दो महिला DSP, दो बड़े कांड ने पुलिस वर्दी पर खड़े किए सवाल
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- दो महिला DSP से जुड़े मामलों ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- सिवनी हवाला कांड में करोड़ों रुपए की रकम जांच का केंद्र बनी।
- कटनी कांड के जमीन सौदे में आर्थिक लेनदेन की जांच जारी है।
- मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और दस्तावेज जांच में अहम सबूत बने।
- दोनों मामलों में अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया से होगा।
मध्य प्रदेश पुलिस में DSP रैंक की दो महिला अधिकारियों से जुड़े मामलों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कटनी की तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ जमीन सौदे, कथित आर्थिक लेनदेन और पद के दुरुपयोग के आरोप में FIR दर्ज होने के बाद करीब दस महीने पुराना सिवनी का पूजा पांडे हवाला कांड भी चर्चा में आ गया है।
दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों में पुलिस पद की शक्ति और कथित आर्थिक लेनदेन के आरोप जांच के केंद्र में हैं। नेहा पच्चीसिया मामले में 1.07 करोड़ की जमीन सिर्फ 15 लाख के भुगतान में खरीद ली गई।
जमीन सौदे में 18.20 लाख रुपए की रजिस्ट्री और 15 लाख रुपए के कथित भुगतान की जांच हो रही है। वहीं पूजा पांडे मामले में नीचे दी गई पूरी जानकारी पुलिस द्वारा तैयार की गई चार्जशीट में दर्ज आरोपों और जांच निष्कर्षों के आधार पर है।
पहले समझिए, पूजा पांडे का मामला आखिर था क्या?
8 और 9 अक्टूबर 2025 की दरम्यानी रात तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे सिवनी को एक सफेद क्रेटा कार के बारे में सूचना मिली। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार कार क्रमांक MH-13-EK-3430 में अपराध से जुड़ी रकम और मादक पदार्थ ले जाने की सूचना दी गई थी।
यह सूचना पहले जबलपुर क्राइम ब्रांच के आरक्षक प्रमोद सोनी तक पहुंची थी। इसके बाद DSP पंकज मिश्रा के माध्यम से यह सूचना पूजा पांडे तक पहुंची। चार्जशीट के मुताबिक पूजा पांडे ने अपने कार्यालय के पुलिसकर्मियों, गनमैन, चालक और बंडोल थाना प्रभारी को बुलाया।
अलग-अलग स्थानों पर पुलिसकर्मियों को लगाया गया। लेकिन चार्जशीट में आरोप है कि इस कार्रवाई की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम को नहीं दी गई। संबंधित थाने में भी नाकाबंदी या चेकिंग की विधिवत सूचना दर्ज नहीं की गई।
रात 2 से 3 बजे के बीच रोकी गई क्रेटा
चार्जशीट के अनुसार रात करीब 2 से 3 बजे के बीच क्रेटा कार शीलादेही बायपास के पास पहुंची। पूजा पांडे और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों ने कार को रोका और उसे हाईवे से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर वैष्णव देवी मंदिर के पास ले जाया गया। कार में इरफान पठान और शेख मुख्तार मौजूद थे।
चार्जशीट में आरोप है कि शुरुआत में दोनों की पहचान के दस्तावेज और वाहन के कागजात विधिवत नहीं जांचे गए। इसके बाद कार की ड्राइवर सीट और बगल वाली सीट के नीचे की मैटिंग हटाकर जांच की गई। वहां दो धातु के बॉक्सनुमा चेंबर मिले। इनमें 500-500 रुपये के नोटों के बंडल रखे हुए थे।
सामने आया 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार का आंकड़ा
चार्जशीट में दर्ज आरोपों के अनुसार कार से मिली कुल रकम 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये बताई गई। शेख मुख्तार ने यह रकम अपने मालिक सोहनलाल परमार की बताई।
इसके बाद चार्जशीट में रकम के बंटवारे को लेकर बातचीत का गंभीर आरोप दर्ज है। इसमें पहले 75 प्रतिशत, फिर 60 प्रतिशत और अंत में 50 प्रतिशत राशि के बंटवारे की बात होने का उल्लेख किया गया है।
आरोप है कि इरफान पठान और शेख मुख्तार ने कार के गुप्त बॉक्स से 1 करोड़ 45 लाख रुपये निकाले। यह रकम प्लास्टिक की बोरी में रखी गई और बाद में पुलिस के सरकारी वाहन में रखी गई। चार्जशीट के मुताबिक यह पूरा घटनाक्रम करीब 4 से 5 घंटे तक चला।
1.45 करोड़ की बोरी सरकारी वाहन से SDOP ऑफिस पहुंची
