रिटायर्ड आईएएस ओपी श्रीवास्तव ने छोड़ी सुख-सुविधाएं, पत्नी संग निकले नर्मदा परिक्रमा पर
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पूर्व IAS ओपी श्रीवास्तव पत्नी के साथ कर रहे हैं नर्मदा परिक्रमा
10 दिसंबर 2025 से शुरू की आध्यात्मिक यात्रा।
24 मार्च को जबलपुर के भेड़ाघाट पहुंचे।
26 मार्च को अमरकंटक के लिए करेंगे प्रस्थान।
VRS लेकर पत्नी ने भी साधना मार्ग अपनाया।
News in detail
प्रशासन से अध्यात्म तक का सफर
पूर्व आईएएस ओपी श्रीवास्तव ने अब अपने जीवन को पूरी तरह आध्यात्मिक साधना की ओर मोड़ दिया है। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन में कई अहम पदों पर कार्य किया। उन्होंने कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर, एडिशनल कलेक्टर और एक्साइज आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों का दायित्व संभाला। अपने प्रशासनिक जीवन में उन्होंने अनुशासन, सादगी और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की।
पत्नी ने भी निभाया संकल्प
जबलपुर में दीपक सेठी सहित अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया। दीपक सेठी ने बताया कि इस आध्यात्मिक यात्रा में उनकी धर्मपत्नी भारती श्रीवास्तव भी समान रूप से सहभागी हैं। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली। यह निर्णय दंपती के त्याग और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने सांसारिक सुविधाओं से दूरी बनाकर साधना का मार्ग चुना।
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जबलपुर में आध्यात्मिक प्रवास
नर्मदा परिक्रमा के दौरान 23 मार्च 2026 को श्रीवास्तव दंपती जबलपुर के भेड़ाघाट पहुंचे। यहां उन्होंने आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताया और ज्ञानेश्वरी दीदी से आशीर्वाद प्राप्त किया। उनकी यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था बल्कि आत्मिक शांति और साधना का भी प्रतीक बनती जा रही है।
अमरकंटक की ओर अगला पड़ाव
जबलपुर प्रवास के बाद दंपती 26 मार्च की सुबह अमरकंटक के लिए प्रस्थान करेंगे। नर्मदा नदी के उद्गम स्थल की ओर बढ़ती यह यात्रा उनके संकल्प और भक्ति को और भी मजबूत बनाती है।
ओपी श्रीवास्तव आईएएस श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस के गंभीर अध्येता माने जाते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने नर्मदापुरम में नर्मदा तट पर आश्रम स्थापित किया। यहां उन्होंने साधना, अध्ययन और आध्यात्मिक चिंतन को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है।
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प्रेरणा बनता आध्यात्मिक संकल्प
यह यात्रा केवल धार्मिक परिक्रमा नहीं, बल्कि त्याग, तप, श्रद्धा और आत्मानुशासन का उदाहरण है। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे इस दंपती का कदम समाज के लिए प्रेरणा है। यह बताता है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर आध्यात्मिकता को अपनाया जा सकता है।