MP के इन तीन जिलों में नक्सलियों का नया ठिकाना, रिपोर्ट में खुला राज

Raj Singh | Nov 16, 2024, 08:21 IST
Naxalite in mp
छत्तीसगढ़ से नक्सलियों के सफाए के लिए सरकार लगातार एक्शन मोड में नजर आ रही है। अब इसी के मद्देनजर नक्सली सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पड़ोसी राज्य एमपी की ओर रुख कर रहे हैं। अब इसको लेकर खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है।

छत्तीसगढ़ से नक्सलियों को जड़ से उखाड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इस अभियान की वजह से माओवादियों की कमर टूटती नजर आ रही है। नक्सलियों पर हमले की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कार्रवाई की वजह से नक्सली अब मध्य प्रदेश को अपना ठिकाना बना रहे हैं, जिसका खुलासा इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में हुआ है। अब इसे ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है।



इन तीन जिलों में नक्सली

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बचने के लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश

दरअसल, 4 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में 31 नक्सली मारे गए थे। इसके चलते छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। आपको बता दें कि जब भी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ होती है तो वे अपने सुरक्षित ठिकाने की तलाश करते हैं ताकि वे सरकार की कार्रवाई से बच सकें।



डिंडोरी जिले को क्यों चुनते हैं नक्सली?

नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक एमपी के बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिले को नक्सली अपने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस संबंध में बालाघाट जोन के आईजी संजय कुमार का कहना है कि नक्सलियों ने साल 2015-16 में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (एमएमसी) एरिया इसलिए बनाया था क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा से लेकर मनेंद्रगढ़ और कोरिया जिले तक फैला हुआ है। संजय कुमार की मानें तो महाराष्ट्र का गोंदिया, छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव और एमपी का बालाघाट (जीआरबी) नक्सलियों के एमसीसी एरिया का हिस्सा है, जिसके चलते नक्सली इसे चुनते हैं।



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केंद्र से मांग

इसके अलावा नक्सलियों ने मंडला के कान्हा टाइगर रिजर्व और छत्तीसगढ़ के भोरमदेव अभ्यारण्य को विकसित कर लिया है, जिसे केबी कहते हैं। गौरतलब है कि यह इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी की रिपोर्ट का हिस्सा है, जो पिछले दिनों केंद्र सरकार को दी गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर एमपी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हाल ही में हुई बैठक में सीआरपीएफ की दो बटालियन की मांग की है।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश के किन इलाकों में नक्सली गतिविधियां बढ़ रही हैं?
    इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, बालाघाट, मंडला, और डिंडोरी जिलों में नक्सली दलम-2 नामक नया कैडर तैयार कर रहे हैं। ये जिले पहले से ही नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील माने जाते हैं।
  2. नक्सलियों ने मध्य प्रदेश को सुरक्षित ठिकाने के रूप में क्यों चुना है?
    नक्सलियों ने मध्य प्रदेश के घने जंगलों और कान्हा-भोरमदेव जैसे संरक्षित क्षेत्रों को सेफ जोन के रूप में चुना है। यह इलाका छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, और मध्य प्रदेश के त्रि-जंक्शन पर स्थित है, जिससे यहां पहुंचना और छिपना आसान हो जाता है।
  3. मध्य प्रदेश सरकार नक्सल समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
    मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से सीआरपीएफ की दो बटालियन की मांग की है। इसके अलावा, नक्सल प्रभावित इलाकों में 220 नई सड़कों के निर्माण की योजना बनाई गई है ताकि सुरक्षा बलों को आसानी से मूवमेंट और ऑपरेशन में मदद मिले।
  4. नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियानों का अब तक का प्रभाव क्या रहा है?
    छत्तीसगढ़ में हालिया मुठभेड़ों में 31 नक्सलियों के मारे जाने से उनकी गतिविधियां कमजोर पड़ी हैं। इसके चलते नक्सली छत्तीसगढ़ से बाहर निकलकर मध्य प्रदेश जैसे सुरक्षित इलाकों में ठिकाने बना रहे हैं। यह बदलाव सुरक्षा बलों के अभियानों की सफलता को दर्शाता है।

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