Narmada Jayanti: शिव के पसीने की एक बूंद से कैसे हुआ इस मोक्षदायिनी नदी का जन्म

Kaushiki | Jan 25, 2026, 08:22 IST
मध्यप्रदेश की पावन धरती पर नर्मदा नदी केवल एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों भक्तों की जीवनदायिनी शक्ति है। शिवपुत्री मां नर्मदा की महिमा का वर्णन पुराणों में भी मिलता है। इनके दर्शन मात्र से जीवन के समस्त कष्ट और पाप मिट जाते हैं।
1 8 मां नर्मदा की महिमा
Mother Narmada

25 जनवरी को नर्मदा जयंती का पावन पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। शास्त्रों में मां नर्मदा का प्राकट्य उत्सव भक्तों के लिए सुख और सौभाग्य लेकर आता है। आइए नर्मदा जयंती पर नर्मदा नदी के बारे में जानें....

2 8 शिव के पसीने से उत्पत्ति
Mother Narmada

पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब भगवान शिव मैकल पर्वत पर तपस्या में लीन थे। तब उनके पसीने की बूंद से दिव्य कन्या नर्मदा का जन्म हुआ था। शिवजी ने उन्हें वरदान दिया कि जो कोई भी श्रद्धा से उनका दर्शन करेगा उसका तुरंत ही कल्याण हो जाएगा।

3 8 दर्शन मात्र से पाप मुक्ति
Mother Narmada

जहां गंगा नदी में डुबकी लगाने से पाप धुलते हैं। वहीं शास्त्रों में कहा गया है कि नर्मदा के लिए उनके केवल दर्शन ही पापनाशिनी शक्ति रखते हैं। भोलेनाथ ने नर्मदा जी की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें ये विशेष वरदान दिया था कि उनका जल सदैव पवित्र रहेगा।

4 8 कण-कण में शंकर का वास
Mother Narmada

मान्यता है कि नर्मदा नदी के तल से निकलने वाला हर पत्थर स्वयं सिद्ध नर्मदेश्वर शिवलिंग होता है। इसकी स्थापना बिना प्राण-प्रतिष्ठा के भी की जा सकती है। भगवान शिव के वरदान के कारण ही कहा जाता है कि नर्मदा का हर कंकर, शंकर होता है।

5 8 ओंकारेश्वर का पावन संगम
Mother Narmada

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास नर्मदा का स्वरूप अत्यंत मनोहारी है। यहां नर्मदा नदी ॐ का आकार बनाती है। ये इस स्थान को आध्यात्मिक रूप से पूरे विश्व में सबसे अनूठा और शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र बनाता है।

6 8 एकमात्र परिक्रमा वाली नदी
Mother Narmada

संसार की सभी नदियों में केवल नर्मदा ही ऐसी नदी हैं जिनकी संपूर्ण परिक्रमा की जाती है। इसे नर्मदा परिक्रमा कहते हैं। भक्त आत्म-ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अमरकंटक से गुजरात तक की कठिन पदयात्रा पूरी कर मांं का आशीर्वाद लेते हैं।

7 8 उल्टा बहने की अनोखी दिशा
Mother Narmada

ज्योग्राफिकली और धार्मिक दृष्टि से नर्मदा जी की एक विशेषता ये भी है कि वे अन्य नदियों के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं। ये उनके अडिग और स्वतंत्र स्वभाव का प्रतीक माना जाता है।

8 8 देवताओं का स्थायी निवास
Mother Narmada

भगवान शिव ने नर्मदा जी को आशीष दिया था कि उनके तटों पर सभी तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का सदैव वास रहेगा। इसलिए नर्मदा तट पर किया गया दान, तप और पूजन अक्षय फलदायी होता है।