108 फीट की आदि गुरु शंकराचार्य प्रतिमा में गड़बड़ी का दावा, CBI-लोकायुक्त तक पहुंचा मामला

Sourabh Bhatnagar | Jul 09, 2026, 14:15 IST
Omkareshwar shankaracharya statue pillar defect
ओंकारेश्वर में शंकराचार्य प्रतिमा के मुख्य पिलर में गंभीर खामी मिली है। जांच में पिलर पर तय सीमा से 24% ज्यादा दबाव पाया गया। मामला सीबीआई, मुख्य सचिव और लोकायुक्त तक पहुंच चुका है। खामी बताने वाले दो अधिकारियों को पद से हटा दिया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • ओंकारेश्वर में शंकराचार्य की 108 फीट प्रतिमा के पिलर में खामी मिली।
  • जांच रिपोर्ट में पिलर पर तय सीमा से 24% ज्यादा दबाव पाया गया।
  • यह शिकायत सीबीआई, मुख्य सचिव और लोकायुक्त तक पहुंच चुकी है।
  • खामी बताने वाले फील्ड डायरेक्टर और प्रोजेक्ट डायरेक्टर को पद से हटाया गया।
  • लोकायुक्त ने दस्तावेज मांगे हैं, लेकिन सुनवाई अब तक नहीं हुई है।

    ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी किनारे बनी आदि गुरु शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा फिर सुर्खियों में है। इस प्रतिमा को स्टैच्यू ऑफ वननेस यानी एकात्मधाम कहा जाता है। अब इसके मुख्य पिलर में गंभीर तकनीकी खामी सामने आई है।



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    पिलर में क्यों आई खामी

    यह प्रोजेक्ट (ओंकारेश्वर दर्शन) मध्य प्रदेश सरकार की बड़ी पर्यटन योजना का हिस्सा है। इसका मकसद ओंकारेश्वर को आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र बनाना है। प्रतिमा बनाने में कई साल का समय लगा है। हाल के महीनों में इस प्रोजेक्ट को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं।



    प्रतिमा 108 फीट ऊंची है और पूरी तरह एक मुख्य पिलर पर टिकी है। जांच में पता चला कि यह पिलर तय मानकों से उतना मजबूत नहीं है। इसमें हल्का झुकाव भी देखा गया है। यह प्रतिमा 140 से 170 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवा झेलने के लिए बनाई गई थी। लेकिन तकनीकी जांच बताती है कि यह 120 किलोमीटर की रफ्तार भी नहीं झेल सकती।



    ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य प्रतिमा कायह पूरा मामला 12 मई को दर्ज शिकायत से सामने आया है। शिकायत सीबीआई (CBI), मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और लोकायुक्त को भेजी गई। शिकायत प्रोजेक्ट के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने की थी।



    उन्होंने बताया कि 2300 करोड़ रुपए की इस परियोजना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई है। प्रतिमा की लागत करीब 200 करोड़ रुपए बताई गई है और यह चीन में बनी है।



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    सॉफ्टवेयर जांच में खुलासा

    पिलर की मजबूती जांचने के लिए इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस सॉफ्टवेयर ईटीएबीएस (Extended Three-Dimensional Analysis of Building Systems) का इस्तेमाल हुआ।



    यह सॉफ्टवेयर पहले संरचना का सटीक 3डी डिजिटल मॉडल बनाता है। फिर वह जांचता है कि संरचना पर कितना भार पड़ेगा। तेज हवा और दबाव जैसी स्थितियों का भी परीक्षण किया जाता है। इसके लिए 100 से 120 अलग कॉम्बिनेशन का विश्लेषण होता है।



    रिपोर्ट में मुख्य आंतरिक स्टील पिलर, जिसे एलिमेंट नंबर सी12 कहा गया, की जांच हुई। इसका स्ट्रेस रेशियो 1.244 तक पहुंच गया, जबकि सुरक्षा सीमा 0.85 तय थी। यानी पिलर पर तय सीमा से करीब 24% ज्यादा दबाव पड़ रहा है। यह आंकड़ा प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।



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    छह महीने की चेतावनी

    शिकायत के मुताबिक फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने करीब छह महीने तक लगातार चेतावनी दी। यह चेतावनी मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और ठेकेदार कंपनी एलएंडटी (Larsen & Toubro) को दी गई। इसके बावजूद समय पर तकनीकी सुधार नहीं किए गए, ऐसा आरोप है।



