एपस्टीन फाइल्स पर दुनिया में मचा हंगामा, जानें रसूखदारों के सीक्रेट द्वीप की पूरी कहानी

एपस्टीन फाइल्स को लेकर दुनियाभर में राजनीतिक तूफान मच गया है। कई बड़े नामों के सामने आने से सनसनी का माहौल है

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Jitendra Shrivastava
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Photograph: (thesootr)

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News In Short

एपस्टीन सेक्स-ट्रैफिकिंग और शक्तिशाली वैश्विक नेटवर्क से जुड़ा था।
2019 में एपस्टीन की मौत ने साजिश के सवाल उठाए।
फाइल्स से अनिल अंबानी जैसे हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के कनेक्शन का खुलासा।
भारत का एपस्टीन से जुड़ा मामला अभी राजनीतिक विवाद में है।

News In Details

इन दिनों एक विवाद चर्चाओं में है- एपस्टीन फाइल्स में दरअसल यह कहानी किसी थ्रिलर सीरीज से कम नहीं है। सालों पुरानी सीक्रेट डील्स, पावरफुल लोगों के नाम, अचानक मौतें और अब लाखों पन्नों की गोपनीय फाइलें- ये सब मिलकर एक ऐसी कहानी बनाते हैं, जिसकी गूंज आज भारत तक सुनाई दे रही है। तो आइए हम भी इस एपस्टीन के जिन्न को शुरू से समझने की कोशिश करते हैं। 

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जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी वित्तीयकर्मी थे, जिन्हें नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी के आरोपों के लिए कुख्याति मिली। उनकी कहानी धन, शक्ति और अपराध की कहानियों से भरी है।

जेफरी एपस्टीन कौन है?

एपस्टीन का जन्म 1953 में न्यूयॉर्क में हुआ था। आदमी दिमाग का तेज था। खासतौर पर गणित में मास्टर, मगर फितरती। इसलिए पढ़ाई ज्यादा रास नहीं आई। वह बिना कॉलेज डिग्री के ही अमेरिका के फाइनेंशियल सेक्टर में ऊंचे पदों पर पहुंच गया। बाद में उसने खुद की फाइनेंशियल मैनेजमेंट कंपनी शुरू की, जो अमीर ग्राहकों को आकर्षित करती थी।

धीरे-धीरे अमेरिका के अमीर तबके में एपस्टीन की धाक बनती गई और खुद भी इतना पैसे वाला हो गया कि खुद द्वीप और प्राइवेट जेट तक खरीद लिया। एपस्टीन अपने प्राइवेट जेट से बड़े-बड़े लोगों को द्वीप पर लाता और रंगीन पार्टियां करता।

इन पार्टियों में एप्सटीन नाबालिग लड़कियों को मसाज के नाम पर बुलवाता था। इन पार्टियों में सेक्स-ट्रैफिकिंग भी नेटवर्क चल रहा था। इसमें नाबालिग लड़कियों को पैसे और ग्लैमर का लालच देकर पॉवरफुल लोगों के सामने पेश किया जाता था।

2005 में पहली बार आया रेडार पर

फिर हुआ यूं कि 2005 में फ्लोरिडा पुलिस ने एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों को अपने निजी द्वीप और हवेलियों में यौन शोषण के आरोप लगाए। साथ ही सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क चलाने की बात भी सामने आई।   

सीक्रेट डील और सजा

2007-08 में, जब जेफ्री एपस्टीन को फिर कई गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा। एक "सीक्रेट डील" भी सामने आई। इसमें उसे सिर्फ 13 माह की हल्की सजा दी गई और जेल में एक आरामदायक पैरोल जैसा अरेंजमेंट मिला। इस डील के बदले उसने कई बड़े लोगों के नाम अपनी फाइलों में दबाए। इसके बाद भी एपस्टीन को कोई फर्क नहीं पड़ा। वह हाई सोसायटी की पार्टियों, अरबपतियों और नेताओं के बीच घूमता रहा।