चार्जशीट के अनुसार क्रेटा से 1 करोड़ 45 लाख रुपये अलग किए जाने के बाद इरफान और मुख्तार को बाकी रकम के साथ जाने दिया गया। आरोप है कि उनके खिलाफ उस समय कोई विधिवत जब्ती या अन्य कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
सुबह करीब 5:30 बजे पूजा पांडे अपने स्टाफ के साथ SDOP कार्यालय पहुंचीं। चार्जशीट में आरोप है कि नोटों से भरी बोरी को SDOP कार्यालय में रखवा दिया गया।
पुलिस की चार्जशीट में इस बात को विशेष रूप से दर्ज किया गया है कि रकम को तत्काल संबंधित थाने के मालखाने में जमा नहीं कराया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई।
मामला खुला तो वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे
चार्जशीट के अनुसार 9 अक्टूबर को सोहनलाल परमार अपने साथियों के साथ सिवनी कोतवाली पहुंचा। उसने पुलिस को बताया कि रात में पुलिसकर्मियों ने उसकी क्रेटा रोकी और उसमें रखी रकम निकाल ली। बाद में वह SDOP कार्यालय भी पहुंचा। इसी दौरान घटना की जानकारी पुलिस अधीक्षक सिवनी तक भी पहुंची।
चार्जशीट के मुताबिक पुलिस अधीक्षक को इस घटना की सूचना एक पत्रकार से मिली थी। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा को SDOP कार्यालय भेजा गया।
पूछताछ में पूजा पांडे ने बताया कि 1 करोड़ 45 लाख रुपए कार्यालय की अलमारी में रखे हैं। इसके बाद रकम को बाहर निकलवाया गया, गिनती कराई गई और 29 बंडलों में मौजूद 500-500 रुपये के नोटों को सील किया गया। फिर इसे थाना कोतवाली के मालखाने में जमा कराया गया।
लेकिन जांच में रकम से ज्यादा मोबाइल ने खोले राज
पूजा पांडे मामले की चार्जशीट में मोबाइल कॉल रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बनाया गया है। चार्जशीट के अनुसार 8 अक्टूबर की रात से 9 अक्टूबर की रात तक पूजा पांडे और DSP पंकज मिश्रा के बीच लगातार संपर्क रहा।
एक अवधि के CDR विश्लेषण में दोनों के बीच 81 कॉल होने का उल्लेख है। इनमें 64 WhatsApp और 17 सामान्य कॉल बताए गए हैं। पंकज मिश्रा और आरक्षक प्रमोद सोनी के बीच भी लगातार संपर्क पाया गया।
चार्जशीट में यह भी आरोप है कि कई मैसेज डिलीट कर दिए गए थे। जांच के अनुसार पूजा पांडे के मोबाइल से एक व्यक्ति का नंबर पंकज मिश्रा को भेजा गया और उसके बाद पंकज मिश्रा, प्रमोद सोनी तथा निजी व्यक्ति पंजू गोस्वामी के बीच कॉन्फ्रेंस कॉल हुई। चार्जशीट ने इन संपर्कों को पुलिस की गोपनीय कार्रवाई की जानकारी निजी लोगों तक पहुंचाने के आरोप से जोड़ा है।
वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी छिपाने का आरोप
चार्जशीट में पूजा पांडे और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपों का एक बड़ा हिस्सा इसी बात पर आधारित है कि करोड़ों रुपये की संदिग्ध रकम की सूचना मिलने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों और कंट्रोल रूम को तत्काल जानकारी नहीं दी गई।
आरोप है कि नियमानुसार चेकिंग प्वाइंट नहीं बनाए गए। संबंधित थाना प्रभारी और थाना बल को औपचारिक रूप से नाकाबंदी के लिए नहीं लगाया गया। क्रेटा से रकम मिलने के बाद भी तत्काल वैधानिक जब्ती नहीं की गई।
इसके बाद 1 करोड़ 45 लाख रुपए को थाने के मालखाने में जमा करने के बजाय SDOP कार्यालय में रखा गया। बंडोल थाना प्रभारी अर्पित भैरम की रवानगी और वापसी का उल्लेख रोजनामचे में नहीं होने को भी चार्जशीट में महत्वपूर्ण तथ्य बताया गया है।
पूजा पांडे पर अकेले नहीं, पूरी टीम पर आरोप
इस मामले में पूजा पांडे के साथ DSP पंकज मिश्रा, SI अर्पित भैरम और कई प्रधान आरक्षक व आरक्षक भी आरोपी बनाए गए। चार्जशीट में कुल 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही, पूर्ण निष्ठा से काम नहीं करने और संदिग्ध आचरण जैसे आरोप लगाए गए हैं।
आरोप यह भी है कि अधीनस्थ पुलिसकर्मियों ने कथित संदिग्ध कार्रवाई का विरोध नहीं किया और पूरी कार्रवाई में साथ बने रहे। पंकज मिश्रा और आरक्षक प्रमोद सोनी पर पुलिस की गोपनीय जानकारी गैर-पुलिस व्यक्ति तक पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है। यानी जांच का फोकस केवल 1 करोड़ 45 लाख रुपये पर नहीं था, बल्कि यह भी देखा गया कि पूरी कार्रवाई किस तरह की गई और उसमें कौन-कौन लोग संपर्क में थे।
