एमपी के शहडोल में 400 करोड़ का जमीन घोटाला : पटवारी और अफसरों की सांठगांठ उजागर
Sanjay Dhiman | May 16, 2026, 23:59 IST
Photograph: (the sootr)
शहडोल में 400 करोड़ की सरकारी चरनोई जमीन को पटवारी और अफसरों ने रिश्तेदारों को बांट दिया। यह खुलासा पुलिस जांच में हुआ है। अब रसूखदारों पर केस दर्ज करने का कोर्ट ने आदेश दिया है।
शहडोल जिले के खड़हूली गांव में सरकारी चरनोई जमीन की सुरक्षा के नाम पर पटवारियों और राजस्व अधिकारियों ने बड़ा जमीन घोटाला किया। लगभग 8-10 एकड़ जमीन को सरकारी रिकॉर्ड से हटाकर अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम कर दिया गया।
मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने इसे 200 करोड़ रुपए का मामला माना, जबकि शिकायतकर्ता मुकेश मिश्रा का दावा है कि मौजूदा बाजार भाव के अनुसार यह घोटाला 400 करोड़ रुपए से कम नहीं है।
सरकारी जमीन बचाने की जिम्मेदारी रखने वाले अफसरों ने कोई कदम नहीं उठाया। जागरूक नागरिक मुकेश मिश्रा ने जोखिम उठाकर कोर्ट में निजी याचिका दाखिल की। अदालत की सख्ती के बाद ब्योहारी थाना प्रभारी ने 12 मई 2026 को रिपोर्ट सौंपकर भ्रष्टाचार साबित किया।
पुलिस ने कोर्ट को रिपोर्ट में बताया कि आरोप ‘शब्दशः सिद्ध’ हैं। कोर्ट से सिफारिश की गई कि संबंधित पटवारी और राजस्व अधिकारियों पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
शहडोल के कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कैमरे पर कबूल किया कि रिकॉर्ड में खेल हुआ है। लेकिन महीनों बीतने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह उठता है कि क्या इस 400 करोड़ रुपए की लूट का हिस्सा बड़े अधिकारियों तक पहुंच चुका है। एक आम नागरिक अकेले भू-माफिया तंत्र के खिलाफ कोर्ट और थानों में संघर्ष कर रहा है।
कोर्ट की रिपोर्ट के बाद भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। जनता और स्थानीय नागरिक मांग कर रहे हैं कि सरकारी जमीन को तुरंत सरकारी खाते में वापस दर्ज किया जाए और भ्रष्टाचारियों को सख्त सजा मिले।
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मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने इसे 200 करोड़ रुपए का मामला माना, जबकि शिकायतकर्ता मुकेश मिश्रा का दावा है कि मौजूदा बाजार भाव के अनुसार यह घोटाला 400 करोड़ रुपए से कम नहीं है।
प्रशासन की नाकामी और शिकायतकर्ता का संघर्ष
भ्रष्टाचार का तंत्र और मोडस ऑपरेन्डी
पटवारी और अफसरों की करतूत
- पटवारी राजेंद्र द्विवेदी और उनके परिवार ने जमीन को फर्जी तरीके से निजी नामों पर ट्रांसफर किया।
- नायब तहसीलदार अमित मिश्रा और अन्य अधिकारियों ने सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी की।
- जमीन की बिक्री से करोड़ों रुपए अपने खाते में डाले।
अदालत और पुलिस की रिपोर्ट
कलेक्टर और सरकार की भूमिका
अदालत का फैसला और भविष्य
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