रेरा चेयरमैन की खाली पड़ी कुर्सी, सदस्य संभाल रहे कामकाज, बिल्डरों के करोड़ों के प्रोजेक्ट फंसे
News in Short
- मध्यप्रदेश में रेरा का चेयरमैन पद 7 मार्च से खाली है।
- बिल्डरों की फाइलें 3 से 6 महीने से रेरा में अटकी हैं।
- चेयरमैन की सहमति के बिना फाइलें पास नहीं हो सकतीं।
- प्रदेश में लगभग 450 से ज्यादा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पेंडिंग हैं।
News In Detail
रेरा में काम का बोझ, पर राहत नहीं
मध्यप्रदेश में रेरा (Real Estate Regulatory Authority) इस वक्त बेहद दबाव में है। काम का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन जमीन पर कुछ खास नजर नहीं आ रहा। बिल्डरों के प्रोजेक्ट का पंजीयन होना जरूरी है, लेकिन यह प्रक्रिया महीनों से ठहरी हुई है।
सात मार्च से रेरा के चेयरमैन का पद खाली है। बताया जा रहा है कि इसके बाद से बिल्डरों के प्रोजेक्ट का पंजीयन रुक गया है।
छुट्टी पर चले गए थे पूर्व चेयरमैन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यप्रदेश रेरा केपूर्व चेयरमैन एपी श्रीवास्तव 6 मार्च को अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले करीब 22 दिन की छुट्टी पर चले गए थे। छुट्टी पर जाने से पहले उन्होंने रेरा के कामकाज का बंटवारा कर दिया था।
इसमें मेंबर एसएस राजपूत को प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन और उसकी सुनवाई का काम सौंपा, वहीं मेंबर रश्मि अग्रवाल को शिकायतों की सुनवाई और प्रशासनिक काम दिए गए थे।
फाइलें क्यों अटक रही हैं?
किसी भी प्रोजेक्ट को बेचने से पहले उसका रेरा में पंजीयन जरूरी होता है। इस पंजीयन में डेवलपर से कई जानकारियां और दस्तावेज लिए जाते हैं। इसके बाद तीन सदस्यीय समिति फाइल की समीक्षा करती है।
वहीं, असल अड़चन यह है कि चेयरमैन के बिना यह समिति अपना काम पूरा नहीं कर सकती। फाइल को अंतिम मंजूरी के लिए चेयरमैन की सहमति जरूरी होती है। चेयरमैन नहीं हैं, इसलिए सब कुछ रुका है।
डेवलपर्स परेशान, ब्याज की मार अलग
डेवलपर्स का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदकर नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग जैसी संस्थाओं से सभी जरूरी अनुमतियां ले ली हैं। अब वे रेरा में पंजीयन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पंजीयन नहीं हो रहा। इस बीच प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पा रहा और समय बीतता जा रहा है। लागत बढ़ रही है और बैंक लोन पर ब्याज की मार अलग पड़ रही है।
डेवलपर्स ने कहा कि उनके सामने एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई जैसी स्थिति बन गई है।
450 प्रोजेक्ट पेंडिंग, राजधानी में 5 से ज्यादा रुके
जानकारी के अनुसार, रेरा (भू संपदा विनियामक प्राधिकरण) से रजिस्टर्ड प्रदेश के करीब 450 प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं मिल पाई है। अकेले राजधानी भोपाल में पांच से ज्यादा प्रोजेक्ट अनुमति न मिलने से रुके हुए हैं।
यह सिर्फ बिल्डरों की समस्या नहीं है। इन प्रोजेक्ट्स में फ्लैट या प्लॉट बुक करने वाले आम खरीदार भी फंसे हैं। वे अपने घर का सपना पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
केडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि रेरा चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया तुरंत शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के बड़े शहरों में विकास योजनाओं के अभाव में रियल एस्टेट की स्थिति पहले से अच्छी नहीं है। रेरा पंजीयन में देरी से राज्य के राजस्व में कमी भी आती है।
केडाई मध्यप्रदेश के अध्यक्ष धीरेश खरे ने कहा कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू से ही लेट है। इसे ज्यादा सुगम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेवलपर्स की करोड़ों रुपए की पूंजी फंसी है, ब्याज की मार पड़ रही है और लागत लगातार बढ़ रही है।
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