श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मुस्लिम युवक ने अपनाया सनातन धर्म, मिला नया नाम कृष्णा

Sandeep Kumar | Aug 17, 2025, 23:45 IST
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन, खंडवा जिले के महादेवगढ़ मंदिर में मुस्लिम युवक अनीश ने इस्लाम का त्याग किया। उन्होंने सनातन धर्म अपनाया और उनका नामकरण संस्कार हुआ। उनका नया नाम कृष्णा रखा गया।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर खंडवा जिले के महादेवगढ़ मंदिर में एक मुस्लिम युवक ने सनातन धर्म अपनाया। अनीश, अब कृष्णा के नाम से जाने जाएंगे, ने विधिपूर्वक धर्म परिवर्तन किया। इसके बाद उनका नामकरण संस्कार हुआ, जिसमें उन्हें "कृष्णा" नाम दिया गया। मंदिर परिसर में पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। कृष्णा ने श्रीकृष्ण की भक्ति में जीवन समर्पित करने का संकल्प लिया।

कृष्ण भक्ति से प्रभावित हुआ था अनीश

कृष्णा (पूर्व में अनीश) ने बताया कि बचपन से वह भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं और लीलाओं का अनुसरण करते आए हैं। विशेष रूप से भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाएं और गीता के उपदेशों ने उन्हें जीवन के सही मार्ग की पहचान दी। कृष्ण की मित्रता, त्याग, करुणा और जीवन की सच्चाइयों ने उनके मन में कृष्ण भक्ति की गहरी आस्था उत्पन्न की।



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काव्य रचनाओं से मिली प्रेरणा

मंदिर संचालक अशोक पालीवाल ने बताया कि अनीश पहले रसखान और अन्य मुस्लिम कवियों के कृष्ण भक्ति साहित्य से प्रभावित था। उसने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को अपनी जीवन दिशा माना। रसखान और अन्य कवियों ने कृष्ण की लीलाओं और आध्यात्मिक स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया। यह अनीश को कृष्ण भक्ति की ओर आकर्षित करने वाला था।



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3 पॉइंट्स में समझें पूरी खबर

👉खंडवा जिले के महादेवगढ़ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर अनीश नामक मुस्लिम युवक ने सनातन धर्म अपनाया। उनका नाम अब "कृष्णा" रखा गया, और मंदिर परिसर में पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया।
👉कृष्णा (पूर्व में अनीश) ने बताया कि बचपन से ही वे भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं और लीलाओं का अनुसरण करते रहे हैं। विशेष रूप से भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाएं और गीता के उपदेशों ने उन्हें जीवन का सही मार्ग दिखाया।
👉अनीश ने बताया कि वे रसखान और अन्य मुस्लिम कवियों के कृष्ण भक्ति साहित्य से प्रेरित थे। इन कवियों ने कृष्ण की लीलाओं और आध्यात्मिक स्वरूप का सुंदर रूप से वर्णन किया।

अनीश ने किया धर्म परिवर्तन का ऐलान

अनीश ने कहा, “यह कदम मैंने किसी दबाव या प्रलोभन में नहीं उठाया। यह एक सच्ची आस्था और भक्ति से प्रेरित निर्णय था। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं और गीता के उपदेश हमेशा मेरे जीवन का मार्गदर्शन बने हैं। जन्माष्टमी मेरे लिए भगवान कृष्ण के जीवन का प्रतीक पर्व है, और मैंने इसे अपने जीवन के नए आरंभ के रूप में चुना।”



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श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से जीवन का नया अध्याय

अनीश ने कहा कि उनका निर्णय जीवन को अधिक आध्यात्मिक दिशा देने का था। वे श्रीकृष्ण के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को संतुलित और शांतिपूर्ण बनाना चाहते थे। जन्माष्टमी उनके लिए भगवान श्रीकृष्ण के साथ नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है।



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