रायसेन के दादा धूनी दरबार में सोने की बरसात! भक्त ने चढ़ाया डेढ़ किलो सोना
समझें क्या है पूरा मामला
- उदयपुरा के दादा धूनी दरबार में धार्मिक आयोजन हुआ।
- यह आयोजन लगातार 51 दिनों तक आयोजित किया गया।
- श्रद्धालुओं ने डेढ़ किलो सोने के आभूषण चढ़ाए।
- चार से पांच किलो चांदी भी अर्पित हुई।
- नर्मदा संकीर्तन आठ अक्टूबर तक लगातार जारी रहेगा।
रायसेन के उदयपुरा में दादा धूनी दरबार में 51 दिन का धार्मिक आयोजन हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने डेढ़ किलो सोना और 4 से 5 किलो चांदी के आभूषण धूनी में चढ़ाए। लाखों किलो फल-फूल और मिठाइयां भी अर्पित की गईं। संत शिवानंद जी महाराज को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र मिला। आयोजन 29 जुलाई से 17 सितंबर तक चला, नर्मदा संकीर्तन 8 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
51 दिन तक चला अनोखा आयोजन
रायसेन जिले के उदयपुरा में स्थित दादा धूनी दरबार में हाल ही में एक बड़ा धार्मिक आयोजन हुआ। यह आयोजन पूरे 51 दिन तक चला। इस दौरान आस्था का एक अनोखा रूप देखने को मिला। धूनी में करीब डेढ़ किलो सोना चढ़ाया गया। साथ ही 4 से 5 किलो चांदी के आभूषण भी अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
लाखों किलो सामग्री हुई अर्पित
आयोजकों के मुताबिक, इस धूनी में 1 लाख 51 हजार किलो फल-फूल चढ़ाए गए। इसके अलावा मिठाइयां, कपड़े और हवन सामग्री भी अर्पित की गई। साथ ही 251 तरह की जड़ी-बूटियां भी इस्तेमाल हुईं। यह आंकड़ा आयोजन के बड़े पैमाने को दिखाता है। श्रद्धालुओं की आस्था इस पूरे आयोजन में साफ नजर आई।
संत को मिला इंटरनेशनल अवॉर्ड
इस आयोजन के दौरान संत शिवानंद जी महाराज को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र दिया गया। यह सम्मान इस बड़े आयोजन को ध्यान में रखकर दिया गया। आयोजकों ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ था। यह 17 सितंबर 2026 तक चला। वहीं 21 दिन का नर्मदा संकीर्तन 8 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
धूनी को माना मां नर्मदा का रूप
संत शिवानंद जी महाराज के अनुसार, धूनी को मां नर्मदा का रूप मानकर श्रृंगार चढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह दादा धूनी वाले महाराज और मां नर्मदा नदी की कृपा से संभव होती है। महाराज ने बताया कि धूनी में चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण अग्नि में भस्म हो जाते हैं। इससे स्वर्ण और रजत भस्म बनती है। बाद में इस भस्म को मां नर्मदा में विसर्जित किया जाता है।
24 घंटे चली प्रसादी की व्यवस्था
आयोजन में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। उनके लिए 24 घंटे प्रसादी की व्यवस्था की गई थी। यह व्यवस्था पूरे 51 दिन तक बिना रुके चली। संत शिवानंद महाराज ने कहा कि भोजन कभी कम नहीं पड़ा। उन्होंने इसे दादा धूनी वाले महाराज की कृपा बताया। उनके मुताबिक यही आस्था इस आयोजन की असली ताकत है।
साल भर होते हैं ऐसे आयोजन
संत शिवानंद महाराज ने बताया कि साल भर अलग-अलग जगहों पर ऐसे कई धार्मिक आयोजन होते हैं। इनमें किसी से चंदा या सहयोग नहीं लिया जाता। यह बात आयोजन की पारदर्शिता दिखाती है। श्रद्धालु उमाशंकर मालवीय ने इस आयोजन को आस्था से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि यह दादा धूनी वाले महाराज के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन खास अनुभव रहा।
FAQ
- दादा धूनी दरबार कहां स्थित है?
यह मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के उदयपुरा में स्थित है। यहां हाल ही में 51 दिन का धार्मिक आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। - धूनी में कितना सोना-चांदी चढ़ाया गया?
धूनी में करीब डेढ़ किलो सोना चढ़ाया गया। इसके साथ 4 से 5 किलो चांदी के आभूषण भी अर्पित किए गए। यह आयोजन 51 दिन तक चला।
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