    अफसरों पर कार्रवाई

    जब तकनीकी खामी की रिपोर्ट सामने आई, तो कार्रवाई खामी बताने वालों पर हुई। फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल अनुपम गुप्ता को पद से हटा दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि मेजर एडमंड कीन नाम का व्यक्ति साइट पर इंजीनियर-इन-चार्ज बनकर फैसले ले रहा था। आरोप है कि उनकी कोई वैध सरकारी नियुक्ति नहीं थी। उन्होंने अधिकृत मुख्य इंजीनियरों के फैसले भी कई बार बदले, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हुई।



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    फील्ड डायरेक्टर ने यह अनियमितताएं एमपीएसटीडीसी (mp tourism Development Corporation) के तत्कालीन एमडी आईएएस इलैयाराजा टी को भी बताई थीं। इसके अलावा संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला को भी जानकारी दी गई। लेकिन शिकायत के मुताबिक कोई कार्रवाई नहीं हुई।



    भुगतान और वसूली अटकी

    शिकायत में भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं का भी जिक्र है। संविदा नियमों के तहत ठेकेदार कंपनी से करीब 8 करोड़ रुपए वसूले जाने थे। यह वसूली एक साल से लंबित बताई जा रही है। इसके अलावा पीएमसी (Project Management Consultant) से ऑफिस, गाड़ी और बिजली खर्च के 28 लाख रुपए भी वसूले जाने थे। यह रकम भी अब तक नहीं वसूली गई। वहीं कंसलटेंट कंपनी को पूरा भुगतान कर दिया गया। लेकिन वहां काम करने वाले विशेषज्ञों की सैलरी रोक दी गई है।



    लोकायुक्त में शिकायत

    लोकायुक्त संगठन ने अब शिकायतकर्ता से दस्तावेज और पूरी जानकारी मांगी है। नोटिस में कहा गया कि मामले की जांच लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में हो रही है। शिकायतकर्ता को तय तारीख पर रिकॉर्ड के साथ उपस्थित होना है। यह मामला प्रतिमा की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ा बताया गया है। सुनवाई 7 जुलाई को होनी थी, लेकिन यह नहीं हो सकी।



    अधिकारियों का पक्ष

    आदि शंकराचार्य न्यास के सीईओ डॉ. मनीष पांडेय ने कहा कि दोनों कर्मचारी पर्यटन विकास निगम में कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि एकात्मधाम प्रोजेक्ट पर्यटन विभाग द्वारा संचालित है। उन्होंने कहा कि इस बारे में पर्यटन निगम से बात करनी चाहिए।



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    मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के एमडी आईएएस दिलीप यादव ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए समर्पित न्यास बनाया गया है। उनके मुताबिक हर चरण की निगरानी विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। उन्होंने कहा कि निर्माण गुणवत्ता में किसी कमी की गुंजाइश नहीं है।



    अब सबकी नजर लोकायुक्त की अगली सुनवाई पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या समय रहते पिलर की मरम्मत होगी। प्रतिमा से जुड़ी सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और जिम्मेदार अफसरों से जल्द जवाब की उम्मीद है।



    FAQ

    1. प्रश्न: एकात्मधाम प्रतिमा का पिलर कमजोर क्यों बताया जा रहा है?
      उत्तर: इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस सॉफ्टवेयर ईटीएबीएस की जांच में पिलर का स्ट्रेस रेशियो तय सीमा से ज्यादा पाया गया। सुरक्षा सीमा 0.85 थी, लेकिन यह 1.244 तक पहुंच गया। यानी पिलर पर करीब 24% ज्यादा दबाव पड़ रहा है, जिससे इसकी मजबूती पर सवाल खड़े हुए हैं।
    2. प्रश्न: एकात्मधाम प्रतिमा के मामले में किन अधिकारियों को पद से हटाया गया?
      उत्तर: तकनीकी खामी सामने आने के बाद प्रोजेक्ट के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल अनुपम गुप्ता को पद से हटाया गया। यह दोनों अधिकारी पीएमसी से जुड़े थे और उन्होंने ही पिलर में खामी की जानकारी सबसे पहले सामने रखी थी।
    3. प्रश्न: एकात्मधाम प्रतिमा की शिकायत की जांच अभी किस स्तर पर है?
      उत्तर: शिकायत सीबीआई, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और लोकायुक्त तक पहुंच चुकी है। लोकायुक्त कार्यालय इंदौर ने शिकायतकर्ता से दस्तावेज मांगे हैं। तय सुनवाई 7 जुलाई को होनी थी, लेकिन यह अब तक नहीं हो पाई है।

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