देवरी का नाम देवपुरी होगा, सीएम बोले- प्रस्ताव भेजें हम स्वीकृति देंगे
समझें क्या है पूरा मामला...
- CM मोहन यादव ने सागर के देवरी का नाम देवपुरी करने का ऐलान किया।
- विधायक बृज बिहारी पटेरिया की मांग पर CM ने कलेक्टर को प्रस्ताव भेजने को कहा है।
- देवरी में 400 साल पुराना खंडेराव मंदिर है, इसी से यह नाम जुड़ा है।
- गौरझामर को नगर पंचायत बनाने और केसली उपज मंडी का नाम बदलने की बात कही गई।
- यह CM मोहन यादव की देवरी विधानसभा क्षेत्र की पहली यात्रा थी।
पहली बार देवरी पहुंचे CM, दिए बड़े तोहफे
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहली बार सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र पहुंचे। यहां केसली में लाड़ली बहना योजना के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं कीं। इस दौरे को स्थानीय जनता और नेताओं दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
विधायक बृज बिहारी पटेरिया की मांग पर CM ने देवरी का नाम बदलकर देवपुरी करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए जाएंगे और स्वीकृति भी दिलाई जाएगी।
देवरी क्यों बनेगी देवपुरी, क्या है इतिहास
देवरी में एक प्रसिद्ध खंडेराव मंदिर है जो करीब 400 साल पुराना है। यह मंदिर मराठी परिवारों के कुलदेवता खंडेराव को समर्पित है, जिन्हें खंडोबा भी कहते हैं। वे भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। चंपा षष्ठी पर्व पर देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं।
मराठा शासनकाल में इस नगर को देवपुरी नाम से ही जाना जाता था। सागर जिले के गजेटियर में भी यह दर्ज है। इसी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के आधार पर लंबे समय से नाम बदलने की मांग उठती रही है।
नाम बदलने की प्रक्रिया पहले से जारी
यह मांग नई नहीं है। 14 फरवरी 2025 को नगर पालिका ने देवपुरी नामकरण का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। साथ ही, 28 जुलाई 2025 को कलेक्टर ने और 4 अगस्त 2025 को राजस्व विभाग ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखे थे।
वहीं, 5 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधायक पटेरिया ने अशासकीय संकल्प पेश किया था। उस समय भी CM मोहन यादव ने केंद्र से मंजूरी दिलाने का आश्वासन दिया था। अब देवरी विधानसभा में पहली बार पहुंचकर उन्होंने इस ऐलान को फिर दोहराया है।
सत्ता और विपक्ष दोनों एकमत
इस नामकरण पर खास बात यह है कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक राय में हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस प्रस्ताव की सराहना की है। पूर्व मंत्री हर्ष सिंह ने स्वागत करते हुए कहा कि इससे सभी को फायदा होगा। वहीं, साथ में रेलवे कनेक्टिविटी और युवाओं के लिए रोजगार के मौके भी बढ़ाने होंगे।
विधायक पटेरिया ने बताया कि खंडेराव मंदिर के दर्शन के लिए देशभर से लोग आते हैं। इसलिए देवरी को रेलवे लाइन से जोड़ने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
गौरझामर और केसली मंडी को भी सौगात
सीएम मोहन यादव ने इस कार्यक्रम में सिर्फ देवपुरी नामकरण तक बात नहीं रोकी। उन्होंने गौरझामर को नगर पंचायत बनाने की भी घोषणा की। साथ ही केसली की कृषि उपज मंडी का नाम स्वतंत्रता सेनानी रानी अवंतीबाई के नाम पर रखने का एलान किया है। हालांकि जमीनी स्तर पर इन घोषणाओं पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। वहीं, CM की यह यात्रा इन मांगों को आगे बढ़ाने का मौका बनी है।
FAQ
- सागर के देवरी का नाम देवपुरी क्यों रखा जाएगा?
देवरी में करीब 400 साल पुराना खंडेराव मंदिर है। मराठा शासनकाल में इस नगर को देवपुरी के नाम से जाना जाता था। यह उल्लेख सागर जिले के गजेटियर में भी दर्ज है। इसी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के आधार पर लंबे समय से नाम बदलने की मांग हो रही थी।
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