जल जीवन मिशन घोटाला: रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के घर पर रेड, कई अधिकारी-ठेकदार हिरासत में

राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है। रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के घर पर छापेमारी की है। जांच में प्रमुख अधिकारी और ठेकेदारों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (IAS)

News In Short 

  • राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में ACB ने प्रदेशभर में छापेमारी की।
  • रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के ठिकाने पर ACB की छापेमारी। 
  • कई ठेकेदारों और अधिकारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
  • जल जीवन मिशन घोटाले में 900 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई।
  • घोटले में बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई।

News In Detail

राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने प्रदेश में बड़ी छापामारी की है। इसका मुख्य केंद्र रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल का घर रहा, जहां 17 फरवरी मंगलवार देर रात से सर्च अभियान चल रहा है। एसीबी की विशेष टीम का नेतृत्व DIG रामेश्वर सिंह ने किया। एसीबी ने जयपुर, दिल्ली, बाड़मेर, सीकर, जालौर सहित बिहार और झारखंड के 15 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की है।

पूर्व IAS के घर पर छापेमारी

इस कार्रवाई का मुख्य निशाना रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल रहे। उनकी जल जीवन मिशन के दौरान हुए करोड़ों के फर्जीवाड़े में संलिप्त पाए गए हैं। माना जा रहा है कि इस घोटाले की कड़ियां उच्च प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंची हैं। यही कारण है कि ACB ने सुबोध अग्रवाल के साथ ही अन्य अधिकारियों के घरों और दफ्तरों पर छापे मारे हैं।

अधिकारी-ठेकेदारों को लिया हिरासत में 

छापेमारी के दौरान ACB ने कई बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों को हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक जिन अधिकारियों और ठेकेदारों को हिरासत में लिया गया, उनमें केडी गुप्ता, सुशील शर्मा, डीके गौड़, महेंद्र सोनी, विशाल सक्सेना, दिनेश गोयल, शुभांशु दीक्षित, अरुण श्रीवास्तव, और निरिल कुमार शामिल हैं। इन सभी से पूछताछ जारी है। ACB को उम्मीद है कि इससे बड़े खुलासे होंगे।

मामले की FIR दर्ज

एसीबी ने PHED (पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट) के तीन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से ठेके बांटे और सरकारी खजाने में सेंधमारी की। इन अधिकारियों में तत्कालीन मुख्य अभियंता दिनेश गोयल, पूर्व अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी, और अधिशासी अभियंता सिद्धार्थ टांक शामिल थे।

900 करोड़ की हेराफरी

जल जीवन मिशन घोटाला राजस्थान का एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला है, जिसमें 'हर घर जल' योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में नल कनेक्शन देने के नाम पर 900 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी की गई। ठेकेदारों ने PHED के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर बड़े ठेके हासिल किए और घटिया क्वालिटी के पाइपों का इस्तेमाल किया। जांच में यह सामने आया कि कई जगहों पर बिना काम किए ही करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।

ACB और ED कर रही है जांच

इस मामले में ACB और ED दोनों ही जांच कर रही हैं। इस घोटाले में उच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदार ठेकेदारों की संलिप्तता सामने आ रही है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है।

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