RUMSL सोलर प्रोजेक्ट में बड़ा खेल? मेड इन इंडिया की शर्त, लेकिन लगा डाले चीन के मॉड्यूल, हो गया 1000 करोड़ का खेल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत और मेड इन इंडिया को बढ़ावा देने की लगातार बात करते हैं। इसी मकसद से केंद्र सरकार ने सोलर प्रोजेक्ट्स में भारतीय कंपनियों के ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) प्रमाणित मॉड्यूल का इस्तेमाल अनिवार्य किया था। लेकिन मध्यप्रदेश के तीन बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स में इस नियम की अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
दस्तावेजों और आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि टेंडर में भारतीय मॉड्यूल का वादा करने के बाद कुछ कंपनियों ने अधिकारियों की मिलीभगत से सस्ते चीनी मॉड्यूल लगा दिए। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो सरकार को अगले 25 वर्षों में करीब 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा का आर्थिक नुकसान सामने आ सकता है।
टेंडर में मेड इन इंडिया, प्लांट में चीन के मॉड्यूल!
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सरकारी सोलर परियोजनाओं में केवल ALMM प्रमाणित भारतीय मॉड्यूल ही लगाए जाएंगे। इसी शर्त के आधार पर Rewa Ultra Mega Solar Limited (RUMSL) ने नीमच, शाजापुर और ओंकारेश्वर की परियोजनाओं के टेंडर जारी किए थे।
कंपनियों ने भी भारतीय मॉड्यूल की लागत के आधार पर अपनी बोली लगाई और सबसे कम दर देने वाली कंपनियों को काम मिल गया। वहीं, अब आरोप है कि टेंडर मिलने के बाद कुछ कंपनियों ने जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर भारतीय मॉड्यूल की जगह चीन से सस्ते मॉड्यूल मंगाकर लगा दिए।
किन परियोजनाओं पर उठे सवाल
दस्तावेजों और आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर तीन बड़ी परियोजनाओं में चीनी मॉड्यूल लगाए जाने के आरोप सामने आए हैं-
- Tata Power Energy Ltd – 320 मेगावाट (नीमच)
- Solar Arise – 125 मेगावाट (शाजापुर)
- Amp Energy – 100 मेगावाट (ओंकारेश्वर)
Amp Energy का क्या कहना है?
ओंकारेश्वर परियोजना को लेकर Amp Energy का कहना है कि केंद्र सरकार ने 10 मार्च 2023 को जारी आदेश के तहत तकनीकी कारणों से एक वर्ष के लिए ALMM नियम में छूट दी थी। इसी वजह से कंपनी ने चीन के शंघाई से मॉड्यूल खरीदकर प्लांट लगाया। हालांकि यहां भी सवाल उठ रहे हैं। छूट मार्च 2023 तक लागू थी, जबकि परियोजना का काम उसके बाद पूरा हुआ।
ऐसे में यह जांच का विषय है कि मॉड्यूल की खरीद, आयात, स्थापना और कमीशनिंग तय समयसीमा के भीतर हुई या नहीं। दूसरी ओर, नीमच और शाजापुर की परियोजनाओं में ऐसी किसी छूट का स्पष्ट आधार सामने नहीं आया है। इसलिए इन दोनों मामलों में टेंडर की शर्तों के उल्लंघन के आरोप अधिक गंभीर माने जा रहे हैं।
कैसे हुआ करोड़ों का खेल?
मॉड्यूल खरीद में बड़ी बचत भारतीय ALMM प्रमाणित मॉड्यूल की कीमत करीब 11.50 रुपए प्रति वाट बताई जाती है। वहीं चीन के गैर-ALMM मॉड्यूल करीब सात से आठ रुपए प्रति वाट में उपलब्ध हैं। यानी प्रति वाट करीब तीन से चार रुपए की बचत होती है।
यदि केवल नीमच (320 मेगावाट) और शाजापुर (125 मेगावाट) की परियोजनाओं को देखें तो कुल क्षमता 445 मेगावाट बनती है। इस आधार पर कंपनियों को मॉड्यूल खरीद में लगभग 150 से 180 करोड़ रुपए तक की बचत होने का अनुमान है। (यह अनुमान प्रति वाट कीमत के अंतर पर आधारित है।)
सरकार ने महंगा टैरिफ भी चुकाया
कंपनियों ने टेंडर में भारतीय मॉड्यूल की ऊंची कीमत को आधार बनाकर बिजली का टैरिफ तय कराया। यदि बाद में उन्हीं परियोजनाओं में सस्ते चीनी मॉड्यूल लगाए गए, तो उत्पादन लागत कम हो गई, लेकिन सरकार को पहले से तय ऊंची दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इससे बिजली की कीमत में लगभग 50 से 75 पैसे प्रति यूनिट का अंतर पड़ सकता है। 25 साल की बिजली खरीद अवधि में यही अंतर जोड़ने पर सरकार पर करीब 1362 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
केंद्र ने ALMM-2 भी लागू किया, लेकिन निगरानी पर सवाल
केंद्र सरकार ने अब ALMM-2 लागू करने की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं। इसके तहत केवल मॉड्यूल ही नहीं बल्कि सोलर सेल भी भारत में बने होना जरूरी होगा। लेकिन सवाल यह है कि यदि पहले चरण के नियमों का ही प्रभावी ऑडिट नहीं हो रहा, तो नए नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित होगा? यही वजह है कि इस पूरे मामले में निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
चीनी मॉड्यूल वाले प्लांट का उद्घाटन कराने की तैयारी?
सूत्रों का दावा है कि नीमच में 320 मेगावाट का प्लांट पूरी तरह तैयार हो चुका है और इसके उद्घाटन की तैयारी चल रही है। आरोप है कि इस परियोजना में चीनी मॉड्यूल लगाए गए हैं, जबकि उद्घाटन केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से कराने की तैयारी की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ टेंडर नियमों के उल्लंघन का नहीं बल्कि केंद्र सरकार की मेड इन इंडिया नीति की अनदेखी का भी माना जाएगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि आपने मेरी जानकारी में यह मामला लाया है। मैं इसकी जांच करवाता हूं। यदि ऐसा हुआ है तो यह गलत है। टेंडर जिन शर्तों पर हुआ था, उसी के अनुसार प्लांट लगाए जाने चाहिए थे।
FAQ
- RUMSL के सोलर प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी का आरोप है?
RUMSL (Rewa Ultra Mega Solar Limited) ने नीमच, शाजापुर और ओंकारेश्वर में सोलर प्रोजेक्ट के टेंडर जारी किए थे जिनमें ALMM प्रमाणित भारतीय मॉड्यूल लगाना अनिवार्य था। आरोप है कि कंपनियों ने भारतीय मॉड्यूल की ऊंची कीमत पर टैरिफ तय कराया लेकिन प्लांट में सस्ते चीनी मॉड्यूल लगा दिए। RTI से मिले दस्तावेज इस आरोप को पुष्ट करते हैं और अधिकारियों ने भी माना कि अगर ऐसा हुआ तो यह नियमों का उल्लंघन है।
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