नहीं बढ़ेगा ओला-उबर और रैपिडो का किराया, हड़ताल खत्म, आम लोगों को राहत
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपालमें ओला, उबर और रैपिडो के खिलाफ हड़तालखत्म हो गई।
- टैक्सी चालक निजी वाहनों के संचालन काविरोध कर रहे थे।
- परिवहन मंत्री से बैठकमें चालकोंकी मांगें मान ली गईं।
- ग्राहकों काकिराया नहीं बढ़ेगा, सिर्फ ड्राइवर काहिस्सा बढ़ेगा।
- 24 घंटे में गैर पंजीकृत वाहन हटाने कीकार्रवाई शुरू होगी।
हड़ताल क्यों हुई शुरू
भोपाल में एप बेस्ड टैक्सी सेवाओं के खिलाफ चालकों ने दो दिन हड़ताल कीथी। टैक्सी चालकों को शिकायत थी कि ओला, उबर और रैपिडो में निजी यानी नॉन कमर्शियल वाहन भी चल रहे हैं। इनमें दो पहिया और चार पहिया दोनों तरह के वाहन शामिल थे।
टैक्सी यूनियन कल्याण समिति, संपूर्ण भारत और भोपाल टैक्सी चालक संघ ने मिलकर मोर्चा बनाया था। इन संगठनों का कहना था कि बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन वाले वाहन उनके कारोबार को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यूनियन लंबे समय से इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग कर रहा था। आखिरकार बुधवार, 19 अगस्त को परिवहन मंत्री के साथ बैठक हुई और हड़ताल खत्म हो गई।
क्या हुआ समझौता
बैठक में चालकों की प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई। तय हुआ कि भोपाल में चल रहे निजी वाहनों को हटाया जाएगा। यह कार्रवाई अगले 24 घंटे के अंदर शुरू होगी। यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील सिंह चौहान ने बताया कि भोपाल में करीब 700 दो पहिया वाहन एप टैक्सी के तौर पर चल रहे हैं।
इसके अलावा 60 से 70 चार पहिया वाहन भी नॉन कमर्शियल रजिस्ट्रेशन पर चल रहे थे। विभाग के अफसरों ने भी साफ कर दिया कि नियम तोड़ने पर सख्ती होगी। अफसरों का कहना है कि अगर कोई कंपनी बिना टैक्सी कोटे वाले वाहनों से सवारी उठवाती है, तो कार्रवाई की जाएगी।
ड्राइवरों को कितना फायदा
बैठक में ड्राइवरों के हिस्से में तुरंत 15% बढ़ोतरी करने पर भी सहमति बनी। खास बात यह है कि इससे ग्राहक के किराए में कोई बदलाव नहीं होगा। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि कोई ग्राहक किसी राइड के लिए कंपनी को 100 रुपए देता है, तो अभी ड्राइवर को इसमें से करीब 45 से 50 रुपए मिलते हैं।
अब इस हिस्से में 15% बढ़ोतरी होगी। यानी 45 रुपए पर ड्राइवर को 6.75 रुपए ज्यादा मिलेंगे। वहीं 50 रुपए पर यह बढ़ोतरी 7.50 रुपए तक होगी। इस तरह ड्राइवर का हिस्सा बढ़कर 51.75 से 57.50 रुपए तक हो जाएगा। यूनियन का कहना है कि इससे ईंधन और वाहन रखरखाव के खर्च के बाद भी ड्राइवरों की असली कमाई बढ़ेगी। यह फैसला कमीशन को लेकर चालकों की पुरानी मांग से भी जुड़ा हुआ है।
यात्रियों की परेशानी
हड़ताल की वजह से दो दिन तक भोपाल में एप बेस्ड कैब मिलना मुश्किल हो गया था। रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर यात्रियों को कैब नहीं मिल रही थी। कई लोगों को मजबूरी में दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। इसी दौरान ऑटो चालकों की मनमानी की शिकायतें भी सामने आईं। कुछ यात्रियों ने बताया कि सामान्य से ज्यादा किराया मांगा गया। हड़ताल खत्म होने के बाद अब कैब सेवा सामान्य होने की उम्मीद है। यात्रियों को अब राहत मिलने की संभावना है।
आगे क्या होगा
बैठक में एक और अहम फैसला लिया गया है। तय हुआ कि दूसरे राज्यों में लागू किराए का आंकलन किया जाएगा। इसके आधार पर मध्यप्रदेश में नई रेट लिस्ट बनाई जाएगी। यह फैसला आने वाले समय में किराए और कमीशन दोनों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल ड्राइवरों के हिस्से में बढ़ोतरी तुरंत प्रभाव से लागू मानी जा रही है। वहीं ग्राहकों के लिए किराया अभी जस का तस बना रहेगा। सरकार और यूनियन दोनों की नजर अब कंपनियों के अगले कदम पर रहेगी।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर सीधे आम यात्रियों और टैक्सी चालकों दोनों की रोजी रोटी से जुड़ी है। संविधान के तहत रोजगार और उचित मेहनताना पाने का अधिकार सबको मिला है। बिना पंजीकरण वाले वाहनों का चलना नियमों और यात्री सुरक्षा दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
ऐसे में सरकार की कार्रवाई पारदर्शी और जिम्मेदार व्यवस्था की दिशा में जरूरी कदम है। ड्राइवरों की कमाई बढ़ने से उनका जीवन स्तर बेहतर हो सकता है। साथ ही ग्राहकों के लिए किराया स्थिर रहना भी राहत की बात है। यह खबर दिखाती है कि बातचीत और समझौते से भी हड़ताल जैसी समस्या सुलझाई जा सकती है।
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