एमपी में मौजूद है नीम करोली बाबा की दुर्लभ निशानी, जानें 53 साल पुराने कलश का रहस्य
हनुमान जी के भक्त नीम करोली बाबा के भक्तों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। बाबा का अस्थि कलश पिछले 53 सालों से मध्यप्रदेश के भोपाल में सुरक्षित है। ये कलश उनके बड़े बेटे अनेग सिंह के परिवार के पास है।
बाबा ने 1973 में वृंदावन में अपना शरीर त्यागा था। उनकी अस्थियां देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित हुई थीं। लेकिन एक हिस्सा उनके बेटे अपने साथ भोपाल ले आए थे।
बाबा का भोपाल से गहरा नाता
आपको बता दें कि, बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कई बातें बताईं। उन्होंने बताया कि बाबा का मध्यप्रदेश के भोपाल शहर से बहुत गहरा और विशेष लगाव था।
साल 1970 में बाबा अरेरा कॉलोनी स्थित उनके घर पर 10 दिन ठहरे थे। उस प्रवास के दौरान उन्होंने शहर के विभिन्न इलाकों का पैदल भ्रमण भी किया था। वे नेवरी मंदिर में रात रुके थे।
बाबा ने परिवार को हनुमान जी की एक विशेष प्रतिमा भी भेंट की थी। परिवार आज भी इस कलश की पूरी श्रद्धा से पूजा करता है। अब भोपाल में बाबा का एक भव्य मंदिर बनाया जाएगा। इस पवित्र कलश को उसी मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
भविष्य की योजनाएं
बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा का परिवार बाबा को साक्षात हनुमान जी का रूप मानता है। इसीलिए ये अस्थि कलश उनके लिए गहरी आस्था और आध्यात्मिक महत्व रखता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा दूसरा कलश पूरे देश में कहीं मौजूद नहीं है।
अब परिवार भोपाल में बाबा का एक भव्य मंदिर और आश्रम बनाना चाहता है। इस अस्थि कलश को उस मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाएगा। इससे भोपाल के भक्तों को बाबा के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा।
कौन हैं नीम करोली बाबा और क्यों हैं वे इतने प्रसिद्ध
नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) 20वीं सदी के महान और पूजनीय संतों में से एक मानें जाते थे। उन्हें उनके भक्त प्यार से महाराज जी कहकर पुकारते हैं।
बाबा को भगवान हनुमान का साक्षात स्वरूप या अवतार माना जाता है। उनका मुख्य आश्रम उत्तराखंड के कैंची धाम में स्थित है। बाबा नीम करोली की प्रसिद्धि केवल भारत तक ही सीमित नहीं है।
उनकी आध्यात्मिक शक्ति ने पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित किया है। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग उनके अनुयायी रहे हैं। कहा जाता है कि संकट के समय बाबा के आशीर्वाद से ही उनके व्यवसाय सफल हुए।
बाबा का जीवन सादगी और निस्वार्थ प्रेम का एक अद्भुत उदाहरण था। उन्होंने कभी भी खुद को भगवान नहीं कहा, बल्कि हनुमान जी की सेवा की। उनके चमत्कार आज भी उनके भक्तों को सुरक्षा और शांति प्रदान करते हैं। उनकी शिक्षाएं सबकी सेवा करो और भगवान को याद करो पर आधारित हैं।
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