छात्रों का फिसड्डी रिजल्ट आया तो राजगढ़ कलेक्टर ने ले ली टीचरों की परीक्षा, क्लास में रोईं टीचर

Anjali Dwivedi | May 05, 2026, 14:56 IST
rajgarh govt teacher exam for poor result
राजगढ़ में 40% से कम रिजल्ट देने वाले सरकारी शिक्षकों का प्रशासन ने टेस्ट लिया। कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षकों को परीक्षार्थी बनाकर बैठाया गया। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

राजगढ़. मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा पर घमासान जारी है। इसी बीच राजगढ़ जिले से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां प्रशासन ने खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों की परीक्षा ले ली है।



जिला पंचायत सीईओ इच्छित गढ़पाले ने खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। यह कदम स्कूलों में गिरते शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए उठाया गया। कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देश पर यह कदम उठाया गया।



कमजोर परिणामों पर प्रशासन ने की चर्चा

24 अप्रैल को मीडिया में एक खबर प्रकाशित हुई थी, खबर में यह बताया गया था कि कई स्कूल 40% रिजल्ट भी नहीं ला पाए। इसके बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया। डाइट परिसर में कमजोर परिणाम वाले स्कूलों की बड़ी बैठक बुलाई गई। इसमें कई प्राचार्यों और शिक्षकों को समीक्षा के लिए बुलाया गया। बैठक में एक-एक कर विषयवार परिणामों पर लंबी चर्चा की गई।



शिक्षक खुद क्यों बन गए परीक्षार्थी

Rajgarh मेंसमीक्षा के दौरान कई स्कूलों का शैक्षणिक स्तर बहुत खराब मिला। इसके बाद प्रशासन ने शिक्षकों का टेस्ट लेने का फैसला किया। शिक्षकों को परीक्षार्थियों की तरह डेस्क पर बिठाया गया। उन्हें उनके ही विषय का क्वेश्चन-पेपर हल करने को दिया गया। यह नजारा देख वहां मौजूद सभी लोग दंग रह गए।



प्रशासन ने इसे एफिशिएंसी चेक करने का एक कड़ा तरीका बताया। बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक अब खुद अपनी परीक्षा दे रहे थे।



नकल रोकने के लिए बनाए गए तीन सेट

यह कोई मामूली टेस्ट नहीं था, बल्कि पूरी तैयारी के साथ ली गई परीक्षा थी। क्वेश्चन-पेपर डाइट प्राचार्य ने पूरी गोपनीयता के साथ तैयार करवाए थे। परीक्षा में कुल 20 से 22 सवाल पूछे गए थे।



पूरे क्वेश्चन-पेपर के लिए कुल 100 अंक निर्धारित किए गए थे। नकल रोकने के लिए पेपर के तीन अलग सेट बनाए गए। सीईओ ने स्पष्ट कहा कि जानकार होने के नाते पेपर जल्दी हल करें। सभी शिक्षकों को पेपर पूरा करने हेतु एक घंटे का समय मिला।



रो पड़ीं महिला शिक्षक, सुनाई अपनी व्यथा

परीक्षा के दौरान माहौल काफी भावुक और तनावपूर्ण भी हो गया था। समीक्षा और टेस्ट के बीच एक महिला शिक्षक रोने लगीं। उन्होंने बताया कि वह 16 साल से अच्छा रिजल्ट दे रही हैं। इस बार परिणाम बिगड़ने पर उन्हें बहुत बुरा लग रहा था।



डांट सुनने के कारण वह खुद को संभाल नहीं पाईं। हालांकि, भावनाओं के बावजूद प्रशासन ने किसी को रियायत नहीं दी। सभी शिक्षकों को अंत तक अपना टेस्ट देना ही पड़ा।



लापरवाही पर प्रशासन का सख्त रुख

प्रशासन ने पहले ही अतिथि शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू कर दी थी। 30% से कम रिजल्ट वाले अतिथि शिक्षक हटा दिए गए हैं। अब नियमित शिक्षकों और प्राचार्यों की बारी आ गई है।



प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परिणाम सुधारना ही होगा। सीईओ ने शिक्षकों को सख्त लहजे में अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सेकंड परीक्षा में बच्चों का रिजल्ट सुधरना चाहिए। रिजल्ट नहीं सुधरा तो जिम्मेदार शिक्षकों पर गाज जरूर गिरेगी।



जिला पंचायत सीईओ इच्छित गढ़पाले ने अपना उद्देश्य साफ कर दिया। वह चाहते हैं कि सरकारी स्कूलों का रिजल्ट किसी हाल में न बिगड़े। खराब परिणाम के लिए उन्होंने सीधे तौर पर शिक्षकों को जिम्मेदार माना है।



हालांकि, उन्होंने शिक्षकों को सुधार का एक सुनहरा मौका भी दिया है। यदि अगले टेस्ट में बच्चों का प्रदर्शन सुधरा तो कार्रवाई नहीं होगी। शिक्षक अब बच्चों का भविष्य संवारने की जुगत में लग गए हैं। प्रशासन की इस सख्ती से हड़कंप मचा हुआ है।



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