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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- मध्य प्रदेश सरकार ने तीसरे अनुपूरक बजट की प्रक्रिया शुरू की है। सभी प्रस्ताव IFMIS और ई-ऑफिस के जरिए भेजे जाएंगे।
- वाहन खरीदी, फर्नीचर और नए मदों पर कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा जो अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालते हैं।
- 23 जनवरी तक सभी प्रस्ताव प्रशासनिक विभाग से अनुमोदित कर ई-ऑफिस के माध्यम से वित्त विभाग को भेजने होंगे।
- सभी प्रस्तावों में केंद्र से मिलने वाली सहायता और बजट बचत से समायोजन का विवरण देना जरूरी होगा।
- 19 से 27 जनवरी तक 31 विभागों के बजट प्रस्तावों पर गहन मंथन होगा, फिर वित्त मंत्री से चर्चा होगी।
NEWS IN DETAIL
BHOPAL. मध्य प्रदेश सरकार ने तीसरे अनुपूरक बजट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त विभाग ने सभी विभागों से साफ कहा है कि प्रस्ताव केवल आईएफएमआईएस (Integrated Financial Management Information System) और ई-ऑफिस के माध्यम से ऑनलाइन ही भेजे जाएं। ऑफलाइन या देरी से आए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इन खर्चों पर पूरी तरह रोक
वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि वाहन खरीदी,,फर्नीचर,कार्यालय उपकरणजैसे मदों के लिए कोई भी प्रस्ताव नहीं भेजा जा सकेगा। इसके अलावा ऐसे नए मद भी मान्य नहीं होंगे, जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता हो।
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23 जनवरी तक देना होगा अनुमोदित प्रस्ताव
सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि तृतीय अनुपूरक बजट के प्रस्ताव पहले प्रशासकीय विभाग से अनुमोदित कराएं। इसके बाद 23 जनवरी तक ई-ऑफिस के जरिए वित्त विभाग को ऑनलाइन जानकारी भेजना अनिवार्य होगा।
बीसीओ के माध्यम से भेजनी होगी पूरी जानकारी
अनुपूरक अनुमान से जुड़ी जानकारी विभाग के सभी बीसीओ (Budget Controlling Officer) के जरिए प्रस्ताव के साथ भेजनी होगी। इसमें यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि कौन-से मद के लिए अतिरिक्त राशि मांगी जा रही है।
केंद्र से मिलने वाली सहायता का भी देना होगा ब्यौरा जिन मदों में अतिरिक्त केंद्रीय सहायता राज्य सरकार का लोन अनुदान मिलना प्रस्तावित है, उसका पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। बिना स्पष्ट स्रोत बताए कोई भी प्रस्ताव मान्य नहीं होगा।
बजट बचत से समायोजन अनिवार्य
यदि किसी व्यय के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है, तो यह भी बताना होगा कि वह राशि किस बजट बचत से समायोजित होगी। संबंधित अनुदान संख्या क्या है। पूरा वित्तीय विवरण दिए बिना प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा।
इन मामलों पर ही होगा विचार
वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं प्रस्तावों पर विचार होगा-जिन्हें राज्य की आकस्मिकता निधि से अग्रिम स्वीकृति मिल चुकी हो। जिन्हें केंद्र सरकार या वित्तीय एजेंसियों से मंजूरी मिली हो। जिन्हें अन्य योजनाओं की बचत राशि से समायोजित करना संभव हो नई योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
10 दिन में 31 विभागों की बजट बैठक
प्रदेश में बजट पेश करने की तैयारी अब अंतिम चरण में है। 19 जनवरी से 27 जनवरी तक लगातार बैठकों का दौर चलेगा। इन 10 दिनों में 31 विभागों के बजट प्रस्तावों पर गहन मंथन किया जाएगा।
वित्त मंत्री से चर्चा के बाद विधानसभा में बजट
अधिकारियों की बैठकों के बाद वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से अंतिम चर्चा होगी। इसके बाद सरकार विधानसभा में बजट पेश करेगी।
16 फरवरी से शुरू होगा बजट सत्र
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। कुल 19 दिनों में 12 बैठकें होंगी। इस दौरान सरकार वित्तीय एजेंडे और विकास प्राथमिकताओं को सदन के सामने रखेगी।
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क्यों अहम है यह प्रक्रिया?
तीसरा अनुपूरक बजट राज्य की वित्तीय अनुशासन नीति का संकेतक है। सख्त नियमों के जरिए सरकार यह संदेश दे रही है कि अब खर्च नहीं, प्राथमिकता और संतुलन के आधार पर फैसले होंगे।
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