राजस्थान के ऊंट-भेड़ों की आवाजाही के लिए एमपी में नया कॉरिडोर, अब आसानी से छत्तीसगढ़ तक जा सकेंगे

Ashish Bhardwaj | Feb 16, 2026, 12:43 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान के ऊंटों और भेड़ों की आवाजाही के लिए मध्य प्रदेश ने नया कॉरिडोर खोला हैं। यह पांचवां मार्ग होगा, जिसके जरिए छत्तीसगढ़ तक पशुओं को आने-जाने की सुविधा मिलेगी।

News In Short

  • राजस्थान के ऊंटों और भेड़ों के लिए मध्य प्रदेश में नया कॉरिडोर बनाया।
  • राजस्थानी पशुपालकों को अब एमपी में पांचवें मार्ग से पशुओं की चराई की सुविधा मिलेगी।
  • 40 साल बाद मध्य प्रदेश में पशुओं के लिए नए कॉरिडोर की मंजूरी दी गई।
  • पशुपालकों को अब पांचवे मार्ग से छत्तीसगढ़ तक अपने पशु ले जाने की अनुमति मिलेगी।
  • मध्य प्रदेश सरकार ने 1986 के पशु चराई नियमों के तहत नया मार्ग

News In Detail

राजस्थान के ऊंटों, भेड़ों और अन्य पशुओं की आवाजाही के लिए नया कॉरिडोर खोलने की घोषणा मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने की है। इस निर्णय से राजस्थान के पशुपालकों को अब अपने पशुओं को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक ले जाने के लिए नया मार्ग मिल सकेगा। 40 साल बाद किए गए इस बदलाव से राजस्थान के जानवरों की आवाजाही को काफी आसानी होगी, जिससे पशुपालकों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

पांचवे मार्ग की मंजूरी

राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच अब पांचवां मार्ग मंजूर किया गया है। यह राजस्थान के पशुपालकों को उनके ऊंटों और भेड़ों को मध्य प्रदेश में चराने की अनुमति देगा। इस मार्ग से राजस्थान के पशुपालक अपने पशुओं के साथ मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकेंगे। यह मार्ग दमोह, नरसिंहपुर, कटनी, जबलपुर, डिंडौरी, अमरकंटक होते हुए छत्तीसगढ़ तक जाएगा। इससे पहले चार मार्गों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन इस नए मार्ग की मंजूरी से पशुपालकों को और अधिक सुविधा होगी।

1986 के चराई नियमों के तहत मार्गों का निर्धारण

मध्य प्रदेश सरकार ने 1986 में अन्य राज्यों के पशुओं के लिए चराई नियम बनाए थे। इनके तहत अब पांचवां मार्ग भी घोषित किया गया है। इन नियमों के तहत, पहले चार मार्ग थे। इनसे राजस्थान के पशुपालक विभिन्न जिलों से होते हुए मध्य प्रदेश में प्रवेश करते थे। अब नए मार्ग के जुड़ने से पशुपालकों को आवाजाही में सुविधा होगी। उन्हें अपने पशुओं की चराई के लिए एक सुरक्षित और सुनिश्चित रास्ता मिलेगा।

पहले से मौजूद मार्ग

इससे पहले मध्य प्रदेश में चार मार्गों का उपयोग किया जाता था, जिनसे राजस्थान के पशुपालक अपने पशुओं को लेकर मध्य प्रदेश में प्रवेश करते थे। ये मार्ग इस प्रकार हैं:

सवाई माधोपुर से माली घाट, चंबल नदी होते हुए श्योपुर, कराहल, जोहरी, शिवपुरी, मोहन्ना, ग्वालियर और भिंड होकर यूपी के इटावा में निकासी।

शाहबाद से बमोरी (गुना), गुना, ईसागढ़, चंदेरी होकर यूपी के ललितपुर में निकासी।

इकलेरा से भोजपुर, खिलचीपुर, राजगढ़, सितोलिया, लटेरी, सिरोंज, चौराहा, सारस, बहेड़ी, ढाकेनी, चंदेरी होकर यूपी के ललितपुर में निकासी।

गुजरात से महाराष्ट्र की ओर जाने वाले पशु झाबुआ, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर होकर महाराष्ट्र की सीमा में जाते हैं।

नए कॉरिडोर से मिलने वाले लाभ

नए कॉरिडोर के जरिए राजस्थान के पशुपालकों को अपनी पशु चराई के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक वैकल्पिक रास्ते मिलेंगे। इससे पशुपालकों को ना केवल अधिक रास्तों का लाभ मिलेगा, बल्कि उनकी यात्रा भी सुरक्षित और सुविधाजनक होगी। इसके अलावा, नए मार्ग से राजस्थान के पशुओं की आवाजाही और चराई में ज्यादा आसानी होगी, जिससे पशुपालकों को आर्थिक रूप से भी फायदा होगा।

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