सरकारी अस्पतालों की बदलेगी सूरत, मध्यप्रदेश को मिलेंगे 1000 नए डॉक्टर्स
Aman Vaishnav | Jun 22, 2026, 12:45 IST
मध्यप्रदेश को मिलेंगे 1000 स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए पीजी पास डॉक्टरों की चॉइस फिलिंग शुरू हो गई है। वहीं पिछले अनुभवों को देखें तो ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों के न रुकने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है।
- स्वास्थ्य विभाग ने इस साल पीजी बॉन्डेड डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है।
- इससे लगभग एक हजार विशेषज्ञ डॉक्टर मिलने की उम्मीद है।
- वहीं देखा जाए तो पिछले अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं।
- पिछले साल नियुक्त किए गए डॉक्टरों में से सिर्फ 10 फीसदी ने ही जॉइन किया था।
बॉन्डेड डॉक्टरों की नई नियुक्ति प्रक्रिया
हालांकि अंतिम पोस्टिंग पद की उपलब्धता और विभाग की जरूरत के आधार पर ही होगी। इस प्रक्रिया से प्रदेश को लगभग एक हजार विशेषज्ञ डॉक्टर मिलने की उम्मीद जागी है।
वहीं बीते सालों का रिकॉर्ड भरोसा नहीं दिलाता है। आंकड़े बताते हैं कि करीब 60 फीसदी डॉक्टर तय समय पर जॉइन ही नहीं करते हैं। कई मामलों में तो जॉइनिंग टलती रहती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं जाना चाहते डॉक्टर
जून के आखिरी सप्ताह में ये आदेश जारी हुए थे। साथ ही डॉक्टरों को 15 दिन के भीतर जॉइन करने को कहा गया था, लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा।
बता दें कि सिर्फ 10 फीसदी डॉक्टरों ने ही जॉइन किया था। यह भी वे डॉक्टर थे जिन्हें जिला अस्पताल या शहरी क्षेत्रों में नियुक्ति मिली थी।
शहर बनाम गांव की खाई
विभाग ने बाद में कई डॉक्टरों को नोटिस भी भेजा था। नोटिस के बाद कुछ डॉक्टर अस्पताल पहुंचे भी। लेकिन वे लंबे समय तक टिके नहीं। कुछ समय बाद ही वे अवकाश पर चले गए।
इस तरह बॉन्डेड डॉक्टरों की नियुक्ति सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई है। असली फायदा मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा।
बॉन्ड राशि वसूली में सख्ती नहीं होती
विभाग इसके लिए विधिक कार्रवाई की चेतावनी जरूर देता है। लेकिन हकीकत में यह कार्रवाई शायद ही कभी होती है।
जो डॉक्टर अनिवार्य बंधपत्र सेवा नहीं देते उनका पंजीयन सस्पेंड करने का भी प्रावधान है। इसके लिए भी सिर्फ चेतावनी ही दी जाती रही है।
इसी ढिलाई का नतीजा है कि चेतावनी के बावजूद पिछले साल 40 फीसदी डॉक्टरों ने सेवा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की।
ये खबरें भी पढ़िए...
एमपी न्यूज: पुलिस भर्ती के बदले नियम, अब पदक नहीं प्रदर्शन भी देगा सरकारी नौकरी
डॉक्टरों की लापरवाही, सब पर भारी, शरीर पर बेअसर हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं
अब फोन पर नहीं मिलेगा डॉक्टर्स का अपॉइंटमेंट, बंद होगा एनएचए हेल्पलाइन नंबर
कांग्रेस समाज में फूट डालकर सत्ता की लूट करना चाहती है, सुधांशु बोले, भूपेश बघेल को पंजाब से भगाकर गुवाहाटी में पटका
By Arun Tiwari
मंत्रालय से बाहर फिर हो सकती है मोहन कैबिनेट की बैठक, गांधी सागर में 17 नवंबर की तारीख प्रस्तावित
By Amresh Kushwaha
अफसरों की गलती से मध्यप्रदेश के युवाओं की नौकरी पर संकट! कहीं मान्य, कहीं अमान्य जाति प्रमाणपत्र, आखिर जिम्मेदार कौन?
By Atul Dwivedi
शिखर अग्रवाल मामले में गहलोत की CBI-ED जांच की मांग, CM भजनलाल से पूछा- चुप क्यों हैं?
By Mukesh Sharma
बीजेपी विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन, हैदराबाद में चल रहा था इलाज, लंबे समय से थे बीमार
By Harrison Masih
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण पर HC सख्त, केंद्र से MP सरकार तक पर लटकी अवमानना की तलवार
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ के वन कर्मचारियों के लिए खरीदी जा रही 29 हजार की लाठी, बाजार से दोगुनी कीमत पर उठे सवाल
By Arun Tiwari