पीएम मोदी की कम खर्च मुहिम का असर: अब अफसरों की यात्राओं पर लगेगी लगाम

Ramanand Tiwari | Jun 21, 2026, 08:30 IST
पीएम मोदी की कम खर्च मुहिम का असर
मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब अफसरों की अनावश्यक यात्राओं पर सख्ती होगी। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के मितव्ययता संदेश के बाद नई गाइडलाइन लागू की गई है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सरकारी यात्राओं के लिए मुख्य सचिव की मंजूरी जरूरी।
  • बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।
  • ऊर्जा बचत और सोलर योजना पर सरकार का फोकस बढ़ा।
  • प्राकृतिक खेती और खनिज संसाधनों पर भी नई रणनीति।

बेवजह उपयोग पर उठ रहे सवाल

सरकारी खर्च बढ़ने और संसाधनों के बेवजह उपयोग पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और ऊर्जा संरक्षण के संदेश के बाद अब प्रदेश में अफसरों की सरकारी यात्राओं से लेकर बैठकों तक पर नई निगरानी रहेगी। सरकार का दावा है कि इससे करोड़ों रुपए की बचत होगी और प्रशासनिक कामकाज अधिक प्रभावी बनेगा।



क्या सरकारी खर्च बढ़ने की चिंता बनी वजह?

प्रदेश सरकार ने माना है कि प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक खर्च को कम करना समय की जरूरत है। इसी सोच के तहत सामान्य प्रशासन विभाग ने मितव्ययता बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। अब विभागीय सचिवों को प्रदेश के बाहर किसी भी सरकारी दौरे पर जाने से पहले मुख्य सचिव की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इससे सरकारी यात्राओं की वास्तविक जरूरत का आकलन किया जा सकेगा।



वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बनेगी पहली पसंद

सरकार चाहती है कि बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सेमिनारों के लिए यात्रा पर खर्च कम हो। इसीलिए निर्देश दिए गए हैं कि जहां संभव हो, वहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे समय की बचत के साथ सरकारी खर्च में भी कमी आएगी।



मुख्यमंत्री के काफिले से शुरू हुआ संदेश

मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या कम कर चुके हैं। काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल कर सरकार ने ऊर्जा बचत का प्रतीकात्मक संदेश भी दिया है। सरकारी आयोजनों में वाहनों के सीमित उपयोग के निर्देश पहले से लागू हैं। अब इन्हें प्रशासनिक स्तर पर और सख्ती से लागू करने की तैयारी है।



अफसरों को कार-पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन की सलाह

नई व्यवस्था के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कार-पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की खपत कम होगी और पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ेगा।



दिल्ली-मुंबई दौरे भी होंगे नियंत्रित

केंद्र सरकार से जुड़े कार्यों के लिए बार-बार दौरे करने की जगह नई दिल्ली और मुंबई स्थित आवासीय आयुक्त कार्यालयों की सेवाएं लेने पर जोर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य यात्रा खर्च कम करना और कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाना है।



ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण पर फोकस

सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विशेष ध्यान देने को कहा है।


इसके साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क के विस्तार और उज्ज्वला योजना के अपात्र या डुप्लीकेट कनेक्शनों की पहचान के लिए अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।



हर घर सोलर की ओर बढ़ाने की तैयारी

सभी विभागों को प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत लोगों को घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनसंपर्क विभाग ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाएगा।



रणनीतिक खनिजों पर सरकार की नजर

मध्य प्रदेश सरकार ने लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ, कॉपर और कोयला जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की स्वीकृतियों और लीज प्रक्रिया को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इन खनिजों के विकास से देश की आयात निर्भरता कम होगी और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को मजबूती मिलेगी।



मुख्य बातें एक नजर में

प्रदेश के बाहर सरकारी यात्रा से पहले मुख्य सचिव की अनुमति जरूरी।


बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता।


कार-पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा।


सरकारी खर्च और ईंधन खपत कम करने पर जोर।


प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहन।


प्राकृतिक खेती और ऊर्जा संरक्षण पर विशेष फोकस।


लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे रणनीतिक खनिजों को प्राथमिकता।



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