हवा-हवाई बोर्ड की जमीनी नौकरी, MP में फर्जी मार्कशीट से बने थे शिक्षक, 9 बर्खास्त
समझें क्या है पूरा मामला...
- राजगढ़ जिले में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने का मामला सामने आया।
- 18 शिक्षकों की 26 अंकसूचियों की जांच हुई।
- जांच में 9 मामले पूरी तरह फर्जी पाए गए।
- इन 9 प्राथमिक शिक्षकों की सेवाएं तुरंत खत्म कर दी गईं।
- अब इनके खिलाफ एफआईआर (First Information Report) दर्ज कराई जाएगी।
राजगढ़ जिले में फर्जी दस्तावेजों के दम पर सरकारी नौकरी पाने का बड़ा मामला सामने आया है। जिले के 18 शिक्षकों की कुल 26 अंकसूचियां जांच के दायरे में ली गई थीं। इस जांच में जालसाजी का बड़ा खेल उजागर हुआ है।
जांच में सामने आया कि इनमें से 9 मामले पूरी तरह फर्जी थे। शुरुआती जांच में 8 शिक्षकों की रिपोर्ट सही मिली। बाकी अंकसूचियों की अलग से जांच अभी जारी है।
हवा-हवाई बोर्ड से बनी मार्कशीट
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह निकली कि कुछ शिक्षकों ने ऐसे बोर्ड की अंकसूची लगाई थी जिसका धरातल पर कोई अस्तित्व ही नहीं है। यानी वह बोर्ड कागजों में तो दिखा, लेकिन असल में कहीं मौजूद नहीं था।
जांच के लिए भेजी गई 26 अंकसूचियों में माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल की 18, इग्नू नई दिल्ली की 5, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी की 2 और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की 1 अंकसूची शामिल थी। कुल 18 शिक्षकों में से 8 के पास दो-दो अंकसूचियां थीं।
9 शिक्षकों की सेवा समाप्त
जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद विभाग ने तुरंत सख्त कार्रवाई की। रामेशचंद्र यादव, पवन शर्मा, सुनील प्रजापति, हेमंत शर्मा, सावित्री दांगी, बनेसिंह लववंशी, भारतसिंह यादव, हरिप्रसाद लववंशी और हिम्मतसिंह मीणा की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।
यह सभी शिक्षक ब्यावरा और नरसिंहपुर क्षेत्र में अलग-अलग स्कूलों में पदस्थ थे। इनमें से हरिप्रसाद लववंशी का मामला खास तौर पर गंभीर बताया गया है। इनकी कर्नाटक यूनिवर्सिटी की दोनों अंकसूचियां पहली बार में ही फर्जी पाई गई थीं।
अब दर्ज होगी एफआईआर
विभागीय जांच में जालसाजी साबित होने के बाद अब इन सभी शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए एसपी (Superintendent of Police) को पत्र भी भेज दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक इन पूर्व शिक्षकों पर भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाएगा। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने जैसी धाराएं शामिल की जाएंगी।
21 नवंबर 2025 को हुआ था खुलासा
इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे पहले 21 नवंबर 2025 को हुआ था। इस दौरान राजगढ़ में काम कर रहे नटवरलाल शिक्षकों को का मामला सामने आया था। इसमें पता चला था कि कर्नाटक बोर्ड से बनवाई गई डीएड (Diploma in Education) अंकसूची फर्जी निकली है।
इस खुलासे के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। शिक्षा विभाग ने पूरा मामला भोपाल भेज दिया। शासन स्तर पर एक जांच समिति बनाई गई। माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने भी अपने स्तर पर पूरी पड़ताल शुरू की।
18 संदिग्धों की भेजी गई सूची
जांच के लिए जिन 18 शिक्षकों के नाम भेजे गए थे, उनमें बसंत शिवहरे, राहुल यादव, हेमंत शर्मा, राधा दांगी, राजमल दांगी, हरिप्रसाद लववंशी, राधेश्याम लववंशी, भारतसिंह यादव और रमेश चंद जैसे नाम शामिल थे।
इसके अलावा मुकेश मीणा, पवन शर्मा, सुनील प्रजापति, मांगीलाल दांगी, भेरूलाल दांगी, हिम्मतसिंह मीणा, जगदीश दांगी, सावित्री दांगी और बनेसिंह लववंशी के नाम भी सूची में थे। इनमें से कई शिक्षकों के नाम पर दो-दो अंकसूचियां दर्ज थीं।
सत्यापन की पूरी प्रक्रिया
कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी मैसूर से भी दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। इस यूनिवर्सिटी ने तीन जुलाई को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की पूरी तरह पुष्टि हो गई।
रिपोर्ट मिलते ही विभाग ने बिना देर किए सख्त कदम उठाए। समिति की सिफारिश पर अब सभी दोषी शिक्षकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बाकी बचे मामलों की जांच भी तेजी से पूरी की जा रही है।
आगे क्या होगा
अब पुलिस एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू करेगी। देखना होगा कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल था। यह भी साफ होना बाकी है कि फर्जी दस्तावेज किसने और कैसे तैयार किए।
इस मामले ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया की खामियों को भी उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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