राज्यसभा चुनाव में 5 करोड़ का ऑफर! कांग्रेस बोली- हमारे विधायक बिकाऊ नहीं
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट अब सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की जंग बन चुकी है। भाजपा ने महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय और रोमांचक बना दिया है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) का गंभीर आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने दावा किया है कि उसके विधायकों को 5-5 करोड़ रुपए तक के ऑफर दिए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि उसके विधायक बिकाऊ नहीं हैं, जबकि भाजपा हर हाल में तीसरी सीट जीतने की रणनीति पर काम कर रही है।
तीसरी सीट पर सियासी संग्राम
राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
दूसरी ओर भाजपा ने अंतिम समय में महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस सीट को लेकर लगातार रणनीतियां बन रही हैं और दोनों दल जीत के दावे कर रहे हैं।
5-5 करोड़ के ऑफर का आरोप
राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस ने भाजपा पर सबसे बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने कांग्रेस विधायकों से संपर्क कर उन्हें 5-5 करोड़ रुपए तक का ऑफर दिया है।
कांतिलाल भूरिया का दावा है कि कांग्रेस विधायकों को फोन कर लालच दिया गया, लेकिन सभी ने साफ शब्दों में इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि कांग्रेस के विधायक बिकने वाले नहीं हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है। यही आरोप अब चुनावी मुकाबले का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
भाजपा पर खरीद-फरोख्त की राजनीति का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा के पास तीसरी सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं है। इसके बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारना इस बात का संकेत है कि सत्ता पक्ष खरीद-फरोख्त और दबाव की राजनीति के जरिए चुनावी गणित बदलने की कोशिश कर रहा है। पटवारी ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रही है।
कांग्रेस का दावा- सीट हमारी, लेकिन अंदरखाने बढ़ी चिंता
सार्वजनिक मंचों पर कांग्रेस नेता लगातार जीत का दावा कर रहे हैं। मीनाक्षी नटराजन से लेकर हरीश चौधरी तक सभी नेता कह रहे हैं कि कांग्रेस का एक भी विधायक कहीं नहीं जाएगा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीसरी सीट के लिए भाजपा के मैदान में उतरने के बाद कांग्रेस खेमे में सतर्कता बढ़ गई है। यही वजह है कि लगातार एकजुटता के संदेश दिए जा रहे हैं। साथ ही, विधायकों की निगरानी पर भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
भाजपा की रणनीति साफ, हर हाल में तीसरी सीट जीतने का लक्ष्य
भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर यह संकेत दे दिया है कि वह मुकाबले को सिर्फ औपचारिकता नहीं मान रही। पार्टी के भीतर इस सीट को जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद समेत हर राजनीतिक विकल्प पर मंथन होने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व को भरोसा है कि चुनावी गणित में उलटफेर संभव है। साथ ही, इसी विश्वास के साथ तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तीसरी राज्यसभा सीट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ गई है। यदि भाजपा अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने में सफल रहती है तो इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जाएगा। इससे न सिर्फ उनका कद बढ़ेगा बल्कि प्रदेश संगठन और चुनावी रणनीतिकारों की भी मजबूती साबित होगी।
वहीं यदि भाजपा तीसरी सीट जीतने में असफल रहती है तो विपक्ष इसे सत्ता पक्ष की रणनीतिक विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ राज्यसभा सीट नहीं बल्कि राजनीतिक नेतृत्व की परीक्षा भी बन गया है।
18 जून तक नजरें मध्य प्रदेश पर
तीसरी राज्यसभा सीट का मुकाबला अब पूरी तरह प्रतिष्ठा, रणनीति और संख्या बल की जंग में बदल चुका है। एक तरफ कांग्रेस खरीद-फरोख्त के आरोप लगाकर भाजपा को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा जीत के लिए पूरा दमखम लगा रही है।
अब सबकी निगाहें 18 जून पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि कांग्रेस की एकजुटता भारी पड़ती है या भाजपा का राजनीतिक दांव तीसरी सीट पर कमाल कर जाता है।
FAQ
- मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव कब होगा?
मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीट पर 18 जून को मतदान होगा। - मध्यप्रदेश राज्यसभा की तीसरी सीट पर उम्मीदवार कौन हैं?
BJP ने महेश केवट को और कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। - राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग क्या होता है?
राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब है कि जब चुनाव में कोई पार्टी साफ बहुमत नहीं ले पाती, तो नेता अपने फायदे के लिए पैसे, मंत्री पद या दूसरी चीज़ें ऑफर करके किसी विधायक या सांसद को अपनी पार्टी में खींच लेते हैं। यानी वोट खरीदकर या बेचकर सरकार बनाने या गिराने की कोशिश करना।
ये खबरें भी पढ़िए...
कौन हैं महेश केवट? जिन पर बीजेपी ने राज्यसभा की तीसरी सीट का लगाया दांव
राज्यसभा चुनाव : तीसरी सीट के लिए आज नामांकन भरेंगे महेश केवट और मीनाक्षी
भाजपा का बड़ा सियासी दांव, महेश केवट को बनाया तीसरा राज्यसभा प्रत्याशी
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सीट हथियाने के लिए तीसरा उम्मीदवार उतारेगी भाजपा