राजगढ़ में सियासी बवाल: मंत्री जी देखते रहे, जिला पंचायत अध्यक्ष की हो गई पिटाई

Amresh Kushwaha | Jul 25, 2026, 10:13 IST
प्रभारी मंत्री के सामने जिला पंचायत अध्यक्ष से हाथापाई
राजगढ़ के नरसिंहगढ़ में सांदीपनि स्कूल लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान बड़ा सियासी विवाद हुआ। प्रभारी मंत्री चैतन्य कश्यप के सामने जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्र सिंह सौंधिया को मंच से धक्का देकर उतार दिया गया।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • राजगढ़ में स्कूल लोकार्पण कार्यक्रम में बड़ा सियासी विवाद हुआ।
  • जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्र सिंह सौंधिया को मंच से धक्का दिया गया।
  • यह घटना प्रभारी मंत्री चैतन्य कश्यप के सामने हुई।
  • पुलिस ले जाते वक्त एक बुजुर्ग ने सौंधिया को थप्पड़ मारा।
  • भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में शुक्रवार को एक स्कूल लोकार्पण कार्यक्रम बड़े सियासी विवाद में बदल गया। यह कार्यक्रम सांदीपनि स्कूल के लोकार्पण के लिए रखा गया था। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री चैतन्य कश्यप मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। इसी दौरान मंच पर हंगामा हुआ और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।



क्या हुआ कार्यक्रम में

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्र सिंह सौंधिया भी शामिल होने जा रहे थे। सौंधिया कांग्रेस समर्थक माने जाते हैं। पुलिस को आशंका थी कि वे प्रदर्शन कर सकते हैं। इसी वजह से पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों को रास्ते में रोक दिया। इस रोक-टोक से नाराज होकर सौंधिया वहीं धरने पर बैठ गए।



बाद में प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें समझाया। इसके बाद सौंधिया कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। शुरुआत में उन्हें जमीन पर बैठने के लिए जगह दी गई। बाद में उन्हें मंच पर भी स्थान दे दिया गया। वहीं, कार्यक्रम के बीच में ही हालात बिगड़ गए।



मंच पर हुआ विवाद

मंच पर मौजूद कुछ नेताओं और सौंधिया के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते सौंधिया को मंच से धक्का देकर नीचे उतार दिया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि यह घटना प्रभारी मंत्री चैतन्य कश्यप के सामने हुई। मंच पर मौजूद अफसर और नेता कुछ देर तक सिर्फ देखते रहे। इस दौरान किसी ने भी विवाद को रोकने की कोशिश नहीं की।



धक्का देकर उतारे जाने के बाद माहौल और बिगड़ गया। पुलिस को हालात संभालने के लिए आगे आना पड़ा।



थप्पड़ की घटना

पुलिस सौंधिया को मंच से उतारने के बाद थाने ले जाने लगी। इसी दौरान भीड़ में मौजूद एक बुजुर्ग ने सौंधिया के कान के पास थप्पड़ जड़ दिया। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। थप्पड़ मारे जाने के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। बाद में सौंधिया ने थाने पहुंचकर इस घटना की शिकायत दर्ज कराई।



सौंधिया का कहना है कि उन्हें जान-बूझकर अपमानित किया गया। उनका आरोप है कि यह सब सोची-समझी रणनीति के तहत हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।



विवाद की असली वजह

रिपोर्ट के मुताबिक विवाद तब बढ़ा जब सौंधिया प्रभारी मंत्री और कलेक्टर से बातचीत कर रहे थे। आरोप है कि इसी बीच स्थानीय विधायक मोहन शर्मा के बेटे सुदीप शर्मा वहां पहुंचे। सुदीप शर्मा और कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सौंधिया कार्यक्रम में बाधा डाल रहे हैं। इसी आरोप के बाद सौंधिया को मंच से धक्का देकर उतार दिया गया।



इसके बाद कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। मौके पर मौजूद अफसर, नेता और पुलिसकर्मी कुछ देर तक हालात को सिर्फ देखते रहे। स्थिति संभालने में प्रशासन को थोड़ा वक्त लगा।



एक स्थानीय जिला अध्यक्ष अमन अरोरा ने भी इस विवाद पर अपनी बात रखी। उनका आरोप है कि जब सौंधिया प्रभारी मंत्री और कलेक्टर से चर्चा कर रहे थे, तभी विधायक के बेटे ने उन्हें वहां से हटने के लिए कहा। उनके मुताबिक इसी बात से विवाद और बढ़ गया।



वीडियो हुआ वायरल

थप्पड़ मारने की यह घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बुजुर्ग ने सौंधिया को थप्पड़ मारा। इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में भी हलचल मच गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों तरफ के कार्यकर्ता इस घटना पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।



कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह घटना निर्वाचित जनप्रतिनिधि के अपमान जैसी है। उनका कहना है कि सरकारी कार्यक्रम में इस तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जा सकती। वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं का पक्ष है कि सौंधिया खुद कार्यक्रम में बाधा डाल रहे थे। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच मामला अब पुलिस जांच में है।



स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि घटना की गंभीरता से जांच की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। इस पूरे मामले ने जिले की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।



सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक कार्यक्रम की बदइंतजामी नहीं है। इसे स्थानीय राजनीतिक खींचतान का नतीजा भी बताया जा रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के साथ सार्वजनिक तौर पर हुई यह घटना गंभीर मानी जा रही है।



कई लोगों का कहना है कि इससे प्रशासनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही आगे से ऐसे सरकारी कार्यक्रमों में बेहतर व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई जा रही है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर लोकतांत्रिक मर्यादा और सार्वजनिक कार्यक्रमों की गरिमा से जुड़ी है। किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि के साथ सार्वजनिक तौर पर हुई हिंसा गंभीर विषय है। यह कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। नागरिकों को शांतिपूर्ण और सम्मानजनक सार्वजनिक व्यवहार का अधिकार है।



इस तरह की घटनाएं राजनीतिक टकराव को भी बढ़ावा दे सकती हैं। जनता को यह जानने का हक है कि सरकारी कार्यक्रमों में क्या हुआ और जिम्मेदार कौन है। इसलिए यह खबर आम जनता और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए जरूरी है।



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