PHQ ने दिए सख्त निर्देश, अब बिना लिखित जानकारी के गिरफ्तारी पर होगी कार्रवाई

Sandeep Kumar | Apr 16, 2026, 23:36 IST
PHQ
मध्य प्रदेश पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब गिरफ्तारी के ठोस कारण लिखित रूप में 2 घंटे पहले देना अनिवार्य किया गया है। इस आदेश का पालन न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मध्यप्रदेश पुलिस को गिरफ्तार करने से पहले ठोस कारण लिखित में बताने होंगे। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जारी हुआ है। पुलिस मुख्यालय भोपाल ने इस प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने के लिए आदेश जारी किया। अगर पुलिस अधिकारियों ने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो गिरफ्तारी अवैध हो सकती है। ऐसे में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



गिरफ्तारी के ठोस कारण जरुरी

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण दो घंटे पहले लिखित रूप में दिए जाएंगे। यह जानकारी गिरफ्तारी के समय या आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने से पहले दी जानी चाहिए। अब सिर्फ मौखिक सूचना पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। जानकारी स्थानीय भाषा या ऐसी भाषा में दी जाएगी जिसे गिरफ्तार व्यक्ति समझ सके।



पुलिस मुख्यालय भोपाल ने परिपत्र में कहा है कि गिरफ्तारी की जानकारी आरोपी को दी जाए। इसे गिरफ्तारी पंचनामा और अभिलेख में दर्ज किया जाए। इससे गिरफ्तारी की प्रक्रिया पारदर्शी और वैधानिक होगी।



...तो गिरफ्तारी होगी अवैध घोषित

अगर पुलिस अधिकारी इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, तो गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, आरोपी को तत्काल रिहाई का अधिकार भी मिल सकता है।



क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में मुंबई के हिट एंड रन मामले में फैसला सुनाया था। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) का हवाला देते हुए कहा था कि गिरफ्तारी के दौरान व्यक्ति को ठोस कारण जानने का अधिकार है। इस आदेश के तहत अब पुलिस को गिरफ्तारी के कारण लिखित में देने होंगे। साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि गिरफ्तारी की जानकारी व्यक्ति की समझ में आने वाली भाषा में हो।



क्यों जारी किया गया परिपत्र?

यह परिपत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जारी किया गया है। 5 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुंबई के हिट एंड रन मामले में यह आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत प्रत्येक गिरफ्तारी के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को उसके गिरफ्तारी के ठोस कारण दिए जाने चाहिए, ताकि उसकी मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके।



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