नर्सिंग फर्जीवाड़ा: 245 कॉलेजों को कोर्ट से राहत, 9 हजार छात्रों की परीक्षा पर लगी मुहर
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल को लंबित परीक्षाएं कराने की अनुमति दी।
- 2022-23 के GNM प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा सकेंगे।
- 2021-22 सत्र के करीब 9 हजार छात्रों की GNM तृतीय वर्ष परीक्षा होगी।
- 89 कमियां दूर करने वाले कॉलेजों को राहत मिली।
- अन्य कॉलेजों से संबंधित परीक्षा प्रक्रिया पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में शुक्रवार को जबलपुर हाईकोर्ट से हजारों छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच शामिल रही। कोर्ट ने योग्य नर्सिंग कॉलेजों के लिए परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी। ये कॉलेज सीबीआई जांच में उपयुक्त पाए गए हैं।
नर्सिंग काउंसिल ने मांगी थी अनुमति
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने अनुरोध किया। लंबित परीक्षाएं आयोजित करने की अनुमति मांगी गई। रुके हुए परीक्षा परिणाम घोषित करने की भी मांग हुई। याचिकाकर्ता पक्ष ने कुछ कॉलेजों पर आपत्ति जताई। ये कॉलेज सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाए गए हैं। उनकी मान्यता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
9 हजार छात्रों को मिलेगा सीधा फायदा
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया। शैक्षणिक सत्र 2022-23 के GNM प्रथम वर्ष के परिणाम घोषित होंगे। शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए GNM तृतीय वर्ष की परीक्षा होगी। लगभग नौ हजार छात्रों को परीक्षा देने का मौका मिलेगा। लंबे समय से इंतजार कर रहे छात्रों को राहत मिलेगी।
किन कॉलेजों को मिली राहत
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन्हीं कॉलेजों को मिलेगी जो सीबीआई जांच में उपयुक्त पाए गए हैं। कुल 695 नर्सिंग कॉलेजों में से 156 कॉलेजों को सीबीआई ने सीधे तौर पर सूटेबल माना था। इसके अलावा 89 ऐसे कॉलेज भी हैं जिन्होंने अपनी कमियां दूर कर आवश्यक मानकों को पूरा किया और बाद में सूटेबल का दर्जा हासिल किया। इन सभी 245 कॉलेजों के छात्रों के लिए परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
बाकी कॉलेजों पर रोक बरकरार
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुछ कॉलेजों पर रोक जारी रहेगी। ये वे कॉलेज हैं जिनकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। जो कॉलेज मानकों को पूरा नहीं कर सके हैं वे शामिल हैं। इनसे संबंधित परीक्षाएं फिलहाल आयोजित नहीं होंगी। नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर समझौता नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान कौन रहा मौजूद
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष उपस्थित रहा। एडवोकेट आलोक वागरेचा ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता विशाल बघेल भी स्वयं मौजूद रहे। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा। यह फैसला नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में अहम माना जा रहा है। इससे योग्य छात्रों को राहत मिली है। विवादित संस्थानों पर निगरानी और सख्ती जारी रहेगी।
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