क्या है आदि गुरु शंकराचार्य के चार मठों का रहस्य, जिसने बदल दिया भारत का भाग्य

Kaushiki | Apr 19, 2026, 15:20 IST
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आदि शंकराचार्य जयंती 2026: आज 21 अप्रैल 2026 को आदि शंकराचार्य की 1238वीं जयंती है। उन्होंने चार मठों की स्थापना कर सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया और एकता का संदेश दिया।

Adi Shankaracharya Jayanti 2026: सनातन धर्म में आदि शंकराचार्य का स्थान बहुत ऊंचा माना जाता है। वे 8वीं शताब्दी के एक महान भारतीय दार्शनिक और संत थे। आज 21 अप्रैल को उनकी 1238वीं जयंती मनाई जाएगी। ये हमें उनके अद्वैत वेदांत और त्याग की याद दिलाती है।

शंकराचार्य बचपन से ही बहुत तेज बुद्धि के बालक थे। उन्होंने मात्र 8 वर्ष की आयु में चारों वेदों का ज्ञान लिया। बहुत छोटी उम्र में उन्होंने संन्यास का कठिन मार्ग चुना। आइए इनके बारे में जानें...

About Adi Shankaracharya | आदि शंकराचार्य के बारे में
About Adi Shankaracharya | आदि शंकराचार्य के बारे में


कौन थे आदि गुरु शंकराचार्य

आदि गुरु शंकराचार्य आठवीं सदी के महान भारतीय संत थे। उनका जन्म केरल के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे बचपन से ही बहुत तेज बुद्धि के बालक थे। मात्र 8 साल की उम्र में ही संन्यास ले लिया था।

शंकराचार्य ने पूरे भारत की पैदल यात्रा की थी। उन्होंने बिखरते हुए हिंदू समाज को एक सूत्र में पिरोया। उन्होंने अद्वैत वेदांत के महान ज्ञान का प्रचार किया। देश की चारों दिशाओं में उन्होंने चार मठ बनाए। इन मठों ने सनातन धर्म को नई शक्ति दी। वे एक महान दार्शनिक और धर्म सुधारक थे।

जब धर्म का अस्तित्व संकट में था, तब उनके तर्कों और शिक्षाओं ने हिंदू संस्कृति को पुनर्जीवित किया। उनकी शिक्षाएं आज भी हमें सही रास्ता दिखाती हैं। वे ईश्वर और आत्मा को एक ही मानते थे।

उन्होंने समाज से धार्मिक भ्रमों को दूर किया था। आज भी उन्हें जगतगुरु के रूप में पूजा जाता है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन के आकाश में आदि शंकराचार्य एक ऐसे देदीप्यमान सूर्य हैं, जिन्होंने अंधकार में डूबे समाज को ज्ञान का मार्ग दिखाया।

महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य - Adi Shankaracharya | Webdunia Hindi
महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य - Adi Shankaracharya | Webdunia Hindi


सनातन धर्म का महान कार्य

एक समय भारतीय संस्कृति और धर्म पतन की ओर बढ़ रहे थे। समाज में कई तरह के भ्रम और मतभेद फैल चुके थे। तब आदि शंकराचार्य ने धर्म को फिर से जीवित किया। उन्होंने तर्क और ज्ञान से लोगों को सत्य का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि आत्मा और परमात्मा असल में एक ही हैं।

उनके इस सिद्धांत को अद्वैत वेदांत के नाम से जाना गया। उन्होंने पूरे भारत का पैदल भ्रमण कर एकता का संदेश दिया। समाज को जोड़ने के लिए उन्होंने कई महान ग्रंथों की रचना की। उनके कार्यों ने हिन्दू धर्म को एक नई ऊर्जा प्रदान की।

आदि शंकराचार्य - अद्वैत वेदांत के महानतम गुरु
आदि शंकराचार्य - अद्वैत वेदांत के महानतम गुरु


चार मठों की स्थापना का रहस्य

आदि शंकराचार्य ने भारत के चार कोनों में मठ स्थापित किए। यह कदम धार्मिक और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए था। दक्षिण में उन्होंने कर्नाटक के श्रृंगेरी में पहला मठ बनाया।

आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ
आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ


ज्योतिर्मठ (उत्तराखंड): यह मठ बद्रीनाथ में स्थित है और इसे अथर्ववेद की शिक्षाओं के लिए जाना जाता है। यहां के संन्यासियों के नाम के पीछे 'गिरि', 'पर्वत' या 'सागर' शब्द लगाए जाते हैं। इस मठ का प्रमुख महावाक्य 'अयमात्मा ब्रह्म' है और इसके पहले मठाधीश आचार्य तोटक थे।

आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ
आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ


द्वारका मठ (गुजरात): इसे 'शारदा मठ' भी कहते हैं, जो गुजरात के द्वारका धाम में स्थित है और यहां सामवेद को रखा गया है। इस संप्रदाय के संन्यासी अपने नाम के अंत में 'तीर्थ' या 'आश्रम' शब्द का प्रयोग करते हैं। इस मठ का महावाक्य 'तत्त्वमसि' है और इसके पहले मठाधीश हस्तामलक थे।

आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ
आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ


गोवर्धन मठ (ओडिशा): यह मठ पुरी में स्थित है और इसका सीधा संबंध प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर से माना जाता है। यहां ऋग्वेद की परंपरा का पालन होता है और संन्यासियों के नाम के साथ आरण्य विशेषण लगाया जाता है। इसका महावाक्य 'प्रज्ञानं ब्रह्म' है और इसके पहले मठाधीश पद्मपाद हुए थे।

आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ
आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ


श्रृंगेरी मठ (कर्नाटक): यह भारत के दक्षिण में स्थित प्रसिद्ध पीठ है, जहां यजुर्वेद की शिक्षाओं को सुरक्षित रखा गया है। यहां दीक्षा लेने वाले संन्यासी अपने नाम के बाद 'सरस्वती', 'भारती' या 'पुरी' शब्द लगाते हैं। इस मठ का महावाक्य 'अहं ब्रह्मास्मि' है और इसके पहले मठाधीश आचार्य सुरेश्वर थे।

इन मठों का उद्देश्य वेदों की शिक्षा को सुरक्षित रखना था। आज भी ये मठ सनातन धर्म के सबसे बड़े केंद्र हैं। इन पीठों के माध्यम से उन्होंने धर्म को व्यवस्थित किया।

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आदि शंकराचार्य के अनमोल विचार

भगवान शंकराचार्य (Adiguru Shankaracharya) का सबसे प्रसिद्ध वाक्य ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या है। इसका अर्थ है कि केवल ईश्वर सत्य है और संसार अस्थायी है। उन्होंने कहा कि जीव और ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने भक्ति के महत्व पर भी बहुत जोर दिया था।

शंकराचार्य का भज गोविन्दं श्लोक आज भी बहुत लोकप्रिय और प्रसिद्ध है। वे कहते थे कि केवल किताबी ज्ञान इंसान को नहीं बचाता। जीवन में ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति होना बहुत जरूरी है। उनके विचार आज भी हमें सही रास्ता दिखाते हैं। आत्मज्ञान ही दुखों से मुक्ति का एकमात्र मार्ग है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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