सेव के बाद रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को मिला GI टैग
समझें क्या है पूरा मामला
- रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को भारत सरकार ने जीआई टैग दिया है।
- रतलाम अब मध्य प्रदेश का पहला जिला है जिसके चार उत्पादों को यह टैग मिला है।
- बालम ककड़ी सैलाना के आदिवासी क्षेत्र में उगती है और सिर्फ एक महीने मिलती है।
- गराडू की मांग बड़े शहरों से लेकर दुबई तक है।
- जीआई टैग से किसानों को बेहतर दाम और नई पहचान मिलेगी।
रतलाम बना MP का खास जिला
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। यहां की दो खास उपज, बालम ककड़ी और गराडू को भारत सरकार ने जीआई टैग (GI Tag यानी Geographical Indication Tag) दे दिया है। यह टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान को कानूनी मान्यता देता है। इसका मतलब है कि अब ये दोनों उत्पाद दुनिया के किसी भी बाजार में रतलाम के नाम से पहचाने जाएंगे।
इससे पहले रतलाम की सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को भी जीआई टैग मिल चुका है। यानी अब रतलाम के पास चार-चार उत्पादों की यह खास पहचान है। मध्य प्रदेश में ऐसा किसी अन्य जिले के साथ नहीं हुआ। इस तरह रतलाम प्रदेश का पहला जिला बन गया है जिसके इतने उत्पादों को जीआई टैग हासिल है।
क्या बोले उद्यानिकी विभाग के अधिकारी
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंगल सिंह डुडवे ने बताया कि सैलाना क्षेत्र में बालम ककड़ी करीब 100 हेक्टेयर में और बांगरोद के गराडू करीब 120 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं।
उनके मुताबिक इन फसलों (MP Agriculture) से जिले के बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं। जीआई टैग (MP GI Tags) मिलने से इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम भी मिल सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे जिले के दूसरे किसान भी इन फसलों की खेती की तरफ आकर्षित होंगे।
बालम ककड़ी की खासियत क्या है?
सैलाना के आदिवासी इलाके में उगाई जाने वाली बालम ककड़ी आम ककड़ी से बिल्कुल अलग है। इसकी सबसे बड़ी पहचान है इसका भीतर से केसरिया और हरा रंग। यह ककड़ी सलाद की तरह नहीं, बल्कि नाश्ते की तरह खाई जाती है।
खास बात यह है कि इसका मौसम बेहद छोटा होता है। अगस्त से सितंबर के बीच सिर्फ एक महीने के लिए यह बाजार में आती है। इस छोटी सी खिड़की में ही इसके चाहने वाले इसका स्वाद लेते हैं।
गराडू की दीवानगी दुबई तक
रतलाम के बांदगरोद, खेतलपुर, सेजावता और धमोतर इलाके में उगाया जाने वाला गराडू (Garadu) एक खास किस्म का कंदमूल है। इसे फ्राई करके स्नैक्स की तरह खाया जाता है। बाहर से कुरकुरा और अंदर से मुलायम, यही इसकी पहचान है। ठंड के मौसम में यह बाजार में आता है और इसके लिए दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से लेकर दुबई तक ऑर्डर आते हैं।
मालवा के दूसरे जिलों में भी गराडू उगता है, लेकिन रतलाम के आसपास के गांवों में उगने वाले गराडू की साइज और क्वालिटी बेहतर मानी जाती है।
यही वजह है कि रतलाम का गराडू बाकियों से अलग पहचान रखता है। इसके अलावा गराडू विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) गुणों से भी भरपूर होता है।
जीआई टैग की कोशिश किसने शुरू की
इन दोनों उत्पादों के लिए जीआई टैग दिलवाने की पहल मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई (MSME यानी Micro, Small and Medium Enterprises) मंत्री चेतन्य कश्यप ने शुरू की थी।
जीआई टैग इस बात की कानूनी गारंटी देता है कि उत्पाद उसी भौगोलिक क्षेत्र से आया है जिसका दावा किया जा रहा है। यह नकली उत्पादों से असली उत्पाद की रक्षा भी करता है।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
जीआई टैग मिलने के बाद किसान अपनी उपज को प्रमाणित तरीके से बाजार में उतार सकते हैं। इससे खरीदार को भरोसा मिलता है और किसान को दाम। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड पहचान बनने से निर्यात के रास्ते भी खुलते हैं। रतलाम के किसानों के लिए यह एक बड़ा अवसर है।
FAQ
- प्रश्न 1: जीआई टैग क्या होता है और यह किसानों के लिए क्यों जरूरी है?
उत्तर: जीआई टैग यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (Geographical Indication Tag) किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान को सरकारी और कानूनी मान्यता देता है। यह प्रमाणित करता है कि उत्पाद उसी खास जगह से आया है जिसका दावा किया जा रहा है। किसानों के लिए यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे उनके उत्पाद को बाजार में अलग पहचान मिलती है, नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलती है और बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ती है। - प्रश्न 2: रतलाम की बालम ककड़ी आम ककड़ी से कैसे अलग है?
उत्तर: बालम ककड़ी सैलाना के आदिवासी इलाके में उगाई जाती है और यह अपने केसरिया और हरे रंग के लिए खास मानी जाती है। आम ककड़ी की तरह इसे सलाद में नहीं, बल्कि नाश्ते की तरह खाया जाता है। यह सिर्फ अगस्त से सितंबर के बीच एक महीने के लिए ही मिलती है। इसका अनोखा स्वाद और सीमित मौसम इसे खास बनाते हैं। - प्रश्न 3: रतलाम के किन-किन उत्पादों को अब तक जीआई टैग मिल चुका है?
उत्तर: रतलाम के अब तक चार उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। पहले रतलाम की सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को यह टैग मिला था। अब बालम ककड़ी और गराडू को भी यह पहचान मिल गई है। इस तरह रतलाम मध्य प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन गया है जिसके चार उत्पादों को जीआई टैग हासिल है।
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