राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपतराय सहित 14 को बनाया आरोपी
समझें क्या है पूरा मामला...
- चंपतराय पर गबन का आरोप, एसआईटी ने घेरा।
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 14 लोग आरोपी, FIR की सिफारिश।
- दानपात्र की चाबी टिन्नू के पास, खुला बड़ा राज।
- दो करोड़ बरामद, पांच साल का ऑडिट होगा।
- राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव! CEO की होगी नियुक्ति।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच कर रही SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय समेत 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
SIT ने FIR दर्ज करने, ट्रस्ट के पुनर्गठन और पांच साल के ऑडिट की सिफारिश की है। अब तक पांच आरोपियों की निशानदेही पर दो करोड़ रुपए बरामद हो चुके हैं। दानपात्र की चाबी एक कर्मचारी के पास मिली है।
SIT ने सरकार को सौंपी 20 पन्नों की रिपोर्ट
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सात जून को सामने आया था। इसके बाद 13 जून को राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय SIT (SIT – Special Investigation Team) बनाई। लखनऊ के मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत इसके अध्यक्ष बनाए गए।
SIT ने 15 जून से जांच शुरू की। सात दिन के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट देने का निर्देश था। मंगलवार को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को 20 पन्नों की यह रिपोर्ट सौंप दी गई।
चंपतराय समेत 14 लोग आरोपी
रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय को भी आरोपी बनाया गया है। उनके अलावा ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और व्यवस्था प्रमुख रामशंकर यादव टिन्नू सहित कुल 14 लोग आरोपियों की सूची में हैं। SIT ने 150 लोगों से पूछताछ की है। इनमें ट्रस्ट और बैंक से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी दोनों शामिल हैं।
दानपात्र की चाबी टिन्नू के पास मिली
जांच में पता चला कि मंदिर के दानपात्रों की चाबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थी। यह एक बड़ी चूक मानी जा रही है। SIT ने रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि सेवादारों को गबन की जानकारी पहले से थी।
नकदी के अलावा भक्तों के दान में आए कुछ आभूषण भी गायब पाए गए हैं। चढ़ावे की गणना में शामिल कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब तक दो करोड़ रुपए बरामद
पांच आरोपियों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर अब तक दो करोड़ रुपए बरामद किए जा चुके हैं।
SIT का कहना है कि चोरी में 25 से 30 लोगों की सीधी भूमिका सामने आई है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मंदिर कर्मचारियों की बिना तलाशी के आवाजाही होती रही। यही लापरवाही इस चोरी की बड़ी वजह बनी।
रिपोर्ट में क्या-क्या सिफारिशें हैं?
SIT ने रिपोर्ट में कई अहम सुझाव दिए हैं। पहली सिफारिश है कि संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। दूसरा सुझाव है कि ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए और किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को CEO (CEO – Chief Executive Officer) बनाया जाए। तीसरा सुझाव पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे का ऑडिट कराने का है।
इसके अलावा दान राशि की गणना का साप्ताहिक ऑडिट, प्रतिदिन चढ़ावे की इंट्री, CCTV (CCTV – Closed-Circuit Television) कैमरों का डेटा स्टोरेज 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने और आरोपियों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने देने की भी सिफारिश की गई है।
अब केंद्रीय गृह मंत्रालय लेगा फैसला
राज्य सरकार यह रिपोर्ट जल्द केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी। मंत्रालय तय करेगा कि ट्रस्ट के किन सदस्यों को हटाया जाए। SIT अध्यक्ष ने बताया कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है। जांच अभी जारी रहेगी और दायरा और बढ़ सकता है। कुछ बयान ट्रस्ट के दस्तावेजों से मेल नहीं खा रहे हैं, जो जांच को और गहरा बनाएंगे।
SIT अध्यक्ष डॉ. विजय विश्वास पंत ने बताया कि प्रारंभिक गोपनीय जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को सौंपी गई है। अब तक की जांच में जो जानकारियां सामने आई हैं, उन्हें रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है।
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