जाति प्रमाण पत्र विवाद: TNCP ज्वाइंट डायरेक्टर नीरज लिखार को राहत, लेकिन संकट बरकरार
News In Short
- नीरज आनंद लिखार को हाईकोर्ट से अस्थायी राहत मिली है।
- जाति प्रमाण पत्र जांच का आदेश फिलहाल रद्द हो गया है।
- यह मामला फिर सिंगल बेंच में भेजा गया है।
- 25 मार्च को अगली सुनवाई तय हुई है।
- कानूनी जानकारों ने बताया, संकट अभी टला नहीं है।
News In Detail
TNCP के ज्वाइंट डायरेक्टर और भोपाल के चीफ सिटी प्लानर नीरज लिखार को फिलहाल बड़ी राहत मिली है, लेकिन उनका जाति प्रमाण पत्र विवाद अभी भी खत्म नहीं हुआ है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने तकनीकी आधार पर उनके खिलाफ दिया गया पिछला आदेश रद्द कर दिया है। इससे जांच की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है।
प्रक्रिया की गलती का मिला फायदा
दरअसल, पिछले आदेश में लिखार को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला था। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच में चुनौती दी और उन्हें राहत मिल गई।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने खुद टिप्पणी करते हुए यह माना कि सिंगल बेंच के आदेश में उन्हें कोई गलती नजर नहीं आई थी। लेकिन प्रतिवादी का पक्ष न सुना जाना नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है। इसलिए यह राहत केवल प्रक्रिया की त्रुटि के कारण मिली है, न कि मामले के तथ्यों में किसी बदलाव के कारण।
फिर से शुरू होगी सुनवाई
अब यह मामला दोबारा सिंगल बेंच में सुना जाएगा। यहां नीरज लिखार को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। जबलपुर हाईकोर्टने 25 मार्च 2026 को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। इससे साफ है कि मामला अभी लंबा चल सकता है।
भाई का मामला बना सबसे बड़ा आधार
इस पूरे विवाद में सबसे अहम तथ्य यह है कि नीरज लिखार के सगे भाई का जाति प्रमाण पत्र पहले ही रद्द किया जा चुका है। यही वजह है कि अब जांच की मांग और भी मजबूत हो गई है। साथ ही, यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
कानूनी जानकारों का क्या कहना है?
कानूनी जानकारों के अनुसार, लिखार को मिली राहत ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है। उनका कहना है कि जांच से बचना आसान नहीं होगा, क्योंकि परिवार से जुड़े तथ्यों और पहले के फैसलों का असर इस केस पर पड़ना तय है। ऐसे में आने वाले आदेश में स्थिति फिर उनके खिलाफ जा सकती है।
क्या था पूरा मामला
यह पूरा विवाद नीरज लिखार के जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा है। इसके आधार पर उन्होंने अनुसूचित जनजाति कोटे से नौकरी और पदोन्नति प्राप्त की। याचिका में दावा किया गया कि उनके सगे भाई का प्रमाण पत्र पहले ही निरस्त हो चुका है और दोनों सगे भाई है दोनों की पृष्ठभूमि एक जैसी है।
इसी आधार पर उनके प्रमाण पत्र की जांच के आदेश दिए गए थे, जो अब तकनीकी कारणों से रद्द हुए हैं, लेकिन मामला अभी भी विचाराधीन है। सिंगल बेंच इस मामले में प्रतिवादियों के पक्ष को सुनने के बाद अब क्या फैसला देती है। इसके बाद जाति प्रमाण पत्र की जांच में कमेटी का निर्णय लेती है इस पर निखार की कुर्सी का फैसला टिका हुआ है।
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