MP में गिद्ध अलर्ट! जंगलों से गायब हो रहे कुदरत के सफाईकर्मी, डिजिटल ट्रैकिंग से तलाशेगा वन विभाग
मध्य प्रदेश के जंगलों में गिद्धों की घटती मौजूदगी अब वन विभाग के लिए चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकार को अब गरुड़ डिजिटल ऐप के जरिए गिद्धों की लोकेशन और गतिविधियों की निगरानी करनी पड़ रही है। 22 से 24 मई तक प्रदेशभर में गिद्धों की ग्रीष्मकालीन गणना होगी।
MP में गिद्ध गणना अभियान
- एमपी में 22 से 24 मई तक गिद्ध गणना होगी।
- गरुड़ डिजिटल ऐप से होगी लाइव मॉनिटरिंग।
- कान्हा, पेंच, बांधवगढ़ समेत कई जंगलों में सर्वे।
- फरवरी 2026 में सिर्फ 224 गिद्ध दर्ज हुए थे।
- गिद्धों की घटती संख्या से बढ़ सकता है संक्रमण खतरा।
- वन विभाग को अब डिजिटल ट्रैकिंग का लेना पड़ा सहारा।
जंगलों से क्यों गायब हो रहे गिद्ध?
एक समय था जब जंगलों और गांवों के आसपास गिद्ध आसानी से दिखाई देते थे। लेकिन अब उनकी संख्या लगातार घट रही है। विशेषज्ञ इसके पीछे जहरीली पशु दवाओं, बदलते पर्यावरण, जंगलों में बढ़ते दबाव और खाद्य संकट को बड़ी वजह मानते हैं। स्थिति इतनी गंभीर मानी जा रही है कि वन विभाग को बार-बार सर्वे कर वास्तविक आंकड़े जुटाने पड़ रहे हैं।
जंगल की सफाई व्यवस्था भी खतरे में
गिद्धों को कुदरत का सबसे बड़ा सफाईकर्मी माना जाता है। वे मृत पशुओं को तेजी से खत्म कर जंगलों को संक्रमण से बचाते हैं। अगर गिद्धों की संख्या और घटती है, तो जंगलों में सड़ते शवों का अंबार लग सकता है। इससे बैक्टीरिया, संक्रमण और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। यानी यह सिर्फ एक पक्षी के गायब होने का मामला नहीं, बल्कि पूरे जंगल के इकोसिस्टम पर खतरे का संकेत है।
अब ऐप बताएगा जंगल में कितने बचे गिद्ध
गिद्धों की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच वन विभाग अब गरुड़ डिजिटल ऐप का इस्तेमाल कर रहा है। फील्ड स्टाफ जंगलों में जाकर गिद्धों की लोकेशन, संख्या और गतिविधियों का डेटा सीधे ऐप में अपलोड करेगा। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर स्थिति सामान्य होती, तो क्या गिद्धों की निगरानी के लिए इतने बड़े डिजिटल सर्वे की जरूरत पड़ती?
फरवरी में 224 गिद्ध मिले
वन विभाग ने फरवरी 2026 में भी गिद्ध गणना अभियान चलाया था। उस दौरान सिर्फ 224 गिद्ध दर्ज किए गए थे। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला हो सकता है। क्योंकि मध्य प्रदेश जैसे बड़े वन क्षेत्र वाले राज्य में गिद्धों की संख्या इससे कहीं ज्यादा होनी चाहिए।
कान्हा से बांधवगढ़ तक बढ़ी सतर्कता
गिद्धों की गिरती संख्या को देखते हुए अब कान्हा टाइगर रिजर्व, पेंच, बांधवगढ़ और कई वन मंडलों में विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। वन विभाग को आशंका है कि यदि समय रहते संरक्षण नहीं हुआ, तो कई क्षेत्रों से गिद्ध पूरी तरह गायब हो सकते हैं।
गिद्ध खत्म हुए तो जंगल बीमार हो जाएंगे
कान्हा टाइगर रिजर्व के एसडीओ आशीष पांडे के मुताबिक, गिद्ध पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने माना कि मृत पशुओं की सफाई में गिद्ध सबसे अहम कड़ी हैं और उनकी संख्या में गिरावट पर्यावरणीय खतरे का संकेत हो सकती है।
साइलेंट इकोलॉजिकल क्राइसिस
बार-बार हो रही गिद्ध गणना सिर्फ एक रूटीन सर्वे नहीं मानी जा रही। असल में यह जंगलों में बढ़ रहे साइलेंट इकोलॉजिकल क्राइसिस का संकेत भी हो सकता है। गिद्धों की घटती संख्या यह बता रही है कि जंगलों का प्राकृतिक सफाई तंत्र कमजोर पड़ रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या वन विभाग सिर्फ गिनती कर रहा है, या फिर गिद्धों को बचाने के लिए जमीन पर ठोस बदलाव भी दिखाई देंगे?
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