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मध्यप्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में भर्ती को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। आज (7 जनवरी) हाईकोर्ट (MP High Court ) में हुई सुनवाई के बाद पुरुष उम्मीदवारों की याचिका पर फैसला हो गया।
इसके बाद तुरंत ही मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) ने संशोधित विज्ञापन जारी कर दिया। पहले 286 पदों को पूरी तरह से महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन अब इस शर्त को हटा दिया गया है।
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13 जनवरी तक कर सकेंगे आवेदन
संशोधित विज्ञापन के अनुसार अब पात्र पुरुष उम्मीदवार भी इन पदों के लिए आवेदन ( एमपी नर्सिंग कॉलेज) कर सकेंगे। ईएसबी ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 13 जनवरी निर्धारित की है, जिससे पहले वंचित रह गए पुरुष अभ्यर्थियों को राहत मिली है। इस फैसले को नर्सिंग शिक्षा क्षेत्र में समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
16 दिसंबर के विज्ञापन से शुरू हुआ था विवाद
गौरतलब है कि 16 दिसंबर को जारी भर्ती विज्ञापन में प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों (नर्सिंग कॉलेज एडमिशन) में कुल 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती का प्रावधान किया गया था। इनमें 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के पद शामिल थे। लेकिन सभी पद केवल महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए जाने से अनेक पात्र पुरुष उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
याचिका में उठाए गए संवैधानिक सवाल
याचिकाकर्ता नौशाद अली एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पक्ष रखा। कोर्ट में उन्होंने तर्क दिया गया कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष उपबंध) नियम, 1997 के तहत महिलाओं को अधिकतम 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है। इसके बावजूद 100 प्रतिशत महिला आरक्षण देकर संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन किया गया। इसके अलावा यह भी कहा गया कि विभागीय भर्ती नियम और इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मापदंड लिंग के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते।
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इंद्रा साहनी फैसले का भी दिया गया हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी केस का हवाला देते हुए कहा गया कि सामान्य परिस्थितियों में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। ऐसे में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत प्रत्यक्ष भेदभाव की श्रेणी में आता है।
समान अवसर मिलने से पुरुष अभ्यर्थियों में खुशी
संशोधित विज्ञापन जारी होने के बाद पुरुष उम्मीदवारों में संतोष और उत्साह का माहौल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह फैसला केवल नर्सिंग भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में सरकारी भर्तियों में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।
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