पेनकिलर लेने की आदत ने खराब की किडनी, इंदौर में हुआ ट्रांसप्लांट
बुखार या शरीर में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द दवा खा लेना कई लोगों की आदत बन गई है। लेकिन 31 साल के नंदराम के लिए यह आदत बेहद महंगी साबित हुई।
एक महीने के भीतर उसने करीब 13 बार पेनकिलर ली, जिसके बाद उसकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। करीब एक साल तक डायलिसिस पर रहने के बाद इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में उसका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। नंदराम की मां ने अपनी किडनी देकर उसे नई जिंदगी दी।
एक महीने तक खाई पेनकिलर
अहमदाबाद में काम के दौरान बुखार और हाथ-पैर में दर्द होने पर नंदराम ने डॉक्टर के पास जाने के बजाय दुकान से पेनकिलर लेकर खा ली। एक महीने में उसने ऐसा करीब 13 बार किया। हर बार दो दिन तक कुछ राहत मिलती, लेकिन दर्द और बुखार लौटते ही वह दोबारा दवा ले लेता। कुछ समय बाद पेट में दर्द शुरू हुआ और जांच में सामने आया कि उसकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं।
ललितपुर जिले के तुर्का गांव के रहने वाले नंदराम इसके बाद दिल्ली, भोपाल और अहमदाबाद में इलाज कराते रहे। हालत बिगड़ने पर उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगी। करीब एक साल तक डायलिसिस के बाद आखिरकार इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।
मां ने दी किडनी, बेटे को मिली नई जिंदगी
4 अगस्त को नंदराम की मां भगवती ने अपनी किडनी देकर उन्हें नई जिंदगी दी। यह ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त हुआ। फिलहाल नंदराम की हालत स्थिर है और नई किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है।
पेनकिलर से कैसे बिगड़ती है किडनी की सेहत
सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. रितेश कुमार बनोदे ने बताया कि कुछ दर्द निवारक दवाओं का बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर तब जब यह बिना डॉक्टर की सलाह के लिया जाए।
उनके मुताबिक पेनकिलर किडनी में खून का प्रवाह बनाए रखने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन के असर को कम कर सकती हैं, जिससे कुछ स्थितियों में एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) यानी अचानक किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि एक-दो बार पेनकिलर लेने से हर व्यक्ति की किडनी खराब नहीं होती। यह खतरा दवा के प्रकार, उसकी मात्रा, कितनी बार और कितने समय तक ली गई, और व्यक्ति की सेहत पर निर्भर करता है। डिहाइड्रेशन, पहले से किडनी की बीमारी, बढ़ती उम्र या कुछ अन्य दवाओं के साथ इनके इस्तेमाल से यह जोखिम और बढ़ सकता है।
बार-बार दर्द हो तो वजह पता करना जरूरी
डॉ. बनोदे के मुताबिक बुखार, शरीर में दर्द या किसी अन्य तकलीफ पर हर बार दुकान से दवा लेकर लक्षण दबा देना सही तरीका नहीं है। इसके पीछे संक्रमण, सूजन या कोई और बीमारी छिपी हो सकती है, इसलिए असली वजह पता लगाकर इलाज कराना जरूरी है।
उन्होंने सलाह दी कि पेनकिलर लेने की जरूरत पड़े तो डॉक्टर से सही दवा, खुराक और कितने दिन लेनी है, यह जरूर पूछना चाहिए। बीमारी या डिहाइड्रेशन की स्थिति में पर्याप्त पानी पीना और लंबे समय तक दर्द की दवा लेने से बचना भी जरूरी है।
एक और मरीज की कहानी
इंदौर के एमवाय अस्पताल में डायलिसिस करा रहे 37 साल के जितेंद्र कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अशोक नगर के रहने वाले जितेंद्र इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे। काम के दौरान होने वाली थकान और शरीर के दर्द से राहत के लिए उन्होंने पेनकिलर लेना शुरू किया। करीब एक महीने तक लगातार दवा लेने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
जितेंद्र के मुताबिक साल 2021 से उनकी सेहत की परेशानी बढ़ने लगी और जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। पिछले चार साल से वे डायलिसिस पर हैं और उन्हें हफ्ते में तीन दिन अस्पताल जाना पड़ता है।
इंदौर के अस्पताल में अब तक 8 किडनी ट्रांसप्लांट
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में अब तक कुल 8 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त हुए हैं। इनमें से 7 मामलों में मां ने ही अपने बच्चे को किडनी दान की है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के मुताबिक अस्पताल में मरीजों को समय पर इलाज, जरूरी दवाइयां और बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
एक्सपर्ट कोट्स
सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. रितेश कुमार बनोदे ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर का बार-बार सेवन किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि दर्द बार-बार हो तो सिर्फ दवा लेने के बजाय उसका असली कारण पता लगाना जरूरी है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज सुविधा देने पर लगातार काम हो रहा है।
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