रीनीट में बायोमेट्रिक सत्यापन में घिरी विवादास्पद कंपनी, ESB व MPPSC में अभी भी काम जारी

Sanjay Gupta | Jun 24, 2026, 12:24 IST
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री-नीट और MPPSC में विवादास्पद कंपनी ESB को ठेका मिलने से हड़कंप। यह कंपनी डेढ़ साल से बायोमेट्रिक सत्यापन कर रही है। परीक्षा की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल, जांच शुरू।

भर्ती प्रवेश परीक्षाओं की गोपनीयता और सुरक्षा खतरे में है। पूर्व में विवादित कंपनी के पास यह जिम्मा है। हाल ही में Re-NEET के दौरान सामने आया कि बिहार में साल्वर गैंग परीक्षा देने पहुंची। जांच में बायोमेट्रिक सत्यापन करने वाली कंपनी इनोवेटिव व्यू पर उंगली उठी और कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई।



यह कंपनी कई राज्यों में विवाद में

वहीं इनोवेटिव व्यू कंपनी यूपी, तमिलनाडु और झारखंड में पहले विवाद आ चुकी है। हालांकि जानकारों ने बताया कि तमिलनाडु और झारखंड हाईकोर्ट से इसे क्लीन चिट मिली और इसके पक्ष में आदेश हो चुका है।



ईएसबी और पीएससी में कॉन्ट्रैक्ट

कंपनी के पास सबसे बड़ा ठेका ईएसबी का है। यह करीब डेढ़ साल से इसी दागी कंपनी के पास है। ईएसबी की भर्ती परीक्षाओं में हर साल औसतन 25-30 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं।



साल 2023 की सिपाही भर्ती परीक्षा में आधार कार्ड में बदलाव कर साल्वर गैंग को बैठाने का घोटाला हो चुका है। इसके बाद ईएसबी ने नया बायोमेट्रिक सिस्टम को चुना और नए सिरे से टेंडर कर काम दिया था।



वहीं हाल ही में पीएससी ने भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए थ्री लेयर सुरक्षा सिस्टम अपनाया और इसमें टेंडर प्रक्रिया के जरिए इनोवेटिव व्यू को ही कांट्रेक्ट जारी हुआ।



एप्टेक कंपनी पर पहले ही विवाद

ईएसबी द्वारा दागी कंपनी को ठेका देना कोई नई बात नहीं है। कंपनी की ऑनलाइन परीक्षा कराने का जिम्मा एप्टेक के पास है, जो कई राज्यों में विवादों में है और इस पर कई गंभीर आरोप है।



इसके बाद भी ईएसबी ने इसी कंपनी को ठेका दिया है। एप्टेक कंपनी के सर्वर की समस्या के चलते जून में ही जेल प्रहरी की एक पाली की परीक्षा रद्द करना पड़ी थी। वहीं आबकारी आरक्षक व सिपाही भर्ती में सर्वर को हैक कर सेंटर से नकल कर पूरा पेपर साल्व करने का भी मामला आया था।



जिसमें ईएसबी ने अभ्यर्थियों पर केस कराया था। द सूत्र ने एप्टेक को लेकर भी बताया था कि यह कितने राज्यों में विवादों में है।



संसद की कमेटी कर चुकी अनुशंसा

संसद में उच्च शिक्षा की कमेटी जिसमें दिग्विजय सिंह अध्यक्ष है, वह पहले ही अनुशंसा कर चुकी है। विवादित कंपनियों को राष्ट्रीय स्तर पर सूची बनाई जाना चाहिए। यह हर राज्य के पास हो, जो इन कंपनियों को ठेके देने से बचें। लेकिन एक राज्य में ब्लैक लिस्ट कंपनी अन्य राज्य में सांठगांठ कर ठेके ले रही है।



Innovatiview India कंपनी ने यह रखा पक्ष

कंपनी मैनेजमेंट की ओर से द सूत्र को इस संबंध में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि Innovatiview India Limited को देश में कहीं भी विवाद, प्रतिबंधित या बैन नहीं किया गया है।



तमिलनाडु में मद्रास हाई कोर्ट ने कंपनी के खिलाफ जारी प्रतिबंध के आदेश को रद्द कर दिया और भविष्य के टेंडरों में भाग लेने की अनुमति दे दी। झारखंड में, झारखंड हाई कोर्ट ने विवादिंग के आदेश को रद्द किया है। यूपी में कंपनी को विवाद या प्रतिबंधित नहीं किया गया है। इसलिए देश में कहीं भी ऐसा आदेश प्रभावी नहीं है जो कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से रोके।



कंपनी कई अन्य क्षेत्रों में सरकारी संगठनों और परीक्षा अधिकारियों के साथ काम कर रही है। कंपनी का परीक्षा सुरक्षा फ्रेमवर्क मजबूत है। बिहार में री नीट में भी कंपनी की सतर्कता से ही साल्वर गैंग पकड़ाई है।



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