॉलेजों को संवेदनशील जानकारी लीक की। इससे अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट हासिल करने के लिए मूल्यांकनकर्ताओं को रिश्वत देने, गैर-मौजूद या प्रॉक्सी फैकल्टी की तैनाती की और निरीक्षण के दौरान नकली मरीज भर्ती कर परीक्षण कराया।
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इस पूरे कांड में रावतपुरा सरकार यानी रविशंकर महाराज मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आए हैं। यह भिंड (लहार) के हैं। इसी एरिया के भदौरिया भी है। भदौरिया के रावतपुरा सरकार से सालों से संबंध है। भदौरिया ने रावतपुरा के साथ संपर्कों का लाभ उठाया और धीरे-धीरे सरकारी सिस्टम में पैठ बना ली।
वहीं रावतपुरा को भदौरिया के मेडिकल कॉलेजों से संपर्कों का लाभ हो रहा था। दोनों की इसी जुगलबंदी ने भदौरिया को मान्यता दिलाने में एक्सपर्ट बना दिया और इसमें कमीशन खाया। एक-एक कॉलेज की मान्यता के लिए लाखों नहीं बल्कि दो से तीन करोड़ रुपए तक की डील हुई है। इसमें कमीशन खाया गया। राशि संबंधित को हवाला के जरिए पहुंचाई जाती थी।
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भदौरिया को लेकर सीबीआई की रिपोर्ट में है कि इंडेक्स ग्रुप में चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, पैरामेडिकल साइंसेज और प्रबंधन में शिक्षा देने वाले संस्थान शामिल हैं, जो शैक्षणिक वर्ष 2015-16 से मालवांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। भदौरिया मालवांचल विश्वविद्यालय का संचालन करने वाली मूल संस्था मयंक वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष भी हैं।
भदौरिया द्वारा इंडेक्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, इंदौर में डॉक्टरों और कर्मचारियों को अस्थायी आधार पर नियुक्त किया। लेकिन कॉलेज की मान्यता के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की न्यूनतम मानक आवश्यकताओं (MSR) को पूरा करने के लिए उन्हें गलत तरीके से स्थाई फैकल्टी बताया। इसके लिए आधार सक्षम बायोमेट्री उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) के तहत बायोमेट्रिक उपस्थिति में हेरफेर करने के लिए इन व्यक्तियों के कृत्रिम क्लोन फिंगर इंप्रेशन बनाने तक के काम किए।
सीबीआई यहीं तक नहीं रुकी। यह भी खुलासा किया गया है कि भदौरिया अपने करीबी सहयोगियों की मदद से मालवांचल विश्वविद्यालय और उससे जुड़े संस्थानों के माध्यम से कई तरह की अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इन गतिविधियों में अक्सर अयोग्य उम्मीदवारों को फर्जी स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री जारी करना शामिल है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के राहुल श्रीवास्तव और चंदन कुमार सभी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार से जुड़े अधिकारी रिश्वत के बदले में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण, नवीनीकरण और अनुमोदन पत्र (10 ए) जारी करने के काम में शामिल है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आरोपी अधिकारी विभाग के भीतर गोपनीय फाइलों का पता लगाकर और उन पर नज़र रखकर अपने आधिकारिक अधिकार का दुरुपयोग कर रहे थे। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई आंतरिक टिप्पणियों और टिप्पणियों की अवैध रूप से तस्वीरें खींच रहे निजी व्यक्तियों और मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया जा रहा था। इसमें भदौरिया भी शामिल है।
वहीं खुद नामों का खुलासा करते हुए बताया है जांच के लिए ईडी की टीम इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज भी पहुंची थी जो सुरेश सिंह भदौरिया का है। ईडी ने तलाशी अभियान के दौरान मोबाइल फोन, सर्वर में संग्रहीत डेटा सहित विभिन्न साक्ष्य जब्त किए गए हैं
भदौरिया लगातार बोलते रहे झूठ
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ईडी ने बताया यहां मारा था छापा
