रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव की पोस्ट से मचा बवाल, एपस्टीन कांड से जोड़कर पश्चिमी नैतिकता पर तीखा हमला

रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने फेसबुक पोस्ट में पश्चिमी नैतिकता और एपस्टीन कांड को जोड़ते हुए कठोर टिप्पणी की है। उन्होंने भारतीय जातिवाद पर पश्चिमी आलोचकों के दोगले रवैये को उजागर किया है।

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Amresh Kushwaha
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ईसाई समाज के सबसे चर्चित कैरेक्टर या कहें संत सांता क्लॉज के बहाने रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव ने जोरदार तंज कसा है। सांता क्लॉज को पश्चिमी संस्कृति के मेटाफर की तरह प्रस्तुत करते हुए मनोज श्रीवास्तव ने एपस्टीन फाइल्स और पश्चिमी नैतिकताओं को सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने अपनी लंबी फेसबुक पोस्ट में पश्चिमी अकेडमिक संस्थाओं और समता-उपदेशकों को रोचक तरीके से जेफरी एपस्टीन कांड से जोड़ा है।

हिन्दू समाज पर उपदेश, अपने घर में चुप्पी?

पोस्ट में रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव ने लिखा कि जो लोग सालों से हिन्दुओं की वर्णव्यवस्था को शोषण मूलक कहकर भारत को नैतिक प्रवचन देते रहे, उन्हें एपस्टीन मामले से यह सीखना चाहिए कि असल, प्रत्यक्ष और आपराधिक शोषण क्या होता है।

रिटायर्ड IAS ने आरोप लगाया कि अमेरिकी अकादमिक जगत का एक वर्ग लगातार भारत की जाति व्यवस्था को नस्लवाद के बराबर बताने में लगा रहा, जबकि उसी दौरान उनके अपने संस्थानों में हुए गंभीर नैतिक अपराधों को दशकों तक नजरअंदाज किया गया।

एपस्टीन और विश्वविद्यालय: असहज सवाल

  • MIT की मीडिया लैब को एपस्टीन से डोनेशन मिला था।
  • हार्वर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ प्रोग्राम्स को भी एपस्टीन का डोनेशन मिला था।
  • रॉकफेलर विश्वविद्यालय का नाम भी सार्वजनिक चर्चाओं में आया है।

रिटायर्ड IAS अधिकारी ने सवाल किया कि जब यह सब बीस सालों तक चलता रहा, तो अमेरिकी विश्वविद्यालयों की इक्विटी लैब्स और एथिक्स कमिटियां आखिर क्या कर रही थीं? या वे केवल भारत और हिन्दू समाज पर शोध-पत्र लिखने में व्यस्त थीं।

Physician, heal thyself लेकिन किसने कहा?

पोस्ट में बाइबिलीय कहावत Physician, heal thyself का हवाला देते हुए कहा गया कि पश्चिमी नैतिकता के स्वयंभू ठेकेदारों से किसी ने यह नहीं कहा कि पहले अपनी गिरेबान में झांको। आरोप यह नहीं कि केवल व्यक्ति दोषी थे, बल्कि यह कि संस्थागत संरक्षण (Institutional Capture) मौजूद था। इसमें प्राइवेट जेट, प्राइवेट द्वीप, महंगी लीगल टीमें और नेटवर्क-प्रोटेक्शन की गारंटी शामिल है।

Jeffrey Epstein's private islands put up for sale for $125m - BBC News
एपस्टीन द्वीप

द्वीप का प्रतीक और सत्ता का मनोविज्ञान

रिटायर्ड IAS अधिकारी ने एपस्टीन के Little St. James Island को सिर्फ एक साधारण द्वीप नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक प्रतीक बताया। उनके मुताबिक, ये प्राइवेट द्वीप उन ताकतवर लोगों की चाहत को दर्शाता है, जो समाज, नैतिकता और कानून से दूर रहकर अपनी मर्जी से जीने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने अपनी पोस्ट में जेम्स बॉन्ड फिल्मों के विलेन, भारतीय फिल्मों के तानाशाह किरदारों और रावण की लंका का उदाहरण दिया, ये दिखाने के लिए कि द्वीप हमेशा जिम्मेदारी से बचने का प्रतीक रहा है।

दान: करुणा या कवच?

रिटायर्ड IAS अधिकारी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में एक और तीखा बिंदु उठाया कि पश्चिमी एलीट अक्सर दान और समाजसेवा का इस्तेमाल अपने नैतिक इमेज को सुधारने के लिए करते रहे हैं।

न्याय प्रणाली पर भी सवाल

पोस्ट में एपस्टीन को मिली सीमित सजा और Plea deal को लेकर भी अमेरिकी न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। जिमी सेवाइल, हार्वे विंस्टीन और NXIVM जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा गया कि ये सिर्फ व्यक्तिगत गलतियां नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता के संकेत हैं।

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जानें कौन हैं रिटायर्ड IAS मनोज श्रीवास्तव

मनोज श्रीवास्तव 1987 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के सेवानिवृत IAS अफसर हैं। वे कई महत्वपूर्ण विभागों में अहम पदों पर काम कर चुके हैं। 2021 में वे पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए थे। खास बात ये है कि उन्हें प्रशासनिक काम का अच्छा अनुभव तो है ही, साथ ही साहित्य में भी उनकी गहरी रुचि रही है।

जेफरी एपस्टीन कौन है?

एपस्टीन का जन्म 1953 में न्यूयॉर्क में हुआ था। आदमी दिमाग का तेज था। खासतौर पर गणित में मास्टर, मगर फितरती। इसलिए पढ़ाई ज्यादा रास नहीं आई। वह बिना कॉलेज डिग्री के ही अमेरिका के फाइनेंशियल सेक्टर में ऊंचे पदों पर पहुंच गया। बाद में उसने खुद की फाइनेंशियल मैनेजमेंट कंपनी शुरू की, जो अमीर ग्राहकों को आकर्षित करती थी।

धीरे-धीरे अमेरिका के अमीर तबके में एपस्टीन की धाक बनती गई और खुद भी इतना पैसे वाला हो गया कि खुद द्वीप और प्राइवेट जेट तक खरीद लिया। एपस्टीन अपने प्राइवेट जेट से बड़े-बड़े लोगों को द्वीप पर लाता और रंगीन पार्टियां करता।

इन पार्टियों में एप्सटीन नाबालिग लड़कियों को मसाज के नाम पर बुलवाता था। इन पार्टियों में सेक्स-ट्रैफिकिंग भी नेटवर्क चल रहा था। इसमें नाबालिग लड़कियों को पैसे और ग्लैमर का लालच देकर पॉवरफुल लोगों के सामने पेश किया जाता था।

जानें क्या है एपस्टीन फाइल्स विवाद

इन दिनों एक विवाद चर्चाओं में है- एपस्टीन फाइल्स में दरअसल यह कहानी किसी थ्रिलर सीरीज से कम नहीं है। सालों पुरानी सीक्रेट डील्स, पावरफुल लोगों के नाम, अचानक मौतें और अब लाखों पन्नों की गोपनीय फाइलें- ये सब मिलकर एक ऐसी कहानी बनाते हैं, जिसकी गूंज आज भारत तक सुनाई दे रही है। तो आइए हम भी इस एपस्टीन के जिन्न को शुरू से समझने की कोशिश करते हैं। 

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जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंस एक्सपर्ट थे, जिन्हें नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी के आरोपों के लिए कुख्याति मिली। उनकी कहानी धन, शक्ति और अपराध की कहानियों से भरी है।

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