सिर्फ सीटें नहीं, डॉक्टर बेहतर चाहिए: मेडिकल शिक्षा पर PMTA ने PM को लिखा पत्र
समझें क्या है पूरा मामला...
- PMTA ने प्रधानमंत्री को मेडिकल शिक्षा पर पत्र लिखा है।
- संगठन ने गिरती शिक्षा गुणवत्ता पर चिंता जताई है।
- श्योपुर मेडिकल कॉलेज का उदाहरण दिया गया है।
- NMC की मान्यता प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं।
- PMTA ने प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
देश के मेडिकल टीचर्स संगठन ने बड़ा मुद्दा उठाया है। प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन यानी PMTA (Progressive Medical Teachers Association) मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। यह संगठन शासकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों का है। पत्र में देश की चिकित्सा शिक्षा की गिरती गुणवत्ता पर गहरी चिंता जताई गई है।
संगठन ने कहा कि बिना पर्याप्त संसाधनों के नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। इसके साथ ही नेशनल मेडिकल कमीशन यानी NMC (National Medical Commission) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में आ सकती है।
संसाधनों की कमी पर चिंता
MP PMTA ने पत्र में साफ लिखा है कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं, जरूरी फैकल्टी, अस्पताल और प्रयोगशालाओं की अनदेखी हो रही है। आधुनिक उपकरण और क्लिनिकल प्रशिक्षण की सुविधाएं भी अधूरी हैं। संगठन का मानना है कि सिर्फ एमबीबीएस सीटें बढ़ाना समाधान नहीं है। गुणवत्तापूर्ण डॉक्टर तैयार करना ज्यादा जरूरी है।
पत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO (World Health Organization) का हवाला भी दिया गया है। इसके मुताबिक भारत में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात पहले से बेहतर स्थिति में है। इसलिए अब संख्या की जगह गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
श्योपुर कॉलेज बना उदाहरण
एसोसिएशन ने मध्यप्रदेश के श्योपुर शासकीय मेडिकल कॉलेज का जिक्र किया है। इसे चिकित्सा शिक्षा की बदहाल व्यवस्था का उदाहरण बताया गया है। विद्यार्थियों ने एक खुला पत्र भी लिखा था। इसमें फैकल्टी, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण और मरीजों की कमी का जिक्र किया गया।
दावा किया गया कि पिछले एक साल में करीब 180 प्रैक्टिकल कक्षाएं तय थीं। वहीं, इनमें से सिर्फ एक कक्षा ही हो पाई। इससे साफ है कि छात्रों का व्यावहारिक प्रशिक्षण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यह आगे चलकर मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
मान्यता प्रक्रिया पर उठे सवाल
पत्र में NMC की मान्यता प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हाल में केंद्रीय जांच एजेंसी ने NMC के कुछ अधिकारियों के खिलाफ FIR (First Information Report) दर्ज की थी। इससे मान्यता प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि निरीक्षण से पहले तारीखें लीक हो जाती हैं।
कुछ कॉलेजों में घोस्ट फैकल्टी दिखाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कागजी मरीज दिखाकर मान्यता लेने के मामले भी बताए गए हैं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह बेहद गंभीर मुद्दा है। यह पूरी चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा करता है।
आयोग में खाली पड़े पद
पत्र में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग का भी जिक्र किया गया है। इसके चार स्वायत्त बोर्डों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। देशभर के 850 से ज्यादा मेडिकल कॉलेजों की निगरानी इसी आयोग के पास है। एसोसिएशन का कहना है कि विशेषज्ञों के पद खाली रहना नियामक व्यवस्था की कमजोरी दिखाता है। इससे मान्यता और निगरानी का काम प्रभावित हो रहा है।
PMTA ने रखी तीन बड़ी मांगें
एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि नए मेडिकल कॉलेजों का स्वतंत्र समिति से ऑडिट कराया जाए। इसमें फिजिकल, शैक्षणिक और बायोमेट्रिक जांच शामिल हो। दूसरी मांग है कि मान्यता में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
साथ ही NMC के खाली पदों पर ईमानदार डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए। तीसरी मांग है कि पर्याप्त भवन और फैकल्टी होने पर ही नए कॉलेज खोलने की अनुमति मिले। संगठन का मानना है कि इन कदमों से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी।
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