यह तलाशी सात मेडिकल कॉलेजों, श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एसआरआईएमएसआर), रायपुर, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, इंदौर, गायत्री मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम, फादर कोलंबो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, वारंगल, स्वामीनारायण इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एसआईएमएसआर), कल्लोल, नेशनल कैपिटल रीजन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, मेरठ और श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज, खगड़िया सहित कई स्थानों पर की गई।
ED, Delhi Zonal Office has conducted search operations on 27.11.2025 at 15 locations across the states of Andhra Pradesh, Telangana, Maharashtra, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Gujarat, Bihar, Uttar Pradesh, and NCT of Delhi, including 7 private medical colleges in connection with… pic.twitter.com/Hvrd8KoKYS
— ED (@dir_ed) November 28, 2025
सुरेश भदौरिया के इंडेक्स कॉलेज में MBBS की सीट के बाद MDS का भी झटका, काउंसलिंग में नहीं होंगी शामिल
सीबीआई एफआईआर के बाद कार्रवाई
इस केस से पता चला है कि देश भर के विभिन्न निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), भारत सरकार, नई दिल्ली और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), नई दिल्ली से जुड़े कुछ सरकारी अधिकारियों की सांठगांठ है।
ये मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण से संबंधित गोपनीय जानकारी को मेडिकल कॉलेजों से जुड़े प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों और बिचौलियों को गैरकानूनी तरीके से बता रहे थे। इससे वह मापदंडों में हेरफेर कर सकते थे और मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक पाठ्यक्रम चलाने के लिए अनुमोदन प्राप्त कर सकते थे।
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सुरेश भदौरिया के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स की कॉशन मनी, स्टायपेंड में धोखाधड़ी, हाईकोर्ट बोला- एक्शन ले NMC, MU
एफआईआर में भी यह लिखा है
एमपी सरकार के दो साल पूरे होने पर सर्वे में शामिल होने के लिए फोटो पर क्लिक करें...
रावतपुरा सरकार के साथ भदौरिया की सांठगांठ
वहीं रावतपुरा को भदौरिया के मेडिकल कॉलेजों से संपर्कों का लाभ हो रहा था। दोनों की इसी जुगलबंदी ने भदौरिया को मान्यता दिलाने में एक्सपर्ट बना दिया और इसमें कमीशन खाया। एक-एक कॉलेज की मान्यता के लिए लाखों नहीं बल्कि दो से तीन करोड़ रुपए तक की डील हुई है। इसमें कमीशन खाया गया। राशि संबंधित को हवाला के जरिए पहुंचाई जाती थी।
ये खबर भी पढ़ें...
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भदौरिया ने घोस्ट फैकल्टी के लिए क्लोन फिंगर इंप्रेशन बनाए
भदौरिया द्वारा इंडेक्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, इंदौर में डॉक्टरों और कर्मचारियों को अस्थायी आधार पर नियुक्त किया। लेकिन कॉलेज की मान्यता के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की न्यूनतम मानक आवश्यकताओं (MSR) को पूरा करने के लिए उन्हें गलत तरीके से स्थाई फैकल्टी बताया। इसके लिए आधार सक्षम बायोमेट्री उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) के तहत बायोमेट्रिक उपस्थिति में हेरफेर करने के लिए इन व्यक्तियों के कृत्रिम क्लोन फिंगर इंप्रेशन बनाने तक के काम किए।
भदौरिया दे रहे हैं फर्जी पीएचडी, ग्रेजुएशन डिग्रियां
स्वास्थ्य मंत्रालय के राहुल श्रीवास्तव और चंदन कुमार सभी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार से जुड़े अधिकारी रिश्वत के बदले में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण, नवीनीकरण और अनुमोदन पत्र (10 ए) जारी करने के काम में शामिल है।
अधिकारी कैसे कर रहे थे भदौरिया को मदद
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