मुख्यमंत्री कार्यालय में ताकतवर हुए IAS नीरज मंडलोई, नए कार्य विभाजन में देखें कौन-क्या करेगा?

Sourabh Bhatnagar | Jul 29, 2025, 15:16 IST
New Work Division in CM Office IAS Neeraj Mandloi Takes Charge as Key Coordinator
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यालय में कामों का बंटवारा किया गया है। अब सीएमओ में IAS नीरज मंडलोई शक्तिशाली भूमिका में नजर आने वाले हैं। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं....चलिए बताते हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय यानी सीएमओ में नया कार्य विभाजन जारी किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ज्यादा ताकतवर बनकर उभरे हैं। अब वे हर बड़े काम के लिए CMO में सिंगल विंडो अफसर की हैसियत में रहेंगे।



दरअसल सीएमओ में अधिकारी वर्गों को अलग-अलग विभाग समूह जैसे A, B, C, D—में बांटते हुए, उनकी स्पष्ट भूमिकाएं तय कर दी गई हैं। आइए, विस्तार से समझते हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय की नई व्यवस्था कैसी दिखती है और प्रशासनिक कार्यों पर इसका क्या असर पड़ेगा।




मुख्यमंत्री कार्यालय: नोडल पॉइंट और प्रमुख रोल

मुख्य समन्वयन: समूह A

विधायकों-सांसदों के मसलों का समाधान: समूह B

आईएएस आलोक कुमार सिंह, सचिव—मुख्यमंत्री, की जिम्मेदारी गृह विभाग छोड़कर अन्य सभी विभागों के स्थानांतरण प्रस्ताव, ग्रामीण-शहरी क्षेत्र के सांसदों और विधायकों से जुड़े मुद्दों, सरकारी/गैर-सरकारी नामांकनों, नियुक्तियों और कार्यालयीन व्यवस्था की है।



नई दिल्ली और भारत सरकार संबंधी समन्वय: समूह C

IAS अधिकारी इलैया राजा टी. .., सचिव, मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार से संबंधित सभी पत्राचार, कार्यक्रम, बैठकें और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का संग्रह और प्रचार-प्रसार संभालना होगा। साथ ही, IT और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की पूरी देखरेख भी इन्हीं के जिम्मे है।



मुख्यमंत्री के भ्रमण, फाइल्स और सहायता कोष: समूह D

चन्द्रशेखर वालिम्बे अपर सचिव, मुख्यमंत्री के जिम्मे मुख्यमंत्री के राज्यभर के भ्रमण, CM सहायता कोष, जनसामान्य से प्राप्त आवेदन, तथा दौरे के दौरान मिली समस्याओं का निराकरण रहेगा।



CMO में नए विभाजन की मुख्य बातें

  • समूचे कार्यालय में ई-ऑफिस और फिजिकल नस्तियों की मॉनिटरिंग।
  • उज्जैन सिंहस्थ 2028 की जमीनी तैयारी—स्पेशल को-ऑर्डिनेशन।
  • मुख्यमंत्री परिषद, CM डैशबोर्ड, प्रगति पोर्टल, मेगा प्रोजेक्ट्स की निगरानी।
  • राज्य निवेश, उद्योग प्रोत्साहन, जनहित केसों का तेज निराकरण।
  • सांसद-विधायक रेफ़रेंस/मुद्दों की ट्रैकिंग, बैठकें और घोषणाएं।

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क्यों अहम है सीएमओ में नया कार्य विभाजन?

सरकार के मुताबिक, अलग-अलग अधिकारियों को विभागवार जिम्मेदारी सौंपने का मकसद—शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही, और गति बढ़ाना है। इससे प्रदेश के छोटे-बड़े मसलों का निपटारा त्वरित होगा।



नए कार्य विभाजन में टेक्नोलॉजी (IT) और फील्ड वर्कर्स तक की निगरानी तक भी अलग से प्रभारी अधिकारी हैं, जिससे योजनाओं या घोषणाओं की जमीनी हकीकत लगातार अधिकारियों की नजर में रहेगी।



निष्कर्ष:

अभी जिन आदेशों और कार्य विभाजन को लागू किया गया है, उसकी व्यवस्था यदि सही तरीके से कंट्रोलरूम शैली में फॉलो हुई, तो प्रशासनिक फैसले कसौटी पर जरूर उतरेंगे। मगर कागजों से बाहर आकर उनका क्रियान्वयन ही इस ‘नवाचार’ की असली परीक्षा होगी। हर भोपाली और मध्यप्रदेशवासी को चाहिए कि वो इस नई व्यवस्थागत पारदर्शिता का लाभ उठाए और प्रशासन को जवाबदेह बनाए।



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(सीएमओ में नया कार्य विभाजन का आदेश डाउनलोड करें)



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