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Photograph: (the sootr)
News in Short
- देवरी सागर जिले की नगर पालिका परिषद हैं जिसमें 2022 में नेहा अलकेश जैन अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।
- कांग्रेस से बीजेपी में आने और विधायक बनने के बाद बृजबिहारी पटेरिया से उनकी पटरी नहीं बैठ पाई थी।
- बुंदेलखंड में खाली कुर्सी-भरी कुर्सी के बीच होने वाले मुकाबले का असर बीजेपी की राजनीति पर भी पड़ा है।
- सोमवार को देवरी के 19 हजार से अधिक मतदाता राइट टू रिकॉल के तहत चुनाव में मतदान करेंगे।
- राजनीतिक खींचतान और शहर में बीजेपी के दो गुटों को देखते हुए पुलिस- प्रशासन ने भी कड़े प्रबंध किए हैं।
BHOPAL. मध्य प्रदेश में 2026 में नगर पालिका अध्यक्ष के लिए पहला राइट टू रिकॉल मुकाबला सोमवार 19 जनवरी को होने जा रहा है। तीन साल से सागर जिले के देवरी में बीजेपी नेताओं के बीच जारी जोर आजमाइश अब चुनाव तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश के साथ ही बुंदेलखंड अंचल के लिए भी 2022 के नगर पालिका चुनाव के बाद राइट टू रिकॉल का पहला मुकाबला होगा।
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News in Detail
देवरी में साल 2022 में बीजेपी के टिकट पर नेहा अलकेश जैन चुनाव जीतकर नगर पालिका अध्यक्ष बनी थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बीजेपी में आए बृजबिहारी पटेरिया के विधायक बनने के बाद से देवरी में समीकरण बदल गए। पुराने भाजपाई अलकेश जैन और बीजेपी में नवागत विधायक बृजबिहारी पटेरिया के बीच राजनीतिक खींचतान शुरूआत से ही चली आ रही है। इसको लेकर शिकवे शिकायतों का दौर भी अब तक थमा नहीं है।
संगठन से लेकर सरकार तक की गई शिकायतों की लंबी फेहरिस्त है। इसको लेकर विधायक और नपाध्यक्ष खेमों के बीच लंबी कानूनी लड़ाई भी हाईकोर्ट तक चली है। इस चुनावी खींचतान को लेकर देवरी में बीजेपी नेता और कार्यकर्ता दो खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं। वहीं संगठन द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियों के आधार पर निष्कासित निवर्तमान अध्यक्ष विधायक गुट को पटखनी देने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
तीन साल से चल रही है दोनों गुटों में उठापटक
लगातार उठापटक के बाद पिछले महीने देवरी नगर पालिका अध्यक्ष को वापस बुलाने के प्रस्ताव को सरकार से स्वीकृति मिली थी। जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राइट टू रिकॉल के तहत नोटिफिकेशन जारी किया गया था। सोमवार को देवरी में खाली कुर्सी-भरी कुर्सी के बीच चुनाव होगा। इस मुकाबले में देवरी नगर के 19248 मतदाता शामिल होंगे।
नगर पालिका क्षेत्र के 15 वार्डों में इस चुनाव के लिए 30 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। देवरी में विधायक और नपाध्यक्ष नेहा अलकेश जैन के खेमों में जारी राजनीतिक उठापटक के चलते प्रशासन ने भी तगड़े इंतजाम किए हैं। कलेक्टर- एसपी भी इस चुनाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं वहीं एएसपी और अपर कलेक्टर ने देवरी में मोर्चा संभाला हुआ है।
आमने- सामने पुराने प्रतिद्वंद्वी
राइट टू रिकॉल भले ही देवरी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए हो रहा है, लेकिन इसका असर बीजेपी के साथ ही कांग्रेस की राजनीति पर पड़ता नजर आ रहा है। देवरी में बीजेपी विधायक बृजबिहारी पटेरिया के प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री हर्ष यादव भी इस चुनाव के बहाने खासे सक्रिय हो गए हैं।
डेढ़ दशक पहले कांग्रेस विधायक रहे पटेरिया का टिकट काटकर हर्ष ने विधायकी हासिल की थी। उसके बाद से ही पटेरिया राजनीति के नेपथ्य में चले गए थे। पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की शर्त पर वे बीजेपी में शामिल हुए और फिर विधायक बन गए। अब राइट टू रिकॉल चुनाव के चलते दोनों प्रतिद्वंद्वी फिर आमने- सामने हैं।
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अब आगे क्या
मतदान में यदि भरी कुर्सी को ज्यादा वोट मिलते हैं तो एक बार फिर नेहा अलकेश जैन नपाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हो जाएंगे। इसका असर वर्तमान बीजेपी विधायक बृजबिहारी पटेरिया की साख पर भी पड़ सकता है। वहीं खाली कुर्सी के पक्ष में वोटों की संख्या ज्यादा होने पर उनका राजनीतिक कैरियर दांव पर लग सकता है। इस स्थिति को देखते हुए दोनों ही पक्ष इस चुनाव को लेकर पूरा जोर लगा रहे हैं।
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