नारायण साईं को तलाक: इंदौर फैमिली कोर्ट का फैसला, पत्नी को 2 करोड़ रु. एलुमनी देने का आदेश
इंदौर फैमिली कोर्ट ने चर्चित तलाक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्वयंभू धर्मगुरु नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी हरपालानी के विवाह को समाप्त कर दिया है। अदालत ने तलाक की याचिका स्वीकार करते हुए नारायण साईं को पत्नी को 2 करोड़ रुपए स्थायी एलुमनी (भरण-पोषण) देने का आदेश दिया है।
यह मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा था और करीब आठ साल बाद कोर्ट ने इस पर अंतिम फैसला सुनाया। नारायण साईं फिलहाल दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं और गुजरात के सूरत जेल में बंद हैं।
क्या है पूरा मामला
नारायण साईं की पत्नी जानकी हरपालानी ने इंदौर फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया था कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से संबंध खत्म हो चुके हैं। वे कई वर्षों से अलग रह रहे हैं। उन्हें उपेक्षा और परित्याग की स्थिति में रहना पड़ा।कोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार दोनों का विवाह 2008 में हुआ था, लेकिन 2013 से दोनों अलग रह रहे हैं।
पत्नी ने मांगे थे 5 करोड़
तलाक याचिका के साथ ही जानकी हरपालानी ने अदालत से 5 करोड़ रुपए स्थायी गुजारा भत्ता (एलुमनी) की मांग की थी। हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 2 करोड़ रु. एलुमनी देने का आदेश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अदालत ऐसे मामलों में पति की आर्थिक स्थिति, विवाह की अवधि, पत्नी की परिस्थितियां जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर एलुमनी की राशि तय करती है।
50 लाख रुपए भरण-पोषण का बकाया
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पहले कोर्ट ने धारा 125 सीआरपीसी के तहत नारायण साईं को पत्नी को 50 हजार रुपए प्रति माह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। लेकिन यह राशि नियमित रूप से नहीं दी गई, जिसके कारण करीब 50 लाख रुपए का बकाया बन गया है। अब अदालत ने इस बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश हुआ था नारायण साईं
तलाक मामले की सुनवाई के दौरान नारायण साईं को कई बार सूरत जेल से इंदौर फैमिली कोर्ट में पेश किया गया। हर पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया जाता था। सुनवाई के दौरान नारायण साईं का बयान दर्ज किया गया। पत्नी की ओर से जिरह की गई। दोनों पक्षों की अंतिम बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। इसके बाद अदालत ने तलाक की याचिका पर अपना अंतिम फैसला सुनाया।
हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है फैसला
कानूनी सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। मामले में संपत्तियों के सत्यापन और भरण-पोषण भुगतान को लेकर आगे भी कानूनी विवाद की संभावना बनी हुई है।
क्यों चर्चा में है यह फैसला
यह मामला कई कारणों से चर्चा में है:
- आरोपी पहले से ही दुष्कर्म मामले में जेल में है
- लंबे समय से चल रहा वैवाहिक विवाद
- करोड़ों रुपए के एलुमनी का आदेश
- हाई प्रोफाइल धार्मिक परिवार से जुड़ा मामला
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