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2019 में फिर गिरफ्तारी

फिर 2019 में एपस्टीन को फिर गिरफ्तार किया गया। इस बार न्यूयॉर्क की जेल में भेजा गया। उसके खिलाफ सैकड़ों पन्नों की नई चार्जशीट से मीडिया में तूफान मच गया, लेकिन कुछ हफ्तों बाद ही जेल में उसकी संदिग्ध मौत ने सभी को हैरान कर दिया।

हालांकि, यह आधिकारिक तौर पर सुसाइड बताया गया, लेकिन गार्ड की ड्यूटी, सीसीटीवी और हाई प्रोफाइल नामों की वजह से आज भी यह सवाल उठता है कि क्या एपस्टीन की मौत के पीछे कोई बड़ी साजिश थी? 

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फिर बड़ा फाइल्स को खोलने का दबाव

इसके बाद असली "फाइल्स" की लड़ाई शुरू हुई। एपस्टीन की पीड़ित लड़कियों, पत्रकारों और अदालतों ने दबाव डाला कि सरकार को एपस्टीन से जुड़ी सारी फाइलें सार्वजनिक करनी चाहिए।

फिर 2026 की शुरुआत में, अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पन्ने, 1.8 लाख से ज्यादा तस्वीरें और 2000 वीडियो सार्वजनिक किए। इन्हें मीडिया ने "एपस्टीन फाइल्स" की सबसे बड़ी खेप कहा जाता है। इनमें ईमेल, बड़े- बड़े लोगों के फ्लाइट रिकॉर्ड, बैंक डिटेल्स और हाई प्रोफाइल मेहमानों की लिस्ट जैसी कई जानकारियां शामिल हैं।

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एपस्टीन का भारत कनेक्शन

इन फाइलों से पता चला कि एपस्टीन का सेक्स-ट्रैफिकिंग नेटवर्क सिर्फ अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एशिया, खासकर भारत तक भी फैला हुआ था। इसके कारोबारी और राजनीतिक कनेक्शन भी सामने आए, जिससे यह स्कैंडल और भी गहरा हो गया।

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भारत से जुड़ा एपस्टीन मामला: प्वाइंट वार समझिए...

भारत का कनेक्शन

हालिया डॉक्यूमेंट्स और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन का भारत से कनेक्शन मुख्य रूप से कारोबारी, राजनयिक और रणनीतिक बातचीत के जरिए सामने आ रहा है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक आपराधिक आरोप नहीं लगाए गए हैं।

अनिल अंबानी और एपस्टीन का संपर्क

भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच ईमेल और संदेशों का रिकॉर्ड यह दिखाता है कि दोनों के बीच नियमित संपर्क था। अंबानी ने एपस्टीन से रक्षा व्यापार के विस्तार के लिए मदद मांगी थी। इसमें पूर्व इजरायली प्रधानमंत्री एहुद बराक जैसे रणनीतिक संपर्कों की बात भी हुई।

राफेल डील और बैक-चैनल कूटनीति

2016 के राफेल डील के समय, दासो-रिलायंस जॉइंट वेंचर के ऐलान के दौरान भी अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत हुई थी। इन ईमेल्स से यह पता चलता है कि कैसे बड़े हथियार सौदे और भू-राजनीतिक समीकरण निजी नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाए जाते हैं।

भारत से जुड़े निवेशक और उद्यमी

कुछ रिपोर्ट्स में भारतीय मूल के निवेशक, टेक उद्यमी और राजनयिकों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि, इस पर कोई ठोस आपराधिक मामला या आधिकारिक जांच नहीं हुई है। इसलिए भारत में यह मामला अभी "राजनीतिक और मीडिया स्टॉर्म" के रूप में ज्यादा दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में संसद, न्यायालय या जांच एजेंसियों द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

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