पीथमपुर में फूटा मजदूरों का गुस्सा, महंगाई के आगे सैलरी कम, तीन कंपनियों में काम ठप
News In short
- पीथमपुर की मदरसन, बायो स्पंज और हुंडई मोबिस कंपनी के मजदूर पिछले दो दिनों से हड़ताल पर हैं।
- मजदूरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के हिसाब से उनके वेतन में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की गई है।
- मजदूरों ने कंपनियों पर आरोप लगाया है कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है।
- अपनी मांगों को लेकर मजदूरों ने दो किलोमीटर पैदल मार्च निकालकर श्रम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।
News In Detail
औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में पिछले दो दिनों से कामकाज की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। यहां एक के बाद एक कई कंपनियों में हो रही हड़तालों ने मजदूरों के भीतर छिपे असंतोष को सड़क पर ला दिया है। आसमान छूती महंगाई, कई सालों से न बढ़ी सैलरी और मूलभूत सुविधाओं का अभाव, ये वो वजहें हैं जिन्होंने मजदूरों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
तीन बड़ी कंपनियों में थमे पहिए
पीथमपुर की दिग्गज कंपनियों मदरसन, बायो स्पंज और हुंडई मोबिस के मजदूर फिलहाल काम बंद कर हड़ताल पर हैं। मजदूरों का कहना है कि गैस सिलेंडर से लेकर रोजमर्रा के राशन की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं, लेकिन कंपनी उनका वेतन बढ़ाने को तैयार नहीं है। इतने कम वेतन में घर चलाना अब उनके लिए नामुमकिन सा होता जा रहा है।
काम का बोझ ज्यादा और सुविधाएं कम
मजदूरों का आरोप है कि उन्हें शासन द्वारा तय किया गया न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, कंपनियों में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिसके चलते मौजूदा वर्करों पर काम का दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है। परिवहन सुविधा के नाम पर भी बड़ा खेल चल रहा है, श्रमिकों के वेतन से बस का मोटा पैसा तो काटा जा रहा है, लेकिन सुविधाएं बेहद खराब हैं।
श्रम कार्यालय तक गूंजी आवाज
हड़ताल के दूसरे दिन अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सैकड़ों मजदूर कंपनी परिसर से बाहर निकल आए। उन्होंने लगभग दो किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकाला और विकास भवन स्थित श्रम कार्यालय पहुंचे। यहां मजदूरों ने हुंकार भरते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और साफ किया कि जब तक वेतन वृद्धि और स्टाफ की कमी जैसे मुद्दे हल नहीं होते, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात हैं। पुलिस और श्रम विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल मोर्चा संभाला हुआ है। मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के बीच फिलहाल बातचीत का दौर चल रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि दोनों पक्षों के बीच सुलह कराकर जल्द से जल्द औद्योगिक शांति बहाल की जाए।
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