जेल तक पहुंचा था मामला, फिर सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
पूजा पांडे के खिलाफ कार्रवाई केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रही। हवाला रकम से जुड़े इस मामले में FIR और गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेजा गया था। उन्होंने अग्रिम जमानत की कोशिश की थी, लेकिन तत्काल राहत नहीं मिली।
बाद में तीन साल के बच्चे के साथ जेल में रहने की परिस्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली और इसके बाद जमानत का रास्ता खुला। इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय प्रदेश की पुलिस व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया था। उपलब्ध रिपोर्टों में पूजा पांडे समेत पुलिसकर्मियों के निलंबन और बाद में जेल स्थानांतरण का भी उल्लेख हुआ था।
अब कटनी की नेहा पच्चीसिया पर FIR ने फिर वही सवाल खड़े किए
अब कटनी की तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ FIR ने इस पुराने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। नेहा पच्चीसिया के खिलाफ जमीन सौदे में कथित गड़बड़ी, पद के दुरुपयोग और आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप हैं। कुठला थाना पुलिस ने उनके साथ दो अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शिकायत में 1.07 करोड़ रुपए के जमीन सौदे, 18.20 लाख रुपये की रजिस्ट्री और 15 लाख रुपये के कथित भुगतान की बात सामने आई है। पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, रजिस्ट्री, नामांतरण और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
हत्या के आरोपी से जुड़ी जमीन ने बढ़ाई कहानी की गंभीरता
नेहा पच्चीसिया मामले में जमीन का संबंध एक हत्या के आरोपी रमेश लोधी से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस को आरोप मिला कि हत्या के मामले में कार्रवाई और गिरफ्तारी से जुड़ी परिस्थितियों के बीच जमीन का सौदा कराया गया।
रिपोर्टों में जमीन का सरकारी गाइडलाइन मूल्य करीब 82 लाख रुपए और बाजार मूल्य इससे काफी अधिक होने की बात सामने आई है, जबकि रजिस्ट्री करीब 18.20 लाख रुपए में हुई। इसी अंतर ने जांच को गंभीर बनाया। कटनी पुलिस के मुताबिक इस मामले की जांच के बाद FIR दर्ज की गई और नेहा पच्चीसिया को निलंबित भी किया गया।
दो महिला DSP, दो मामले और जांच के केंद्र में आर्थिक कड़ी
पूजा पांडे और नेहा पच्चीसिया के मामलों को कानूनी तौर पर एक जैसा नहीं माना जा सकता। पूजा पांडे के मामले में पुलिस की चार्जशीट में 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपए की कथित हवाला रकम, उसमें से 1 करोड़ 45 लाख रुपए अलग किए जाने, वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना नहीं देने और पुलिस कार्रवाई के दौरान निजी लोगों से संपर्क जैसे आरोप दर्ज हैं।
दूसरी ओर नेहा पच्चीसिया मामले में जमीन सौदे में 15 लाख रुपये का भुगतान का एक करोड़ से अधिक की जमीन बेच दी गई। रजिस्ट्री की रकम कम करने और पद के कथित दुरुपयोग की जांच हो रही है। नेहा के खिलाफ मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौर में है।
सिवनी की रात से कटनी की जमीन तक, सवाल वर्दी की जवाबदेही का
सिवनी में कहानी एक ऐसी क्रेटा से शुरू हुई जिसके गुप्त बॉक्स में करोड़ों रुपये होने का आरोप था। कटनी में कहानी एक ऐसी जमीन से शुरू हुई जिसकी कीमत और रजिस्ट्री रकम के बीच बड़ा अंतर जांच का आधार बना।
सिवनी में पुलिस की चार्जशीट ने कॉल रिकॉर्ड, पुलिसकर्मियों की गतिविधियों और 1.45 करोड़ रुपये की बरामदगी को अपनी जांच का हिस्सा बनाया।
कटनी में बैंक ट्रांजेक्शन, जमीन की रजिस्ट्री और कथित दबाव की जांच हो रही है। दोनों मामलों में अंतिम दोषसिद्धि अभी अदालत से तय होना बाकी है।
इन दोनों घटनाओं ने एक बड़ा सवाल जरूर सामने ला दिया है-
जब कानून लागू करने वाले अधिकारी ही आर्थिक लेनदेन के आरोपों में घिरें, तो पुलिस तंत्र के भीतर उनकी कार्रवाई की निगरानी कौन और कितनी मजबूती से करता है?
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