टेक्साइल प्रोजेक्ट और सासन पावर पर NGT सख्त, सिंगरौली और नीमच कलेक्टर को नोटिस
मध्य प्रदेश के पर्यावरण से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। एक ओर नीमच जिले के मोरवन बांध के पास प्रस्तावित टेक्सटाइल उद्योग पर पर्यावरणीय खतरे की आशंका को गंभीरता से लेते हुए एनजीटी ने जांच समिति गठित कर छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
वहीं दूसरी ओर सिंगरौली स्थित सासन पावर लिमिटेड पर अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग और प्रदूषण फैलाने के आरोपों की जांच के भी आदेश दिए हैं।
दोनों मामलों को राज्य में पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा माना जा रहा है। एनजीटी ने नीमच और सिंगरौली कलेक्टर को नोटिस जारी किया है।
मोरवन के पास प्रस्तावित टेक्सटाइल प्रोजेक्ट :
एनजीटी की सेंट्रल ब्रांच ने 3 जुलाई को नीमच जिले के मोरवन गांव से जुड़े मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता अंबालाल बंजारा ने आरोप लगाया है कि मोरवन बांध के किनारे करीब 150 बीघा भूमि पर प्रस्तावित टेक्सटाइल परियोजना से क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
याचिका में कहा गया है कि वस्त्र उद्योग अत्यधिक पानी की खपत करने वाला और रासायनिक प्रदूषण फैलाने वाला उद्योग है। यदि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्टों का कोई ठोस उपाय नहीं किया गया तो उनका असर सीधे मोरवन बांध, भूजल और आसपास की कृषि भूमि पर पड़ेगा।
मोरवन डेम नीमच की लाइफ लाइन :
मोरवन बांध नीमच जिले के जावद नगर परिषद, सरवानिया महाराज नगर परिषद और आसपास के कई गांवों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा लगभग 15 गांवों की सिंचाई भी इसी बांध पर निर्भर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल स्रोत प्रदूषित हुआ तो इसका असर हजारों लोगों की पेयजल व्यवस्था, खेती, पशुपालन और पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ेगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मध्यप्रदेश सरकार के वन विभाग के प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (MPSEIAA), नीमच कलेक्टर और संबंधित कंपनी सुविधा रेयॉन्स को नोटिस जारी किए हैं।
साथ ही नीमच कलेक्टर और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर स्थल निरीक्षण करने और छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सिंगरौली का सासन पॉवर प्रोजेक्ट :
एनजीटी ने सिंगरौली जिले में संचालित सासन पावर लिमिटेड के खिलाफ पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की शिकायत पर भी सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी लंबे समय से अवैध रूप से फ्लाई ऐश की डंपिंग कर रही है और जहरीले कणों और रासायनिक अपशिष्टों के कारण आसपास का पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि फ्लाई ऐश और औद्योगिक प्रदूषण के कारण कृषि भूमि की उत्पादकता कम हुई है, फसलें खराब हो रही हैं और स्थानीय जल स्रोत दूषित हो रहे हैं।
इसके अलावा पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। भूजल में भारी धातुओं के रिसाव की भी आशंका जताई गई है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
एनजीटी ने दिया नोटिस :
इस मामले में एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), मध्यप्रदेश सरकार, सिंगरौली जिला प्रशासन, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सासन पावर लिमिटेड को नोटिस जारी करते हुए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
समिति पूरे मामले की जांच कर यह बताएगी कि पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन हुआ है या नहीं तथा यदि हुआ है तो उसके लिए क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
निष्कर्ष :
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक विकास के बीच जल स्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।
ऐसे में मोरवन टेक्सटाइल परियोजना और सिंगरौली के फ्लाई ऐश मामले पर एनजीटी की सख्ती आने वाले समय में प्रदेश की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकती है।
अब सभी की नजर संयुक्त समितियों की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर एनजीटी आगे की कार्रवाई तय करेगा।
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