राहुल ने जताया खेद, कार्तिकेय ने जताई सहमति! अब हाईकोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार
समझें क्या है पूरा मामला
- राहुल गांधी और कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच समझौता हुआ।
- राहुल गांधी ने विवादित बयान पर फिर से खेद व्यक्त किया।
- कार्तिकेय सिंह चौहान ने कार्यवाही समाप्त करने पर सहमति दी।
- हाईकोर्ट ने अंतिम आदेश पारित करने से पहले फैसला सुरक्षित रखा।
- 'द सूत्र' ने दो दिन पहले ही समझौते की जानकारी अपने पाठकों को दे दी थी।
आठ साल पुराने विवाद के अंत की औपचारिक शुरुआत
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कार्तिकेय चौहान के बीच मानहानि विवाद में गुरुवार को अहम घटनाक्रम सामने आया। जबलपुर हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने पक्षों की सहमति रिकॉर्ड की। दोनों पक्षों ने समझौते की स्थिति अदालत को बताई। अदालत ने अंतिम आदेश सुरक्षित रखा। मामले में अगला आदेश बाद में आएगा। समझौते के आधार पर विवाद समाप्त होने की संभावना है।
'द सूत्र' की खबर पर लगी मुहर
इस घटनाक्रम की विशेष बात यह रही कि 'द सूत्र' ने दो दिन पहले ही अपने पाठकों को बता दिया था कि राहुल गांधी और कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच समझौते की प्रक्रिया चल रही है और मामला जल्द समाप्त हो सकता है। पिछले दो सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि उन्होंने कथित बयान पर खेद व्यक्त किया है। दोनों पक्ष समझौते के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। गुरुवार की सुनवाई में यह स्थिति औपचारिक रूप से अदालत के रिकॉर्ड का हिस्सा बन गई।
पहले दस्तावेज पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
दोपहर 1 बजे हुई सुनवाई में कार्तिकेय सिंह चौहान की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने अदालत में दस्तावेज पेश किए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
इस पर जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज में यह साफ लिखा होना चाहिए कि कार्तिकेय सिंह चौहान को हाईकोर्ट और जिला अदालत दोनों में लंबित मामलों को समाप्त करने पर कोई आपत्ति नहीं है। अदालत ने संशोधन के लिए समय दिया और मामले की अगली सुनवाई दोपहर 2:45 बजे तय की गई।
संशोधित दस्तावेज में दर्ज हुई सहमति
दूसरी सुनवाई में संशोधित दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसमें उल्लेख किया गया कि राहुल गांधी ने अपने कथित बयान पर खेद व्यक्त किया है। कार्तिकेय सिंह चौहान को उनके खिलाफ हाईकोर्ट तथा जिला अदालत में लंबित कार्यवाहियों को समाप्त किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों की इस सहमति के बाद अदालत ने पूरे मामले को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 29 अक्टूबर 2018 को झाबुआ में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक कथित बयान से जुड़ा था। कार्तिकेय सिंह चौहान का आरोप था कि राहुल गांधी ने 'पनामा पेपर्स' का उल्लेख करते हुए ऐसा बयान दिया जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसके बाद भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में मानहानि की शिकायत दायर की गई और बाद में राहुल गांधी को समन जारी किया गया। इसी समन आदेश और कार्यवाही को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
नाम गलती से आ गया था: राहुल गांधी
हाईकोर्ट में प्रस्तुत आवेदन में राहुल गांधी की ओर से कहा गया कि संबंधित बयान में कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम त्रुटिवश आ गया था। आवेदन के अनुसार उनका संदर्भ छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र से था, जिनका नाम पनामा पेपर्स विवाद में सामने आया था। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्होंने अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देते हुए खेद व्यक्त किया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे आज भी अपने उसी स्पष्टीकरण पर कायम हैं।
अब सभी की नजर अंतिम आदेश पर
फिलहाल अदालत ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और कार्तिकेय सिंह चौहान ने भी कार्यवाही समाप्त करने पर सहमति दे दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम आदेश जारी होने के बाद हाईकोर्ट में लंबित याचिका और भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में चल रही कार्यवाही का औपचारिक रूप से पटाक्षेप हो जाएगा। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हैं।
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